भोपाल। बिहार फाउन्डेशन भोपाल चैप्टर द्वारा 23 दिसंबर 2025 को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की जयंती समारोह का आयोजन दुष्यंत संग्रहालय सभागृह में अपराह्न 4 बजे से किया जा रहा है। समारोह के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर होंगे, जबकि अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक (से.नि.) अनुराधा शंकर करेंगी।
विशिष्ठ अतिथि के रूप में सप्रे संग्रहालय के संस्थापक पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर उपस्थित रहेंगे, तथा सारस्वत उद्बोधन श्री संजय कुमार, अपर संचालक तकनीकी शिक्षा द्वारा दिया जाएगा।
बिहार फाउन्डेशन भोपाल चैप्टर के अध्यक्ष आर.एम.पी. सिंह ने बताया कि हाल ही में इस चैप्टर का गठन हुआ है। बिहार के मुख्यमंत्री इसके संरक्षक, उपमुख्यमंत्री अध्यक्ष तथा पर्यटन और उद्योग मंत्री इसके कार्यकारी अध्यक्ष हैं। इसका पैरेन्ट डिपार्टमेंट उद्योग विभाग है। भोपाल चैप्टर में आर.एम.पी. सिंह अध्यक्ष, राजेश्वर सिंह उपाध्यक्ष, कुंवर प्रसाद कोषाध्यक्ष और संतोष कुमार सचिव बनाए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि दिनकर जी का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के तत्कालीन मुंगेर (वर्तमान बेगूसराय जिले) के सिमरिया घाट ग्राम में एक साधारण कृषक परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में और उच्च शिक्षा पटना में हुई। उन्होंने शासकीय सेवा में उप-रजिस्ट्रार और बाद में डिप्टी डायरेक्टर, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के पदों पर कार्य किया। किंतु काव्य में उनकी गहरी रुचि ने उन्हें सरकारी सेवा छोड़कर लेखन की ओर प्रेरित किया।
उन्होंने बिहार विश्वविद्यालय के लंगोट सिंह कॉलेज में हिंदी के प्राध्यापक और विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया और तत्पश्चात भागलपुर विश्वविद्यालय में कुलपति रहे। वे राज्यसभा में हिंदी अधिकारी भी रहे।
उनकी प्रमुख काव्य कृतियों में रेणुका, सामधेनी, कुरुक्षेत्र, रश्मिरथी, परशुराम की प्रतीक्षा, उर्वशी, रसवंती शामिल हैं। गद्य में उनकी महान कृति “संस्कृति के चार अध्याय” मानी जाती है।
महाकवि हरिवंशराय बच्चन ने कहा था कि दिनकर जी को दो ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने चाहिए – एक पद के लिए और दूसरा गद्य के लिए। भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया। महान कवि का 24 अप्रैल 1974 को चेन्नई में निधन हो गया।
दिनकर जी जीवन और जवानी में कवि थे। वे भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपनी रचनाओं के माध्यम से हमेशा अमर रहेंगे। उनके जन्म दिवस पर उन्हें सादर नमन।

