कश्मीर को लेकर अपने दिए बयानों को लेकर फंस गई अरूंधती राय

 

नई दिल्ली। जानी मानी सामाजिक कार्यकर्ता और लेखिका अरूंधती राय एक बार फिर चर्चा में आ गई है। कश्मीर की आजादी को लेकर उनके बयान अब उनके लिए नई मुसीबत बनकर आई है।

दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना ने चर्चित लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता अरुंधति रॉय और कश्मीर विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डा. शेख शौकत हुसैन के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। यह निर्णय उनके द्वारा एक पुराने मामले के संबंध में लिया गया है।

यह मामला 2010 का है।अक्टूबर 2010 में दिल्ली में एक सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें कश्मीर मुद्दे पर चर्चा की गई थी। इस सम्मेलन का शीर्षक था “अज़ादी- द ओनली वे” (स्वतंत्रता- एकमात्र रास्ता)। इस सम्मेलन में अरुंधति रॉय, डा. शेख शौकत हुसैन और कुछ अन्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया था।

आरोप है कि इस सम्मेलन में भारत के खिलाफ और कश्मीर की स्वतंत्रता के समर्थन में विवादित बयान दिए गए थे। इन बयानों को लेकर यह आरोप लगाया गया कि यह देशद्रोही थे और राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के खिलाफ थे। इन बयानों के आधार पर एक एफआईआर दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में आरोप था कि इनके बयानों से देशद्रोह और दंगे भड़कने का खतरा था।

आरोप है कि भाषण के दौरान राय ने भारत से जम्मू-कश्मीर को आजाद करने के लिए हर संभव प्रयास करने की बात पर जोर दिया। हालांकि, शिकायतकर्ता ने इन बातों को रिकार्डिंग कर ली। शिकायतकर्ता ने नई दिल्ली के मेट्रोपालिटन मजिस्ट्रेट कोर्ट के सामने जाकर शिकायत दर्ज की थी।

कोर्ट ने 27 नवंबर 2010 को इसके बाद मामले में एफआइआर दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद 2023 में एलजी ने सीआरपीसी की धारा 196 के तहत मुकदमा करने की मंजूरी दी। अब एलजी ने बीते दिन राय के खिलाफ यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है।

 

 

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