नई दिल्ली। बंगाल में वैदिक लोकतंत्र की पुनः प्रतिष्ठा हेतु रविवार को दिल्ली में हुआ बंगाल मुक्ति महा यज्ञ। दक्षिणी दिल्ली स्थित आर्य समाज मंदिर – गोविंद पुरी में गूंजती वेद ऋचाओं के बीच अपनी आहुतियां लगाते हुए उपस्थित जन समूह ने बंगाल को घुसपैठियों, जिहादियों, अतिवादियों व हिंदू द्रोही शासन से मुक्त कर हिंदू स्वाधीनता हेतु प्रभु से प्रार्थना की।
इस अवसर पर यज्ञोपरांत मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री विनोद बंसल ने कहा कि पूज्य संतों, महात्माओं और क्रातिकारियों की पुण्य धारा बंगाल को अब हिन्दू द्रोही व देश द्रोही तत्वों के चंगुल से मुक्त कराना जरूरी है। हिन्दू समाज को एकजुट होकर राज्य की समृद्धि और हिन्दू जीवन मूल्यों की पुन: प्रतिष्ठा व संरक्षण हेतु शत-प्रतिशत मतदान हेतु आगे आना होगा।
बंगाल खुदीराम बोस, बटुकेश्वर दत्त, जतिन दा व सुभाष चंद्र बोस जैसे अनेक क्रान्तिकारियों, ईश्वर चंद्र विद्यासागर व राजा राम मोहन राय जैसे समाज सुधारकों तथा स्वामी रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद जैसे सिद्ध संतों की जन्म स्थली व कर्म भूमि रही है। यहां मातंगिनी हाजरा, प्रतीलता वाड़ेदार, कल्पना दत्त तथा नीरा आर्य जैसी महान नारियां भी हुई हैं तो वहीं वंदे मातरम् जैसी कालजयी रचना लिखने वाले महान कवि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को भी बंगाल की पावन धरा ने ही जन्मा है। आर्य समाज की स्थापना से पूर्व महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने 1870 में अपनी बंगाल यात्रा के दौरान वेदों की ओर लौटने की बात कही थी।
दिल्ली आर्य प्रतिनिधि सभा के मंत्री श्री सुरेश गुप्ता ने कहा कि बंग भंग आंदोलन, भारत विभाजन की त्रासदी तथा बांग्लादेश के निर्माण के समय भी यहाँ के हिन्दू समाज ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सदियों से मुस्लिम हमलावरों, अंग्रेजी अत्याचारियों और नक्सलवादियों द्वारा यहां के हिन्दू समाज को प्रताड़ित व आतंकित किया गया। किन्तु उस ने इन सभी का डटकर मुकाबला किया। अब फिर एक बार वहां के वैदिक परिवार को बंगाली अस्मिता की रक्षा हेतु ओ३म का झंडा बुलंद करना होगा।
श्री बंसल ने स्मरण दिलाया कि हमारा कोई भी त्योहार, चाहे रामनवमी हो या श्री हनुमान जन्मोत्सव, सरस्वती पूजा हो या दुर्गा पूजा, वर्तमान राज्य सरकार पहले तो हमें उन्हें मनाने की अनुमति ही नहीं देती और यदि कोर्ट से अनुमति मिल भी जाए तो श्रद्धालुओं को पथराव और प्राण घातक हमलों का शिकार होना पड़ता है। इस बार की श्री रामनवमी पर भी मुर्शिदाबाद, पुरुलिया व वीरभूमि जिलों में जिहादी तत्वों ने हमले किए। पिछले वर्षों में तो ये हमले और भी अनेक स्थानों पर और गंभीर रूप से हुए थे। हालांकि इन विपरीत परिस्थियों में भी राज्य उच्च न्यायालय ने निर्भीकता से जो निर्णय दिए वे सराहनीय हैं।
विहिप प्रवक्ता ने यह भी कहा कि दुर्भाग्य से इस समय भी पश्चिम बंगाल का शांतिप्रिय हिंदू समाज अनेक आक्रमणों और राष्ट्र विरोधी जिहादी षड्यंत्रों का सामना कर रहा है। हिंदू त्योहारों, शोभायात्राओं, मंदिरों, मूर्तियों, घरों, दुकानों व अन्य व्यवसायिक संस्थानों पर हमले, लव जिहाद, लैंड जिहाद, धर्मांतरण, गौ हत्या, सीमापार गौ तस्करी, बांग्लादशी घुसपैठ व जनसंख्या असंतुलन जैसी अनेक कुचक्रों से राज्यभर के हिन्दू आज भी जूझ रहे हैं और वहाँ के सत्ताधीश अपने जिहादी तुष्टीकरण में आकंठ डूबे हैं। घुसपैठ की भीषण समस्या ने संसाधनों पर हमले के साथ देश की आंतरिक सुरक्षा को भी चुनौती दी है। राज्य के सत्ताधीश जिहादी तुष्टिकरण में इतने अंधे हैं कि वे अब ‘जय श्री राम’ के जय घोष व ”राम राज्य’ न नाम सुनते ही आग बबूला हो जाते हैं और पूज्य साधु संतों पर आक्रमण तक को उतारू हो जाते हैं।
श्री बंसल ने यह भी कहा कि इन सब समस्याओं से निपटने हेतु राज्य की जनता के लिए एक सुनहरा अवसर, लोकतंत्र का महान दिवस यानि मतदान पर्व, शीघ्र आने वाला है। इसमें हमारे पास हिंदू हितैषी सरकार चुन कर हिंदू द्रोहियों को परास्त करने का सुअवसर है।
हमने यहां वेद मंत्रों के साथ प्रभु से प्रार्थना की है और आप वहां निर्भय होकर हिन्दू हित में शत् प्रतिशत मतदान करें। क्योंकि हिंदू हित ही राष्ट्र हित है, जिसमें किसी का अहित नहीं। तभी हम बंगाली संस्कृति, परम्पराओं और त्योहारों के साथ राष्ट्रीय उत्सवों को निर्भय होकर आनंद से मना सकें।
रविवार को प्रातः 8.30 बजे संपन्न हुए इस महायज्ञ के शुभ अवसर पर विश्व हिंदू परिषद दक्षिणी दिल्ली के अध्यक्ष श्री दीपक खन्ना, प्रांत धर्म यात्रा सह संयोजक श्री राधा कृष्ण, दक्षिणी दिल्ली वेद प्रचार मंडल की कोषाध्यक्ष श्रीमती नीरू गुप्ता, आर्यसमाज गोविंद पुरी के प्रधान श्री प्रेम चंद गुप्ता, मंत्री सुरेश चंद्र गुप्ता, कोषाध्यक्ष श्री सत्येंद्र मिश्र, स्त्री समाज की प्रधान श्रीमती कमलेश साहनी, मंत्रिणी श्रीमती बिमलेश मिश्रा एवं अन्य उपस्थित जनसमूह ने आध्यात्मिक व राष्ट्रहित के विचारों को आत्मसात किया।

