पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी से शिष्टाचार भेंट
उमेश कुमार सिंह नई दिल्ली। पृथ्वी राज मार्ग पर स्थित पूर्व उपप्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी जी के आवास पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा राजेंद्र सिंह की शिष्टाचार …
Harpal ki khabar
उमेश कुमार सिंह नई दिल्ली। पृथ्वी राज मार्ग पर स्थित पूर्व उपप्रधानमंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी जी के आवास पर अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा राष्ट्रीय अध्यक्ष राजा राजेंद्र सिंह की शिष्टाचार …
पटना। लोकसभा चुनाव के लिए बिहार में प्रचार जोर पकड़ने के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को राजद पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में बिजली की पर्याप्त …
अहमदाबाद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृह राज्य और लंबे समय से भाजपा के गढ़ रहे गुजरात में 1984 के बाद से कोई मुस्लिम सांसद चुन कर नहीं आया है।1984 के …
कृष्णमोहन झा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केरल की वायनाड लोकसभा सीट से पर्चा दाखिल कर दिया है। राहुल के साथ नामांकन दाखिल करते समय उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव …
सुंदरगढ़/ सोनपुर (ओडिशा)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि पूर्व की सरकारों में सीमा पार करने और आतंकवादियों को मारने का साहस नहीं था। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना …
पटना। कांग्रेस ने शनिवार को बिहार, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में पांच लोकसभा सीटों के लिए उम्मीदवार घोषित किए जिनमें सबसे प्रमुख नाम शत्रुघ्न सिन्हा का है जिन्हें पटना …
वाशिंगटन। ऐसी जगह जो प्रकृति का अहसास दे, वहां पर महज 20 मिनट बिताने से आपके तनाव के स्तर में कमी आ सकती है। अध्ययन में पाया गया है कि …
मुंबई। सलमान खान की नई फिल्म ‘दबंग 3’ की शूटिंग मध्य प्रदेश के इंदौर और आसपास की लोकेशनों पर शुरु हो गई है। सोमवार से सलमान के साथ इस फिल्म …
नई दिल्ली। उपनिषदों की विख्यात विदुषी प्रो. वेदवती वैदिक का आज निधन हो गया है। दिल्ली के लीवर—इंस्टीट्यूट में उनका उपचार चल रहा था। वे प्रसिद्धपत्रकार डॉ. वेदप्रताप वैदिक की धर्मपत्नी हैं। उनकी आयु 70 वर्ष थी। उनका अंतिम संस्कार दयानंद घाट, लोदी इस्टेट पर आज संपन्न हो गया। 1977 से दिल्ली विश्वविद्यालय के मैत्रेयी महाविद्यालय में अध्यापन तथा श्री अरविन्द महाविद्यालय (सांध्य) में संस्कृत विभागाध्यक्ष रही हैं। प्रो. वेदवतीजी ने 1986 से दिल्ली विश्वविद्यालयके दक्षिण-परिसर में एम.ए. और एम.फिल. कक्षाओं में प्राध्यापन एवं शोध निर्देशन किया है। वे ‘इंण्डियन कौंसिल आफ हिस्टोरिकल रिसर्च’ की सीनियर फेलो (1980-83) रही हैं।2013 में वे सेवानिवृत्त हुई हैं। उन्होंने साउथ एक्सटेंशन, दिल्ली के ‘रामेश्वरदास गुप्त धर्मार्थ ट्रस्ट’ के प्रबंध न्यासी के तौर पर समाज—सेवा के अनेक अभियान चलाए हैं। उपनिषद्-विद्या और वेदवती वैदिक एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय से संस्कृत में बी.ए. (ओनर्स) और एम.ए. करने के पश्चात् उन्होंने ‘श्वेताश्वतर उपनिषद के भाष्योंका एक अध्ययन’ विषय पर 1977 में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उपनिषद् विद्या पर उनके ये ग्रंथ प्रकाशित हुए हैं- ‘श्वेताश्वतर उपनिषद्ः दार्शनिक अध्ययन’, ‘उपनिषदों केऋषि’, ‘उपनिषद् वाड्मयः विविध आयाम’, ‘उपनिषदों के निर्वचन’ और ‘उपनिषद्युगीन संस्कृति’। उन्होंने भगवद्गीता का हिन्दी और अंग्रेजी अनुवाद किया है। इस ग्रंथ के अनेकसंस्करण हो चुके हैं। उनका 1500 पृष्ठों का उपनिषद् महाकोश ( एनसाइक्लोपीडिया ऑफ उपनिषद्स ) हिंदी और अंग्रेजी में शीघ्र प्रकाश्य हैं। वे ‘निःश्रेयस न्यास’ द्वारा प्रकाशित ‘त्वदीयम्’ एवं ‘आधुनिक भारतीय विचारक’ नामक दो ग्रंथों की संपादिका रही हैं। वे ‘मंगल मिलन’ नामक सामाजिक पत्रिका का कई वर्षों सेसंपादन करती रही हैं। इसके अतिरिक्त देश और विदेश की प्रतिष्ठित शोध-पत्रिकाओं, संपादित पुस्तकों और अभिनंदन ग्रंथों में वेद, उपनिषद्, भारतीय संस्कृति एवं पर्यावरण पर अनेक शोध-पत्र प्रकाशित।उन्होंने ‘अखिल भारतीय प्राच्यविद्या परिषद’, ‘अखिल भारतीय दर्शन-परिषद्’ तथा ‘वर्ल्ड एसोसिएशन फॉर वैदिक स्ट्डीज’ के अधिवेशनों में सक्रिय भाग लिया। उन्होंने अनेक राष्ट्रीयएवं अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में शोध पत्रों की प्रस्तुति की है। उन्होंने अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, आस्ट्रिया, चेकोस्लोवाकिया, त्रिनिदाद, कजाकिस्तान, थाईलैंड, सिंगापुर, मोरिशस, भूटान, अफगानिस्तान, ईरान, इराक,तुर्की, लेबनान, ताइवान, नेपाल, आदि देशों की यात्राएं की हैं।
नई दिल्ली। विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) द्वारा 6 अप्रेल से प्रारम्भ होने वाले विक्रमी सम्वत् 2076 के सूर्योदय की पहली किरण से ही देशभर में विजय मन्त्रों का जाप प्रारम्भ …