दीप्ति अंगरीश
काशी साझी संस्कृति और विरासत का केंद्र रहा है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय का परिसर आजादी के 75वें साल में 75 स्टॉल के माध्यम से तमिल और काशी की साझा विरासत को दर्शा रहा है। इन 75 स्टॉल पर कला, शिक्षा, संस्कार, ज्ञान, परंपरा, सिनेमा, भोजन, वस्त्र, आभूषण, हस्तशिल्प आदि को देखा और समझा जा सकता है। यहां आकर आप कृषि, संस्कृति, साहित्य, संगीत, लोककला पर खुलकर बात कर सकते हैं। इसकी बारिकियों को आत्मसात कर सकते हैं।
काशी-तमिल संगमम् के ये 75 स्टॉल हर उम्र और वर्ग के लिए कौतुहल का केंद्र है। भाषाई दूरी को पाट रहा है। अब तक भले ही लोगों को यह बात दिमाग में घर कर गई कि तमिल के लोग हिंदी नहीं के बराबर नहीं बोलते हैं, लेकिन यहां आकर आप देखेंगे और सुनेंगे कि काशी के लोगों के साथ और हिंदी पट््टी के लोग हिंदी में बात करते हैं, तो यहां आए तमिल के लोग भी अपनी हिंदी में उनको समझाते हैं। यही तो इस संगमम की खुशी है।
स्टॉल पर मिल रहे उत्पादों में तमिलनाडु के जीआई और ओडीओपी उत्पाद भी शामिल हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रांगण में लगाए गए इन स्टॉल पर सबसे अधिक भीड़ खाने के स्टॉल पर मिलती है। साझी विरासत का बेहतर नमूना यह कि एक ही काउंटर से लोग दक्षिण भारतीय व्यंजन में शुमार मसाला डोसा, मधु बड़ा, इडली के साथ ही पूड़ी और जलेबी का टोकन खरीदते हैं। सबसे लोकप्रिय व्यंजनों में से एक है पोंगल। यह व्यंजन उबले हुए चावल के साथ बनाया जाता है, जिसमें मिर्च, जीरे और सूखी दाल का तड़का लगाया जाता है। तमिलनाडु खानपान के सामान्य नाश्ते के व्यंजनों में इडली, डोसा, उपमा, पोंगल, सेवई, उत्तपम और वड़ा शामिल हैं। इडली और डोसा, सांभर के साथ, अथवा यहाँ तक कि, तमिलनाडु की प्रसिद्ध, विभिन्न प्रकार की चटनियों, के साथ पसंद किए जाते हैं।
तमिलनाडु के कई घरों में तो एक गिलास गरम फ़िल्टर कॉफ़ी के बिना दिन की शुरुआत ही नहीं होती है। इन स्टॉल्स में एक काउंटर पर फिल्टर कॉफी मिलता है। पैक्ड बोतल में इसकी कीमत 50 रुपये रखी गई है। लोग भोजन करें या नाश्ता उसके बाद सात फ्लेवर में यहां उपलब्ध इस कॉफी को जरूर पीते हैं।
शिक्षा मंत्रालय द्वारा संस्कृति, कपड़ा, रेलवे, पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, सूचना और प्रसारण जैसे अन्य मंत्रालयों और उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से काशी तमिल संगमम का आयोजन 17 नवंबर से 16 दिसंबर तक वाराणसी में किया जा रहा है। इस दौरान तमिलनाडु और काशी के बीच सदियों पुराने संबंधों का नजारा देखने को मिलेगा।
तमिलनाडु के हैंडीक्राफ्ट और हैंडलूम से बने उत्पादों से सजे स्टॉल्स पर महिलाओं की अधिक दिलचस्पी देखी जा रही है। तमिलनाडु की प्रसिद्ध पंच महाभूत सिल्क साड़ी, नीलाम्बरी जामदानी साड़ी, कांचीपुरम वेडिंग सिल्क साड़ी, कढुआ जंगला साड़ी, अरनी सिल्क साड़ी, कटवर्क साड़ी महिलाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। वाराणसी के रविन्द्रपुरी से इन स्टॉल को देखने आई स्मिता कहती है कि इन साड़ियों पर आपको खूबसूरत ट्रेडिशनल डिजाइन मिलती है जो आपको पर्फेक्ट लुक देती है। इन्हें पहनकर आपको ट्रेडिशनल इंडिया लोक मिलता है और आपकी खूबसूरती कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है। इसे बनाने के लिए 100% और आर्ट सिल्क और कांचीपुरम वीविंग स्टाइल का इस्तेमाल किया गया है। यह साड़ी काफी सॉफ्ट और पहनने में कंफर्टेबल भी है।
युवाओं खासकर छात्र-छात्राओं की सबसे अधिक उत्सकुता नेशनल बुक ट्रस्ट के स्टॉल पर देखने को मिलती है। जो युवा तमिल साहित्य और संस्कृति में अधिक दिलचस्पी ले रहे हैं, वो सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ लैंग्वेज की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी में देख जा रहे हैं। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के छात्र उज्ज्वल के अनुसार, काशी तमिल संगमम ने हमें दक्षिण की संस्कृति को करीब से समझने और जानने का अवसर दिया है। हमें गर्व है कि मैं जिस विश्वविद्यालय में पढ़ रहा हूं, उसके पूर्व कुलपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन तमिलनाडु से ही थे। और यहां, आकर हम तमिलनाडु को करीब से समझ रहे हैं।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के एंफीथिएटर मैदान पर आयोजित काशी-तमिल संगमम एक भारत श्रेष्ठ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना को साकार करता दिख रहा है।

