नई किताब “यथार्थ की खोज में” गीता झा की काव्यात्मक रचना में छिपे जीवन के गहरे सबक

नई दिल्ली। दिल्ली की मशहूर हिंदी लेखिका और कवयित्री गीता झा की अपनी 24वीं किताब “यथार्थ की खोज में ”। की लॉन्चिंग हुई। यह किताब कम चर्चित दारण्यक उपनिषद के आध्यात्मिक संदेशों को कविता के रूप में सरल भाषा में प्रस्तुत करती है।

इस किताब में बताया गया है कि कठिन परिस्थितियों में कैसे जीवन को समझदारी से जिया जाए, और विभिन्न प्रकार के लोगों के साथ व्यवहार करते समय क्या सावधानियाँ बरती जाएं। साथ ही, इसमें समाज में महिलाओं की स्थिति पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

पुस्तक विमोचन समारोह में दिल्ली संस्कृत अकादमी के पूर्व सचिव डॉ. धर्मेंद्र शास्त्री ने कहा,”यह किताब बृहदारण्यक उपनिषद का सार आम लोगों के लिए बेहद सरल और रोचक ढंग से पेश करती है। यह एक कठिन लेकिन महत्वपूर्ण ग्रंथ को समझने में मदद करती है।”

वहीं, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की सलाहकार,डॉ. विद्या प्रसाद मिश्र ने कहा,”इस पुस्तक में उपनिषद के 6 महत्वपूर्ण अध्यायों से जुड़े जीवन के गहरे संदेश सरल रूप में प्रस्तुत किए गए हैं। यह रचना समाज को एक नई दिशा दे सकती है।”

बता दें कि गीता झा इससे पहले “जीवन-मृत्यु”, “जब आयी कविता मिलने”, “आत्मविश्वास और सफलता”, “बचपन से पचपन तक”, और “कृष्ण या अर्जुन नहीं, मैं हूँ आम आदमी” जैसी लोकप्रिय किताबें लिख चुकी हैं। वे 13 साल की उम्र से कविता लिख रही हैं और उनकी रचनाएं गुरुकुल, आर्य समाज समुदायों और हिंदी साहित्य प्रेमियों में खासा लोकप्रिय हैं।

“यथार्थ की खोज में” एक ऐसी किताब है जो आध्यात्मिक ज्ञान और जीवन के व्यावहारिक अनुभवों को खूबसूरती से जोड़ती है।

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