क्या बुध राहु अति चालाकी और बुध केतु अति सौम्यता देता है ?
बुध केतु अति सौम्य साधक और चालाक बनाती है बुध राहु युति
… बेशक बुध नपुंसक ग्रह है। लेकिन, यदि उसका कोई प्रभाव न होता तो फिर उस ग्रह का ज्योतिष में क्या काम होता…सूर्य के अधिक निकट होने के कारण वह अक्सर अस्त भी होता है…फिर तो अस्त का भी कोई प्रभाव नहीं होगा!…लेकिन शोध में दोनों ही बातें गलत मिलती हैं। यदि बुध किसी भी जातक की कुंडली में केतु के साथ है तो जातक गुह्य ज्ञान का अपार भंडार होता है, अति सौम्य होता है, सहज होता है, इतना सहज कि लोग उसे मूर्ख भी मान सकते हैं….ध्यान देने योग्य है कि केतु अश्विनी, मघा और मूल नक्षत्रों का स्वामी है और बुध अश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती का स्वामी है
अब इनको पहले अलग अलग देखें तो बुध के तीनों नक्षत्र अश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती अपना क्या महत्व रखते हैं।
अश्लेषा नाग तत्व के प्रभाव से क्रोध बढ़ाता है। लेकिन वाणी चातुर्य से व्यापारी बनाता है। अधिकतर अधिवक्ता, प्रवक्ता और व्यापारी इसी के प्रभाव का लाभ लेते हैं।
ज्येष्ठा एक परावैज्ञानिक कवच बनकर जातक की सघन सुरक्षा करता है और सत्ता देता है।
और रेवती मानसिक संतुलन स्थापित कर के जातक के जीवन में धर्म के लक्षणों से युक्त आस्था का निर्माण करता है।
दूसरी ओर केतु के तीनों नक्षत्र अश्विनी, मघा और मूल भी महत्वपूर्ण हैं।
अश्विनी नक्षत्र अध्यात्म, चिकित्सा,नकारात्मक शक्तियों के अंकुश का और नेतृत्व का नक्षत्र है।
मघा नक्षत्र तामस साधक और ऊष्मा से भरपूर अपने संकल्प की हर कीमत पर पूर्ति करने में सहायक होता है। जातक के जीवन में संघर्ष से नवचेतना का उदय मूल नक्षत्र के द्वारा होता है। यह स्वयंप्रभा से युक्त होता है।
ऐसे में जब केतु का वृत्ति विश्लेषण करते हैं तो यह शुभ अशुभ दोनों तरह की युति बनाता है। यदि केतु बुध के साथ युति करता हैं तो सामान्य रूप से जातक की वाणी में दोष आ जाता है। अशुभ अवस्था में जातक अश्लेषा के नाग के कारण क्रोध से पूर्ण होकर वाणी विप्लव कर सकता है, जिससे लड़ाई झगड़े और विग्रह हो सकते हैं…लेकिन उसकी वाणी में सवाल पर सवाल और बाल की खाल निकालने की प्रवृत्ति होगी और वह किसी को भी कुछ भी कहने में समर्थ होगा और अभेद्य किले में रहता सा सुरक्षित होगा। उसे क्रोध क्षणिक ही आएगा, वह आध्यात्मिक मार्ग पर चला तो सिद्ध और श्रेष्ठतम सुप्रसिद्ध व्यक्तित्व होगा, हालांकि वाणी दोष के कारण उसका विरोध भी प्रबल होगा, लेकिन सामने कोई नहीं बोल पाएगा…गुप्त शत्रु उसे जहां अवसर मिलेगा, दुःखी करने का असफल प्रयास करेंगे। यदि इन दोनों की युति शुभ हुई तो उसकी वाणी न्यूनतम होगी, लेकिन जो कह देगा,पत्थर की लकीर होगी।
संसार के श्रेष्ठ अधिवक्ता, श्रेष्ठ प्रवक्ता, श्रेष्ठ ज्योतिर्विद,श्रेष्ठ वैज्ञानिक,श्रेष्ठ चिकित्सक, श्रेष्ठ तन्त्रशास्त्र और परा विज्ञान के अनुसंधान कर्ता,अनेक पुस्तकों के लेखक,अस्त व्यस्त जीवन शैली वाले और अति सौम्य जातकों की कुंडलियों में यह युति देखी गई है…संसार इन लोगों के लिए एक पहेली है और ये संसार के लिए बहुत बड़ी पहेली…..
अब हम बुध से राहु की युति पर कहते हैं तो बुध राहु की युति निश्चय ही जातक को वाचाल, सामने वाले के तेज का हरण करने वाला और अति तीव्र बुद्धि का चालाक होता है
राहु के तीन नक्षत्र आद्रा, स्वाति और शतभिषा हैं।
आद्रा अति खोजी स्वभाव देता है, जातक पेट में खाए का भी पता निकालने में माहिर होता है। उधर स्वाति अतिधीर गंभीर, योजनाबद्ध लक्ष्य के प्रति समर्पित करता है और शतभिषा शक्ति से भरपूर, अपने कार्य की पूर्ति के लिए कुछ भी कर सकने में समर्थ, अति महत्वाकांक्षी और योद्धा होता है। वह जब धर्म की आवश्यकता हो, धर्म के प्रति समर्पित और जब कर्म की आवश्यकता हो तो कर्म के प्रति समर्पित होता है। कुल मिलाकर अति चतुर, चालाकों का चालाक, तीव्रबुद्धि, प्रत्युत्पन्न मति, अपने कार्य पूर्ति के लिए कुछ भी कर सकने वाला होता है।
©आचार्य चन्द्रशेखर शास्त्री
अधिष्ठाता श्री पीताम्बरा विद्यापीठ सीकरीतीर्थ
अध्यक्ष राष्ट्रीय ज्योतिष परिषद


