जयपुर/बर्लिन। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मनी के चांसलर फेडरिक मर्ज़ के बीच हालिया उच्चस्तरीय संवाद ने भारत–जर्मनी संबंधों को नई ऊंचाई दी है। चांसलर मर्ज़ के दौरे के दौरान रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग के साथ अब सांस्कृतिक और पर्यटन साझेदारी भी इस रिश्ते का सशक्त आयाम बनी।
इसी पृष्ठभूमि में राजस्थान पर्यटन 3 से 5 मार्च तक जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित विश्व के सबसे बड़े पर्यटन व्यापार मेले ITB Berlin में प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है।
“रेगिस्तान से राइन नदी तक” थीम के साथ राजस्थान अपनी जीवित विरासत, सतत पर्यटन मॉडल और शाही आतिथ्य की विशिष्ट पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करेगा।
यूरोप से मजबूत होता जुड़ाव
पर्यटन आयुक्त रूकमणी रियाड़ के अनुसार वर्ष 2025 के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 19,45,068 विदेशी पर्यटक यात्राएँ दर्ज की गईं। इनमें से 5,75,968 पर्यटक प्रमुख 25 यूरोपीय देशों से आए जो कुल विदेशी पर्यटकों का लगभग 29.6 प्रतिशत है। जर्मनी 82,703 पर्यटक यात्राओं के साथ तीसरे स्थान पर रहा। यह स्पष्ट संकेत है कि जर्मन बाजार राजस्थान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्च-क्षमता वाला स्रोत है।
यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस के बाद जर्मनी का यह स्थान दर्शाता है कि सांस्कृतिक प्रामाणिकता, विरासत संरक्षण और अनुभव-आधारित पर्यटन की मांग जर्मन यात्रियों को राजस्थान की ओर आकर्षित कर रही है।
राजस्थान: विविध भू-दृश्य, जीवंत अनुभव
भारत के उत्तर-पश्चिम में स्थित राजस्थान का भूगोल अद्वितीय है। पश्चिम में विस्तृत थार मरुस्थल, दक्षिण में हरित अंचल और अरावली की पर्वतमालाएँ—यह विविधता एक ही राज्य में अनेक अनुभव प्रदान करती है।
अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सर्वाधिक अनुकूल है, जब मौसम सुहावना रहता है और सांस्कृतिक उत्सव अपनी पूर्ण आभा में होते हैं।
विश्व धरोहर और ‘लिविंग हेरिटेज’
राजस्थान की पहचान ‘लिविंग हेरिटेज’ के रूप में है—जहाँ किले और महल केवल स्मारक नहीं, बल्कि जीवित सांस्कृतिक केंद्र हैं।
विश्व धरोहर सूची में शामिल ‘पहाड़ी किले’—
आमेर दुर्ग,
चित्तौड़गढ़ दुर्ग,
कुंभलगढ़ दुर्ग,
रणथंभौर दुर्ग,
गागरोन दुर्ग और
जैसलमेर दुर्ग
इसके अतिरिक्त जयपुर को 2019 में विश्व धरोहर शहर का दर्जा मिला।
राजस्थान की यह विरासत जर्मनी के सुव्यवस्थित संरक्षण मॉडल से संवाद स्थापित करती है, जहाँ इतिहास और आधुनिक प्रबंधन का संतुलन देखा जाता है।
विरासत और सतत विकास पर फोकस- आयुक्त रियाड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी के नेतृत्व में राजस्थान पर्यटन नए आयाम गढ़ रहा है।
उन्होंने राजस्थान व जर्मनी के बीच समानताए बताते हुए कहा कि राजस्थान के मरुस्थलीय सफारी, रणथंभौर जैसे राष्ट्रीय उद्यान, पारंपरिक हस्तशिल्प और लोक उत्सव यूरोपीय पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं।
राज्य सौर ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी है। भड़ला सोलर पार्क जैसे प्रोजेक्ट राजस्थान की हरित प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हैं।
ईको-कैंप, सामुदायिक होम-स्टे, प्लास्टिक-मुक्त रिसॉर्ट और ई-बाइक टूर जैसे नवाचार राजस्थान को सतत पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
स्वाद, संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव
राजस्थान का दाल-बाटी-चूरमा, बाजरे की रोटी और पारंपरिक थाली मरुस्थलीय जीवन की कहानी कहते हैं। जर्मनी की जैविक भोजन परंपरा और सामूहिक भोजन संस्कृति के साथ यह संवाद विश्वास और समझ का सेतु बनता है।
खाद्य उत्सव, पाक-कला प्रशिक्षण और स्थानीय बाजार भ्रमण जैसे कार्यक्रम पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को सशक्त करते हैं।
शिक्षा और जन-से-जन संपर्क
उन्होंने कहा कि भारत में जर्मन भाषा की लोकप्रियता बढ़ रही है।
Goethe-Institut जैसी संस्थाएँ सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान को मजबूती दे रही हैं।
मोदी–शोल्ज़ संवाद के बाद कौशल विकास, छात्र विनिमय और अनुसंधान सहयोग को नई गति मिलने की संभावना है।
आईटीबी बर्लिन में प्रमुख लक्ष्य
पर्यटन आयुक्त रूकमणी रियाड़ ने रहा कि राजस्थान पर्यटन विभाग का प्रतिनिधिमंडल आईटीबी बर्लिन में—
• यूरोपीय टूर ऑपरेटरों के साथ बी-टू-बी बैठकें
• सांस्कृतिक और अनुभव-आधारित पर्यटन का प्रचार
• सतत पर्यटन मॉडल का प्रस्तुतीकरण
• नए पर्यटन सर्किट और पैकेज लॉन्च
पर विशेष फोकस रखेगा।
भारत–जर्मनी रणनीतिक साझेदारी अब सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही है। “रेगिस्तान से राइन तक” केवल एक थीम नहीं, बल्कि दो लोकतांत्रिक समाजों के बीच साझा मूल्यों, विरासत संरक्षण और सतत विकास की निरंतर यात्रा है।
रूकमणी रियाड़ के अनुसार आईटीबी बर्लिन के मंच से राजस्थान जर्मन यात्रियों और उद्योग जगत को आमंत्रित करता है आइए, इस साझेदारी को अनुभव कीजिए, संवाद को आगे बढ़ाइए और भविष्य की वैश्विक पर्यटन दिशा को मिलकर आकार दीजिए।

