समृद्ध मध्यप्रदेश की आधारशिला: जल, जन-स्वास्थ्य और जनविश्वास का बजट

 


संपतिया उइके

मध्यप्रदेश का वित्त वर्ष 2026–27 का बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज़ नहीं है यह समृद्ध, सुखद और सम्पन्न मध्यप्रदेश* के संकल्प का विस्तृत खाका है। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ज्ञान-आधारित विकास के मार्गदर्शन और माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता ने इस बजट को एक ऐसी दिशा दी है, जो अमृतकाल 2047 की ओर प्रदेश को आत्मविश्वास से आगे बढ़ाती है।
इस वर्ष का बजट “GYANII” सिद्धांत—गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी शक्ति, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर—पर आधारित है। ₹4,38,317 करोड़ के प्रावधान के साथ यह बजट स्पष्ट संदेश देता है कि विकास और जनकल्याण एक-दूसरे के पूरक हैं। बिना किसी नए कर-भार के, पूंजीगत व्यय में ऐतिहासिक वृद्धि और दीर्घकालिक रोलिंग बजट* की पहल यह दर्शाती है कि मध्यप्रदेश ने अल्पकालिक लाभ से आगे बढ़कर स्थायी प्रगति का मार्ग चुना है।

राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में 10.69% की अनुमानित वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय में 9% का इज़ाफ़ा और अधोसंरचना के लिए एक लाख करोड़ से अधिक का प्रावधान—ये आंकड़े केवल सांख्यिकी नहीं, बल्कि विश्वास के संकेत हैं।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग का मूल मंत्र है—हर घर सुरक्षित जल, हर गांव स्वस्थ भविष्य*। प्रधानमंत्री के “जल जीवन मिशन” के विज़न को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में हम धरातल पर उतार रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल कनेक्शन का विस्तार, जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण, फ्लोराइड और आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्रों में विशेष उपचार संयंत्र, तथा स्रोत-संवर्धन के लिए सामुदायिक भागीदारी—ये हमारी प्राथमिकताएं हैं।
इस बजट में अधोसंरचना पर रिकॉर्ड निवेश से पेयजल परियोजनाओं, पाइपलाइन विस्तार, ओवरहेड टैंक, और जल शुद्धिकरण संयंत्रों को गति मिलेगी। आबादी भूमि पर मालिकाना अधिकार जैसी पहलें ग्रामीण स्वाभिमान को सशक्त करती हैं, वहीं मजरा-टोला सड़क योजना और पुल पुनर्निर्माण जैसे कदम दुर्गम क्षेत्रों तक सेवा पहुंचाने में सहायक होंगे। सुरक्षित जल केवल सुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य-व्यय में कमी, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा-उपस्थिति में सुधार का माध्यम है।
कृषि एवं किसान कल्याण के लिए ₹1,15,013 करोड़ का प्रावधान अन्नदाता की आय वृद्धि के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है। सिंचाई, आदान व्यवस्था और बेहतर मूल्य-प्राप्ति से ग्रामीण अर्थव्यवस्था सशक्त होगी। लाड़ली बहना और यशोदा दुग्ध प्रदाय* जैसी योजनाएं महिला और बाल पोषण को केंद्र में रखती हैं—क्योंकि स्वस्थ परिवार ही समृद्ध समाज की आधारशिला है।

युवाओं के लिए कौशल, रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण, पीएमश्री संस्थानों का विस्तार और औद्योगिक निवेश का अनुकूल वातावरण—ये सभी मिलकर एक ऐसी अर्थव्यवस्था गढ़ते हैं, जो अवसरों का सृजन करती है, पलायन को रोकती है और आत्मनिर्भरता को बढ़ाती है।
मध्यप्रदेश ने 13.5 करोड़ पर्यटकों के आगमन के साथ नई पहचान बनाई है। हेली सेवा, टेंट सिटी, होम-स्टे और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की पहलें स्थानीय रोजगार के नए द्वार खोलती हैं। वन्यजीव संरक्षण, कूनो में चीतों का संवर्धन और बफर जोन में सुरक्षा प्रावधान—ये कदम पर्यावरण और विकास के संतुलन का उदाहरण हैं।
राजकोषीय अनुशासन के साथ पूंजीगत व्यय में वृद्धि यह संकेत देती है कि संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हमारी प्राथमिकता है। रोलिंग बजट से अगले तीन वर्षों की स्पष्ट रूपरेखा तय होगी, जिससे परियोजनाओं की निरंतरता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
आज आवश्यकता केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि विश्वास के निर्माण की है। यह बजट उसी विश्वास का दस्तावेज़ है—जहां गांव की प्यास बुझाने से लेकर शहर की अधोसंरचना सुदृढ़ करने तक, किसान की आय बढ़ाने से लेकर युवा को कौशल देने तक, हर कदम में समग्र विकास की भावना है।
माननीय प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नेतृत्व क्षमता में हमें विश्वास है कि यह बजट “समृद्ध मध्यप्रदेश @2047” के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक अध्याय सिद्ध होगा। जल, जन-स्वास्थ्य और जनविश्वास—इन्हीं तीन स्तंभों पर खड़ा होगा नया मध्यप्रदेश।


(लेखिका ,मध्यप्रदेश सरकार में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री है)

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