कृषि प्रधान राज्यों के लिए मौसम पूर्वानुमान प्रणाली सुदृढ़, किसानों को मिल रही सटीक और समय पर जानकारी

नई दिल्ली। कृषि प्रधान राज्यों के लिए मौसम पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाया गया है, जिससे किसानों को समय पर सटीक जानकारी और सलाह मिल रही है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान एवं विज्ञान-प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 19 मार्च 2026 को राज्यसभा में यह जानकारी दी।

जिला स्तर तक सटीक पूर्वानुमान और चेतावनी

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) हरियाणा सहित पूरे देश में सात दिन पहले तक जिला-वार मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करता है। इसमें वर्षा, तापमान, हवा की गति, ओलावृष्टि, लू, शीत लहर, कोहरा और आंधी-तूफान जैसे प्रमुख मापदंड शामिल होते हैं।

मौसम की गंभीरता को दर्शाने के लिए चार स्तरीय रंग-कोड प्रणाली—हरा, पीला, नारंगी और लाल—का उपयोग किया जाता है। नारंगी और लाल श्रेणी में प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान (IBF) जारी किए जाते हैं, जिनमें कृषि, बुनियादी ढांचे और जनजीवन पर संभावित प्रभावों के साथ किसानों के लिए आवश्यक सलाह भी दी जाती है।

नाउकास्ट और आधुनिक तकनीक का उपयोग

IMD द्वारा चौबीसों घंटे तीन घंटे तक मान्य ‘नाउकास्ट’ चेतावनी भी जारी की जाती है, जो आंधी, बिजली, तेज हवाओं और भारी वर्षा जैसी घटनाओं के लिए होती है। ये चेतावनियां डॉप्लर वेदर रडार, उपग्रह डेटा और बिजली पहचान नेटवर्क के आधार पर तैयार की जाती हैं।

नाउकास्ट जिला और उप-जिला स्तर तक जारी किए जाते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर सटीकता बढ़ती है और किसानों को त्वरित निर्णय लेने में मदद मिलती है।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से किसानों तक पहुंच

मौसम पूर्वानुमान और कृषि सलाहें प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, दूरदर्शन, इंटरनेट, सोशल मीडिया और एसएमएस के माध्यम से किसानों तक पहुंचाई जाती हैं। वर्तमान में देशभर के लगभग 5.59 मिलियन किसान इन सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

मेघदूत, मौसम और ‘दामिनी’ जैसे मोबाइल ऐप, साथ ही एनडीएमए के ‘सचेत’ पोर्टल और व्हाट्सएप, एक्स व फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए भी समय पर अलर्ट जारी किए जाते हैं।

ग्राम पंचायत स्तर तक पूर्वानुमान

IMD ने पंचायती राज मंत्रालय के सहयोग से ग्राम पंचायत स्तर तक मौसम पूर्वानुमान (GPLWF) सेवा शुरू की है। यह सेवा ई-ग्रामस्वराज, मेरी पंचायत ऐप और मौसमग्राम प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

इसमें 36 घंटे का प्रति घंटा पूर्वानुमान, पांच दिन तक तीन-तीन घंटे का पूर्वानुमान और दस दिन तक छह-छह घंटे का पूर्वानुमान दिया जाता है, जिससे किसान अपनी कृषि गतिविधियों की बेहतर योजना बना सकते हैं।

उन्नत मॉडल और AI से बढ़ी सटीकता

सरकार ने भारत पूर्वानुमान प्रणाली (BharatFS), समूह पूर्वानुमान तकनीक और मिथुना-एफएस जैसे आधुनिक मॉडल लागू किए हैं। ये मॉडल वायुमंडल, महासागर और भूमि सतह के डेटा को जोड़कर अधिक सटीक पूर्वानुमान देते हैं।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग के उपयोग से पिछले दशक में मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में 30–40 प्रतिशत तक सुधार हुआ है।

पूर्व चेतावनी प्रणाली में बड़ा सुधार

हाल के वर्षों में पूर्व चेतावनी प्रणाली को काफी मजबूत किया गया है। 2025 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान भारी वर्षा की एक दिन पहले दी गई चेतावनी की सटीकता 85 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो 2020 में 77 प्रतिशत थी।

इसी तरह, पांच दिन पहले के पूर्वानुमान की सटीकता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। शीत लहर के पूर्वानुमान में भी क्रिटिकल सक्सेस इंडेक्स (CSI) में 10 से 65 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।

किसानों की आय और उत्पादकता में वृद्धि

राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (NCAER) के अध्ययन के अनुसार, 98 प्रतिशत किसानों ने मौसम आधारित सलाहों के आधार पर अपनी कृषि पद्धतियों में बदलाव किया।

इन सलाहों से फसल चयन, बुवाई, सिंचाई, उर्वरक उपयोग और कटाई जैसे निर्णय बेहतर हुए, जिससे नुकसान कम हुआ और उत्पादकता बढ़ी।

अध्ययन में पाया गया कि सभी अनुशंसित उपाय अपनाने वाले किसानों की वार्षिक आय 1.98 लाख रुपये से बढ़कर 3.02 लाख रुपये तक पहुंच गई। वर्षा आधारित क्षेत्रों में किसानों की आय में औसतन 12,500 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई।

जलवायु चुनौतियों से निपटने में मदद

मजबूत पूर्वानुमान प्रणाली और प्रभावी सलाहों के प्रसार से किसानों को समय पर निर्णय लेने में मदद मिल रही है। इससे फसल हानि कम हो रही है, संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है और कृषि क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक सक्षम बन रहा है।

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