कोलंबो। मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई छगनभाई पटेल और अरुणाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री चाउना मैन के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने श्रीलंका के विदेश, विदेश रोजगार एवं पर्यटन मंत्री विजिता हेराथ तथा पर्यटन उपमंत्री प्रो. रुवन रणसिंघे से भेंट की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर सार्थक चर्चा हुई।
बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत–श्रीलंका संबंधों में आई मजबूती पर विशेष चर्चा की गई। श्रीलंका के संकट के समय भारत द्वारा समय पर दी गई सहायता को दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग को गहरा करने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया गया। साथ ही भारत और श्रीलंका के बीच प्राचीन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का भी उल्लेख किया गया, जो साझा परंपराओं में रचे-बसे हैं।
उपमुख्यमंत्री चाउना मैन ने बताया कि भौगोलिक दूरी के बावजूद अरुणाचल प्रदेश और श्रीलंका थेरवाद बौद्ध परंपरा के माध्यम से गहराई से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्वी अरुणाचल प्रदेश के नामसाई से भिक्षुओं का श्रीलंका में उच्च अध्ययन, अभिधम्म शिक्षण और प्रवचनों के लिए नियमित आदान-प्रदान होता है, जो भगवान बुद्ध के करुणा, शांति और सद्भाव के संदेश को आगे बढ़ाता है। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ईको-टूरिज्म की अपार संभावनाओं को भी रेखांकित किया।
इस प्रतिनिधिमंडल के साथ श्रीलंका में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त सत्यांजल पांडेय, आर्थिक एवं वाणिज्य परामर्शदाता देविका लाल, प्रथम सचिव (राजनीतिक) नव्या सिंगला, प्रथम सचिव (आर्थिक एवं वाणिज्य) सौरभ सभलोक तथा मध्य प्रदेश के राज्यपाल के एडीसी श्रेयस मनोज कुमार भी उपस्थित रहे।
इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने श्रीलंका में रह रहे भारतीय प्रवासियों के साथ भी एक सशक्त संवाद किया। उन्होंने व्यापार, शिक्षा और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में श्रीलंका की अर्थव्यवस्था में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। साथ ही अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने और एकजुट समुदाय के रूप में जीवन जीने के लिए उनकी प्रशंसा की। उन्होंने इस संवाद के आयोजन के लिए कार्यवाहक उच्चायुक्त का आभार व्यक्त किया।
प्रतिनिधिमंडल ने गाले स्थित महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और विरासत स्थलों का भी दौरा किया, जो भारत और श्रीलंका के ऐतिहासिक एवं समुद्री संबंधों को दर्शाता है।

