नई दिल्ली। एग्रो केम फेडरेशन ऑफ इंडिया (ACFI) ने सरकार से एग्रोकेमिकल क्षेत्र को मज़बूत बनाने के लिए विशेष रियायतों की मांग की है। संगठन का कहना है कि तकनीकी कच्चे माल के आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, टैक्स हॉलिडे और एग्रोकेमिकल विनिर्माण हब की स्थापना की जानी चाहिए।
एसीएफआई ने अपनी 8वीं वार्षिक आम सभा (AGM) के दौरान वैश्विक परामर्श फर्म डेलॉइट के साथ एक नॉलेज पेपर जारी किया। “भारत और विश्व स्तर पर किसानों को गुणवत्तापूर्ण एग्रोकेमिकल उत्पाद उपलब्ध कराना” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में बताया गया कि भारत का एग्रोकेमिकल निर्यात 2014-15 में 1.3 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 3.3 अरब डॉलर हो गया है। इसके साथ भारत चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एग्रोकेमिकल निर्यातक बन गया है।
विलोवुड के एमडी परीक्षित मुंद्रा ने कहा, “तकनीकी इनपुट्स के लिए चीन पर निर्भरता रणनीतिक जोखिम पैदा करती है। भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार प्रतिबंध या फैक्ट्री बंद होने की स्थिति में आपूर्ति बाधित हो सकती है, जिससे भारत में कीमतें बढ़ सकती हैं।”
रिपोर्ट के अनुसार, उच्च मूल्य वाले कई तकनीकी अवयव देश में पर्याप्त मात्रा में निर्मित नहीं हो पा रहे हैं। इसका कारण तकनीक की कमी, उत्पादन लागत और पर्यावरणीय चुनौतियाँ हैं।
एसीएफआई-डेलॉइट रिपोर्ट: भारत का एग्रोकेमिकल निर्यात एक दशक में लगभग तीन गुना बढ़कर 3.3 बिलियन डॉलर हुआ
कृषि आयुक्त और पंजीकरण समिति के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण कुमार सिंह ने कहा कि “कृषि जलवायु पर अत्यधिक निर्भर है, इसलिए हमें न केवल फसल बल्कि किसानों के स्वास्थ्य को भी सुनिश्चित करना चाहिए।” उन्होंने जलवायु और कीट-प्रतिरोधी बीज किस्मों तथा टिकाऊ फसल सुरक्षा रसायनों को समय की आवश्यकता बताया।
डेलॉइट इंडिया के पार्टनर (एग्री बिज़नेस) राजीव रंजन ने सुझाव दिया कि सरकार को उन महत्वपूर्ण एक्टिव इंग्रेडिएंट्स और इंटरमीडिएट्स के लिए विशेष पीएलआई योजना शुरू करनी चाहिए, जिन्हें बड़ी मात्रा में आयात किया जाता है।
बायर क्रॉपसाइंस लिमिटेड के चेयरमैन और एमडी साइमन वीबश ने कहा कि “मेक इन इंडिया प्रोत्साहन, नियामक सहयोग और सहज निर्यात पंजीकरण प्रक्रियाएँ भारतीय कंपनियों के लिए वैश्विक स्तर पर अवसर बढ़ा रही हैं।”
एसीएफआई के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल धानुका ने कहा कि “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस कृषि उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के लिए अहम है।” गोदरेज एग्रोवेट के एमडी बर्जिस गोदरेज ने एग्रोकेमिकल मैन्युफैक्चरिंग पार्क की स्थापना, नए अणुओं और प्रक्रियाओं पर सहयोगी R&D, तथा एमएसएमई क्षमता निर्माण जैसे कदम उठाने की सिफारिश की।


