डॉ धनंजय गिरि
बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं होता, वह सरकार की प्राथमिकताओं, नीतिगत दिशा और भविष्य की राष्ट्रीय आकांक्षाओं का दस्तावेज भी होता है। बजट 2026–27 के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि आत्मनिर्भर और विकसित भारत केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राष्ट्रीय संकल्प है। यह बजट हर क्षेत्र, हर वर्ग और हर नागरिक को सशक्त बनाने की एक समग्र रूपरेखा प्रस्तुत करता है।
इस बजट की विशेषता यह है कि इसमें दूरदर्शी विजन और जमीनी क्रियान्वयन, दोनों का संतुलित समावेश दिखाई देता है। कृषि से लेकर उद्योग, शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य, स्टार्टअप से लेकर स्किल डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर डिजिटल इकोनॉमी तक—हर क्षेत्र के लिए स्पष्ट दिशा निर्धारित की गई है। यह बजट केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक संसाधन और संरचना भी सुनिश्चित करता है।
बजट 2026–27 को यदि एक वाक्य में समझना हो, तो यह कहा जा सकता है कि यह बजट नीतिगत दर्शन और व्यावहारिक क्रियान्वयन का संगम है। ‘कर्तव्य भवन’ में तैयार हुआ यह पहला बजट तीन स्पष्ट कर्तव्यों से प्रेरित है—आर्थिक गति और प्रतिस्पर्धा, नागरिकों की आकांक्षाओं का विस्तार, और सबका साथ–सबका विकास के अनुरूप संसाधनों तक समान पहुंच। यही त्रयी विकसित भारत की आधारशिला बनती दिखती है।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत ने विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, बायोफार्मा, दुर्लभ धातु गलियारे, केमिकल पार्क, वस्त्र क्लस्टर, कंटेनर निर्माण, और 200 औद्योगिक समूहों के पुनरुद्धार जैसे कदमों से यह संकेत दिया है कि आर्थिक मजबूती अब आयात-निर्भरता घटाकर, डिजाइन-टू-डिलीवरी की स्वदेशी क्षमता पर टिकेगी। 12.2 लाख करोड़ रुपये के सार्वजनिक पूंजी व्यय, माल गलियारों, जलमार्गों, सी-प्लेन, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और ऊर्जा सुरक्षा (CCUS) जैसे निवेश भविष्य की अर्थव्यवस्था का ढांचा गढ़ते हैं। यह स्पष्ट संदेश है—भारत केवल उपभोक्ता नहीं, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का निर्णायक निर्माता बनना चाहता है।
सेवा क्षेत्र, शिक्षा से रोजगार, संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवर, आयुष, पशुपालन, ऑरेंज इकोनॉमी, पर्यटन, खेल, और विश्वविद्यालय टाउनशिप—ये पहल बताती हैं कि विकास का केंद्र मानव संसाधन है। एक लाख ए.एच.पी., डेढ़ लाख केयर-प्रदाता, महिला छात्रावास, गाइड प्रशिक्षण, और सांस्कृतिक-डिजिटल नॉलेज ग्रिड जैसे उपाय युवाओं और महिलाओं को अवसरों से जोड़ते हैं। विरासत स्थलों को अनुभवजन्य गंतव्य बनाना और रचनात्मक उद्योगों को प्रोत्साहन देना अर्थव्यवस्था के नए आयाम खोलता है।
किसानों की आय, उच्च मूल्य फसलें, मत्स्य और पशुपालन, ‘भारत-विस्तार’ एआई एग्रीस्टैक, मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, पूर्वोदय और पूर्वोत्तर पर विशेष ध्यान—ये कदम दर्शाते हैं कि विकास का भूगोल अब व्यापक और संतुलित होगा। राज्यों को 1.4 लाख करोड़ के वित्त आयोग अनुदान और पूर्वी तट औद्योगिक गलियारे जैसे प्रावधान सहकारी संघवाद को मजबूती देते हैं।
4.3% राजकोषीय घाटा, घटता ऋण-जीडीपी अनुपात, और सरल आयकर ढांचा यह भरोसा जगाते हैं कि विकास वित्तीय स्थिरता के साथ आगे बढ़ेगा। TDS/TCS सरलीकरण, छोटे करदाताओं के लिए सहज व्यवस्था, आईटी क्षेत्र के लिए सेफ हार्बर, और वैश्विक क्लाउड सेवाओं के लिए कर रियायत—ये सब ईज ऑफ लिविंग और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करते हैं।
सीमा-शुल्क सरलीकरण, एईओ प्रोत्साहन, डिजिटल सिंगल विंडो, एआई स्कैनिंग, ई-कॉमर्स निर्यात सीमा हटाना—ये कदम भारत को निर्यात-अनुकूल, भरोसा-आधारित और तकनीक-संचालित व्यापार तंत्र की ओर ले जाते हैं। ‘#ViksitBharatBudget’ की अवधारणा इस बात को रेखांकित करती है कि भारत अब केवल विकासशील राष्ट्र की परिभाषा से आगे बढ़कर वैश्विक नेतृत्व की ओर अग्रसर है। आत्मनिर्भरता के माध्यम से स्थानीय उत्पादन, नवाचार और रोजगार को बढ़ावा देना, वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को मजबूत करता है। यही कारण है कि इस बजट में युवाओं, महिलाओं, किसानों, उद्यमियों और मध्यम वर्ग—सभी के लिए अवसरों का विस्तार दिखाई देता है।
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह बजट समावेशी विकास की सोच पर आधारित है। अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचे, इसके लिए डिजिटल माध्यमों, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और स्थानीय भागीदारी को बढ़ावा दिया गया है। यह दृष्टिकोण बताता है कि सरकार विकास को केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन में परिवर्तन के रूप में देखती है।
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए रक्षा मंत्रालय को ₹7.8 लाख करोड़ का बजट आवंटित किया है। इसमें से ₹2.19 लाख करोड़ केवल सेनाओं के आधुनिकीकरण (कैपिटल आउटले) के लिए रखे गए हैं। रक्षा मंत्रालय के कुल बजट में इस साल करीब 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं कैपिटल आउटले में 21.84 प्रतिशत का इजाफा किया गया है — जो पिछले साल के ₹1.80 लाख करोड़ से बढ़कर ₹2.19 लाख करोड़ पहुंच गया है। रक्षा मंत्रालय के सामने आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट हैं, जिनमें नए लड़ाकू विमान (जैसे राफेल), पनडुब्बियां और ड्रोन (UAV) की खरीद शामिल है। इन सौदों का मकसद थलसेना, नौसेना और वायुसेना की ताकत को और मजबूत करना है।
रक्षा क्षेत्र को बढ़ावा देते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की, “रक्षा क्षेत्र की इकाइयों द्वारा रखरखाव, मरम्मत या समग्र आवश्यकताओं के लिए उपयोग किए जाने वाले विमान के पुर्जों के निर्माण हेतु आयातित कच्चे माल पर मूल सीमा शुल्क से छूट देने का प्रस्ताव है। इस बीच, अमेरिकी टैरिफ के जवाब में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयातित सभी शुल्क योग्य वस्तुओं पर टैरिफ दर को 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया। निर्यात को बढ़ावा देने और अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित समुद्री खाद्य उद्योग को पुनर्जीवित करने के सरकार के उद्देश्य के अनुरूप, वित्त मंत्री सीतारमण ने निर्यात के लिए समुद्री खाद्य प्रसंस्करण में उपयोग किए जाने वाले विशिष्ट इनपुट के शुल्क-मुक्त आयात की सीमा को पिछले वर्ष के निर्यात कारोबार के एफओबी मूल्य के वर्तमान एक प्रतिशत से बढ़ाकर तीन प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया है।
बजट 2026–27 एक ऐसे भारत का खाका प्रस्तुत करता है, जो आत्मविश्वास से भरा, संसाधनों में सक्षम, तकनीक में अग्रणी और अवसरों में समृद्ध हो। यह बजट विकसित भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो आने वाले वर्षों में देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखता है।
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक एवं भाजपा के प्रवक्ता हैं।)


