नई दिल्ली। Keysight Technologies ने भारत में अपनी लोकल मैन्युफैक्चरिंग की शुरुआत की है, जिससे कंपनी के वैश्विक उत्पादन नेटवर्क का विस्तार होगा और देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को स्थानीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले समाधान मिल सकेंगे।
कंपनी का यह कदम एयरोस्पेस एवं रक्षा, औद्योगिक क्षेत्र, सरकारी अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी), शिक्षा जगत और शोध संस्थानों को मजबूत तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। साथ ही यह पहल भारत के “मेक इन इंडिया” अभियान को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
भारत को तेजी से उभरती इनोवेशन अर्थव्यवस्था के रूप में देखते हुए आधुनिक टेस्ट और मेज़रमेंट तकनीकों की मांग लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि वर्ष 2026 तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र 300 अरब डॉलर से अधिक का हो सकता है, जिसमें घरेलू उत्पादन और उन्नत शोध गतिविधियों का बड़ा योगदान होगा।
कीसाइट द्वारा स्थापित इस नई सुविधा के शुरुआती चरण में टेस्ट उपकरणों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके माध्यम से भारतीय और वैश्विक ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी तथा सप्लाई चेन को और मजबूत बनाया जाएगा। यह विस्तार कंपनी की भारत के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है और मेक इन इंडिया, सेमीकॉन इंडिया, नेशनल क्वांटम मिशन तथा एयरोस्पेस एवं रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रमों के अनुरूप है।
कंपनी के एशिया पैसिफिक क्षेत्र के वाइस प्रेसिडेंट एवं जनरल मैनेजर सुधीर तांगड़ी ने कहा कि भारत इनोवेशन के एक महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश कर रहा है। स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग से न केवल ग्राहकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन भी मजबूत होगी।
प्रमुख क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
सेमीकंडक्टर: डिजाइन वैलिडेशन और प्रोडक्शन टेस्टिंग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम को गति मिलेगी।
क्वांटम टेक्नोलॉजी: शोध संस्थानों और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं को क्वांटम कंप्यूटिंग में प्रगति के लिए सहयोग मिलेगा।
एयरोस्पेस एवं रक्षा: रडार, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और सैटेलाइट तकनीक के लिए आधुनिक टेस्ट सॉल्यूशंस उपलब्ध होंगे।
एआई और वायरलेस: 5जी और भविष्य के 6जी नेटवर्क, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर के विकास में तेजी आएगी।
शोध एवं शिक्षा: विश्वविद्यालयों और लैब्स को उन्नत इंजीनियरिंग और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए विश्वस्तरीय उपकरण मिलेंगे।
कीसाइट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह भारत में सरकारी संस्थानों, रिसर्च लैब्स और इंजीनियरिंग विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग जारी रखेगी, जिससे देश में तकनीकी विकास और नवाचार को और मजबूती मिल सके।
यह पहल न केवल भारत को वैश्विक तकनीकी हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि आने वाले समय में उन्नत तकनीकों के विकास और आत्मनिर्भरता को भी नई गति देगी।

