नई दिल्ली। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) द्वारा आयोजित विश्व के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव ‘भारत रंग महोत्सव’ (BRM) 2026 के 25वें वर्ष के उत्सव का आठवां दिन भारतीय लोक परंपराओं और वैश्विक रंगमंचीय अभिव्यक्तियों के अद्भुत संगम का साक्षी बना। इस दिन विश्वस्तरीय लोक प्रस्तुतियों, अंतरराष्ट्रीय नाटकों, बैंड प्रदर्शन, नुक्कड़ नाटकों, फिल्म प्रदर्शन और पुस्तक लोकार्पण सहित अनेक सांस्कृतिक गतिविधियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दिन का एक प्रमुख आकर्षण रहा ‘श्री देवी महात्मे’, जो कर्नाटक की पारंपरिक यक्षगान शैली में प्रस्तुत किया गया। इसे मंगलुरु के श्री निधि शेट्टी ने लिखा और भुवन मणिपाल ने निर्देशित किया। उडुपी, कर्नाटक की अंबाभवानी कला आर्ट्स द्वारा प्रस्तुत यह नाटक तुलु भाषा में मंचित किया गया, जिसने तटीय कर्नाटक की समृद्ध रंग परंपरा को राजधानी में जीवंत कर दिया।
अंतरराष्ट्रीय आयाम जोड़ते हुए श्रीलंका के रेड विंग्स थिएटर ग्रुप ने ‘डॉ. किंग्स लास्ट नाइट (आई हैव अ ड्रीम)’ का मंचन किया। कटोरी हॉल द्वारा लिखित और बुद्धिका दमयंथा द्वारा निर्देशित यह नाटक सिंहला भाषा में प्रस्तुत हुआ, जिसमें वैश्विक नागरिक अधिकार आंदोलन के इतिहास को प्रभावशाली ढंग से रंगमंच पर उतारा गया।
इसके साथ ही NSD TIE संडे क्लब द्वारा प्रस्तुत हिंदी नाटक ‘जब जागो तब सवेरा’, जिसका निर्देशन राजेश्वरी नंदी ने किया और सहयोग अमरेश कुमार ने दिया, अपनी समकालीन सामाजिक विषयवस्तु के कारण दर्शकों से गहराई से जुड़ने में सफल रहा।
दिल्ली के विभिन्न महाविद्यालयों के नाट्य समूहों—देशबंधु ड्रामेटिक्स सोसायटी, दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्र समूह तथा दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स के ‘प्रतिविम्ब’—ने अपने नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से टॉक्सिक मैस्कुलिनिटी, नागरिक चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर प्रभावी संदेश दिया।
रंगमंच के साथ संगीत का रंग भी महोत्सव में घुला। NSD स्टूडेंट्स यूनियन द्वारा प्रस्तुत ‘अद्वितीय’ कार्यक्रम में प्रख्यात लोकगायिका मालिनी अवस्थी के बैंड ‘सोनचिरैया’ ने अपनी जीवंत प्रस्तुति से दिल्ली अध्याय को संगीतात्मक उत्कर्ष प्रदान किया।
इसी क्रम में डॉ. मालिनी अवस्थी की पुस्तक ‘चंदन किवाड़’ का लोकार्पण भी किया गया, जिसके बाद सुश्री वाणी त्रिपाठी ‘टिक्कू’ के साथ संवाद सत्र आयोजित हुआ।
दिन का एक अन्य आकर्षण रहा गुजराती फिल्म ‘कुंडालू’ का प्रदर्शन, जो ‘चहुमुख’ में आयोजित किया गया। प्रदर्शन के बाद फिल्म की निर्मात्री नीना अरोड़ा और सुचित्रा पारिख के साथ ऑनलाइन संवाद सत्र भी हुआ।
NSD दिल्ली के साथ-साथ यह महोत्सव देश के विभिन्न शहरों—नगांव, रांची, रायपुर, गंगटोक, पारादीप, वाराणसी, बेंगलुरु, पटना, ईटानगर, कोलकाता, इम्फाल, सखालिन और दीमापुर—में भी एक साथ आयोजित हो रहा है। इस प्रकार BRM 2026 देश के सभी राज्यों में 41 स्थानों पर रंगमंच को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य को साकार कर रहा है।
25 दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव (27 जनवरी से 20 फरवरी 2026) 228 भारतीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में 277 से अधिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की रंग विविधता को वैश्विक मंच प्रदान कर रहा है। इसमें 9 देशों की भागीदारी के साथ-साथ देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के रंग समूह शामिल हैं।
बच्चों के समूहों, जनजातीय समुदायों और वंचित वर्गों के कलाकारों की सहभागिता के साथ BRM 2026, NSD की समावेशिता और रंगमंच के सार्वभौमिकरण की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करता है।
NSD रंगमंच के प्रसार और लोकतंत्रीकरण की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। हाल ही में NSD ने ‘रंग आकाश’ इंटरनेट रेडियो और ‘नाट्यम’ ओटीटी प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है, जिससे देशभर के रंगप्रेमियों तक श्रेष्ठ प्रस्तुतियां पहुंचाई जा सकें।


