नई दिल्ली। बुराड़ी क्षेत्र से जुड़े एक मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक यूट्यूब चैनल पर प्रसारित वीडियो को प्रथम दृष्टया मानहानिकारक, अपमानजनक और आपत्तिजनक मानते हुए उसे तत्काल हटाने का निर्देश दिया है। यह मामला व्यापारी अजय बंसल द्वारा दायर किए गए मानहानि वाद से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने यूट्यूब चैनल संचालक अमित लाल तिवारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
अजय बंसल का आरोप है कि अमित लाल तिवारी ने उनसे पहले 10 लाख रुपये की मांग की थी। कथित रूप से मना करने पर उनके खिलाफ यूट्यूब चैनल “लाइवकास्ट” पर बिना किसी ठोस साक्ष्य के उन्हें ‘भू माफिया’ और ‘जमीन घोटालाबाज’ जैसे शब्दों से संबोधित करते हुए वीडियो प्रसारित किया गया। बंसल का यह भी आरोप है कि उक्त वीडियो प्रसारित करने के बाद उनसे 20 लाख रुपये की मांग की गई।
इन आरोपों के आधार पर अजय बंसल ने दिल्ली उच्च न्यायालय में लगभग ढाई करोड़ रुपये का मानहानि दावा दायर किया है।
कोर्ट में वीडियो की पांडुलिपि प्रस्तुत
14 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान अजय बंसल के अधिवक्ता ने संबंधित वीडियो की पांडुलिपि अदालत में प्रस्तुत की। न्यायालय ने वीडियो का अवलोकन करने के बाद प्रतिवादी को निर्देश दिया कि वह उक्त वीडियो को तत्काल हटाए और भविष्य में अजय बंसल के विरुद्ध कोई भी आपत्तिजनक या तथ्यहीन सामग्री प्रसारित न करे। अदालत का यह आदेश संबंधित पक्ष को भेज दिया गया है।
विवाद की पृष्ठभूमि
विवाद उस खबर से जुड़ा है जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि बुराड़ी स्थित एक मकान, जहां विधायक संजीव झा निवास करते हैं, कथित रूप से ग्राम सभा की जमीन पर अवैध रूप से निर्मित है। इस खबर को कई अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और कुछ पत्रकारों द्वारा भी साझा किया गया। अजय बंसल का कहना है कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए उनके खिलाफ कई आरोप लगाए गए।
पुलिस में शिकायत
अजय बंसल के वकील के अनुसार, इस मामले में संबंधित यूट्यूब पत्रकार के खिलाफ उगाही और ब्लैकमेलिंग की शिकायत स्थानीय थाने में भी दी गई है। बंसल ने कहा है कि वह उन सभी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे, जो कथित रूप से उन्हें बदनाम करने या दबाव बनाने की कोशिश में शामिल रहे हैं।
कानूनी कार्रवाई के बाद हलचल
इस मामले में अदालत की सख्त टिप्पणी और वीडियो हटाने के आदेश के बाद क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह आदेश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बिना सत्यापन के प्रसारित सामग्री को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है।

