नई दिल्ली। Strait of Hormuz में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी नाकेबंदी के दावों के बावजूद भारत की ऊर्जा आपूर्ति बाधित नहीं हुई है। अमेरिकी नौसेना की तैनाती के बीच भी कई तेल और एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से मुंबई और देश के अन्य बंदरगाहों तक पहुँच रहे हैं। यह स्थिति वैश्विक समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की जटिलताओं को उजागर करती है।
सूत्रों के अनुसार, ईरान-अमेरिका तनाव के चलते Gulf of Oman में अमेरिकी नौसेना की भारी तैनाती की गई है। इसके बावजूद, अप्रैल के मध्य से अब तक 30 से अधिक टैंकर इस संवेदनशील मार्ग को पार कर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में भी यह दावा किया गया है कि कई जहाज़ निगरानी से बचते हुए भारत तक पहुँचे हैं।
‘सीक्रेट’ समुद्री रास्ते क्या हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, जहाज़ मुख्यतः दो रणनीतिक मार्गों का उपयोग कर रहे हैं:
1. मकरान तट के सहारे वैकल्पिक मार्ग
जहाज़ ईरान के तटीय जलक्षेत्र से सटे हुए चलते हुए Makran Coast के पास से गुजरते हैं और फिर Pakistan के समुद्री क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत, किसी भी देश की नौसेना दूसरे देश के क्षेत्रीय जल (12 नॉटिकल मील तक) में बिना अनुमति कार्रवाई नहीं कर सकती। यही कारण है कि यह मार्ग जहाज़ों के लिए एक “सुरक्षा कवच” की तरह काम करता है।
2. चाबहार से अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र का सीधा रास्ता
दूसरा प्रमुख मार्ग Chabahar Port के पास से होकर गुजरता है। यहाँ से जहाज़ अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में प्रवेश कर सीधे Mumbai, गुजरात या कर्नाटक के तटों की ओर बढ़ जाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जहाज़ वैध व्यापार कर रहे हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय जल में रोकना कानूनी रूप से जटिल और विवादित होता है।
UNCLOS के नियमों का सहारा
United Nations Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) के तहत “निर्दोष मार्ग” (Innocent Passage) का अधिकार जहाज़ों को किसी भी देश के समुद्री क्षेत्र से बिना रुके गुजरने की अनुमति देता है। इसी प्रावधान का उपयोग करते हुए कई जहाज़ सुरक्षित मार्ग तलाश रहे हैं।
क्या पाकिस्तान का रास्ता व्यावहारिक है?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सैद्धांतिक रूप से भारतीय जहाज़ Pakistan के जलक्षेत्र से गुजर सकते हैं, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर यह विकल्प जटिल है। भारत-पाकिस्तान के बीच मौजूदा राजनीतिक तनाव और पारस्परिक प्रतिबंधों के कारण इस मार्ग को जोखिमपूर्ण माना जाता है।
भारतीय नौसेना की अहम भूमिका
सूत्रों के अनुसार, Indian Navy इस पूरे घटनाक्रम में महत्वपूर्ण लेकिन संयमित भूमिका निभा रही है। कई मामलों में जहाज़ों को ओमान की खाड़ी में सुरक्षित बिंदुओं तक एस्कॉर्ट किया जाता है, जिससे वे किसी भी सैन्य टकराव से बचते हुए भारतीय बंदरगाहों तक पहुँच सकें।
अमेरिका की नाकेबंदी की सीमाएं
United States Navy द्वारा लागू नाकेबंदी मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र और ईरान से जुड़े व्यापारिक मार्गों तक सीमित है। किसी भी देश के संप्रभु समुद्री क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन होगा। यही वजह है कि एक बार जब जहाज़ किसी देश के जलक्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं, वे अमेरिकी कार्रवाई से काफी हद तक सुरक्षित हो जाते हैं।
भारत की ऊर्जा सुरक्षा बरकरार
विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में इस क्षेत्र में कई भारतीय जहाज़ मौजूद हैं और सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। भारत अपनी ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक और सामरिक दोनों स्तरों पर सक्रिय है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बावजूद भारत की तेल आपूर्ति जारी रहना यह दर्शाता है कि आधुनिक वैश्विक व्यापार में समुद्री कानून, कूटनीति और रणनीतिक मार्गों की समझ कितनी अहम है। पूरी तरह “अभेद्य” नाकेबंदी आज के दौर में लगभग असंभव मानी जा रही है।

