नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा परिसर में मौजूद कथित ‘फांसी घर’ को दिल्ली की मौजूदा बीजेपी सरकार ने अब ‘टिफिन रूम’ में बदल दिया है। पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के समय 9 अगस्त 2022 को इसका उद्घाटन हुआ था, जिसे तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, स्पीकर रामनिवास गोयल, डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और डिप्टी स्पीकर राखी बिड़ला ने मिलकर किया था।
विधानसभा में गरमागरम बहस
मॉनसून सत्र में इस मुद्दे पर दो दिन तक तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। इसके बाद स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने मामले को विशेषाधिकार समिति को जांच के लिए सौंप दिया और ‘फांसी घर’ का नाम बदलकर ‘टिफिन रूम’ कर दिया। साथ ही, उन्होंने आदेश दिया कि उद्घाटन के समय लगाया गया शिलापट्ट भी हटा दिया जाए।
स्पीकर का दावा – मूल स्वरूप में लाया जाएगा
विजेंद्र गुप्ता के अनुसार, नेशनल आर्काइव्स से मंगवाए गए 1911 के नक्शे में स्पष्ट है कि यह जगह दरअसल ‘टिफिन रूम’ और ‘लिफ्ट’ थी, न कि फांसी घर। उन्होंने कहा कि यहां विधानसभा का 1912 का नक्शा भी लगाया जाएगा ताकि भवन की गरिमा बनी रहे।
AAP का आरोप – राजनीतिक बदले की कार्रवाई
AAP विधायक संजीव झा ने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार, आम आदमी पार्टी के हर फैसले को पलट रही है। उनका कहना है कि फांसी घर के सबूत मौजूद हैं, लेकिन इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर सदन का समय बर्बाद किया जा रहा है।
इतिहासकारों ने खारिज की ‘फांसी घर’ की कहानी
इतिहासकार सोहेल हाशमी और राणा सफवी दोनों का मानना है कि इस इमारत में फांसी घर होने के कोई प्रमाण नहीं हैं। उनका कहना है कि यह इमारत 1912 में बनी थी और विधान परिषद की बैठकों के लिए इस्तेमाल होती रही, ऐसे में यहां फांसी दी जाने की बात तर्कसंगत नहीं है।
तथ्य – खाना बनाने का स्थान था
जानकारों के मुताबिक, यह स्थान अंग्रेज अफसरों के लिए भोजन तैयार करने का था। इसे नीचे पहुंचाने के लिए रस्सी और तख्ते से बनी लिफ्ट जैसी व्यवस्था का उपयोग किया जाता था। अब यह विवादास्पद ‘फांसी घर’ अपनी पहचान बदलकर फिर से इतिहास के मूल स्वरूप – ‘टिफिन रूम’ – में लौट आया है।

