कोलकाता। पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में शनिवार का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब राज्य में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार का गठन हुआ और शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में राज्यपाल आर.एन. रवि द्वारा पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इसके साथ ही राज्य में एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत हुई और वर्ष 2011 से चली आ रही तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षीय शासन का प्रभावी अंत हो गया।
हालांकि इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह के बीच सबसे अधिक चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विनम्र और भावुक अंदाज की रही, जिसने वहां मौजूद हजारों लोगों का दिल जीत लिया। विशाल जनसमूह का अभिवादन स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने मंच से बंगाल की जनता को दंडवत प्रणाम किया। उनका यह भावनात्मक और विनम्र gesture पूरे समारोह का सबसे यादगार क्षण बन गया।
प्रधानमंत्री के इस विनम्र अभिवादन ने यह संदेश दिया कि जनादेश को वे केवल राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि जनता के विश्वास और आशीर्वाद के रूप में देखते हैं। जैसे ही मोदी ने सिर झुकाकर जनता को प्रणाम किया, पूरा ब्रिगेड परेड ग्राउंड तालियों और जयघोष से गूंज उठा।
समारोह के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के वरिष्ठतम कार्यकर्ताओं में से एक 98 वर्षीय मक्खनलाल सरकार का आशीर्वाद लेकर संगठन के प्रति सम्मान और संस्कार की मिसाल भी पेश की। स्वतंत्रताोत्तर भारत में राष्ट्रवादी विचारधारा के शुरुआती जमीनी कार्यकर्ताओं में शामिल मक्खनलाल सरकार के प्रति प्रधानमंत्री का सम्मान राजनीतिक हलकों में विशेष चर्चा का विषय बना रहा।
यह ऐतिहासिक आयोजन इसलिए भी खास रहा क्योंकि यह गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर संपन्न हुआ। समारोह शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने शुभेंदु अधिकारी के साथ टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित कर बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को नमन किया।
इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कई केंद्रीय मंत्री, भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और पार्टी के शीर्ष नेता उपस्थित रहे। देशभर से आए नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार के गठन को राष्ट्रीय राजनीति का एक बड़ा मोड़ बताया।
मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में पारदर्शी शासन, समावेशी विकास और जनकल्याण को प्राथमिकता देने का संकल्प दोहराया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बदलाव पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नई दिशा तय करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी का दंडवत प्रणाम इस पूरे समारोह का सबसे मानवीय और प्रेरक दृश्य बनकर उभरा, जिसने यह साबित किया कि बड़े राजनीतिक क्षणों में भी विनम्रता ही सबसे बड़ी शक्ति होती है।

