वैश्वीकरण अपनी दृढ़ता रिकॉर्ड स्तर पर बनाए हुए है, जब की अमेरिका और चीन के बीच संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे हैं ! – डीएचएल ग्लोबल कनेक्टेडनेस रिपोर्ट २०२६.

बॉन/हनोई/न्यूयॉर्क।  बढ़ते भूराजनीतिक तनाव, बढ़ते अमेरिकी टैरिफ और भविष्य की व्यापार नीतियों के बारे में अभूतपूर्व अनिश्चितता के बावजूद, वैश्वीकरण ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर बना हुआ है। यह डीएचएल ग्लोबल कनेक्टेडनेस रिपोर्ट २०२६ के प्रमुख निष्कर्षों में से एक है, जिसे आज डीएचएल और न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस द्वारा जारी किया गया है। व्यापार, पूंजी, सूचना और लोगों के अंतरराष्ट्रीय प्रवाह पर नज़र रखने वाले ९० लाख से अधिक डेटा बिंदुओं के आधार पर, यह रिपोर्ट वैश्वीकरण का सबसे व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।

वैश्वीकरण २०२२ से स्थिर बना हुआ है।

यह रिपोर्ट वैश्वीकरण को 0% (कोई सीमा पार प्रवाह नहीं) से लेकर १०० % (सीमाओं और दूरी का कोई प्रभाव नहीं) के पैमाने पर आंकती है। २०२५ में विश्व में वैश्वीकरण का स्तर, २५% था, जो २०२२ में निर्धारित, उच्चतम स्तर के अनुरूप था।

डीएचएल एक्सप्रेस के सीईओ जॉन पियर्सन ने कहा, “वैश्वीकरण अपनी जगह बनाए हुए है – और यही बात इसके महत्व के बारे में बहुत कुछ कहती है।” गरीबी से लेकर जलवायु परिवर्तन तक, दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों का समाधान केवल वैश्विक सोच के माध्यम से ही किया जा सकता है।” DHL ग्लोबल कनेक्टेडनेस रिपोर्ट बताती है कि दुनिया जुड़ रही है — देश और कंपनियाँ, सीमाओं में सिमट नहीं रहे हैं… और ये बड़ी अच्छी खबर है| डीएचएल बाजारों, व्यवसायों और लोगों को जोड़कर वैश्विक संबंधों को मजबूत करता है ताकि वे अनिश्चित समय में भी परिस्थिति अनुसार ढल सके, वैविध्य ला सके और नए अवसरों को जन्म दे|

साथ ही, आज का २५% वैश्वीकरण स्तर इस बात को रेखांकित करता है कि दुनिया पूर्णतः वैश्वीकृत होने से कितनी दूर है। कई क्षेत्रों में, नीतिगत प्रतिबंधों के अभाव में अंतरराष्ट्रीय प्रवाह में और अधिक विस्तार हो सकता है।

एआई के बढ़ते उपयोग और टैरिफ बढ़ोतरी से बचने की होड़ ने 2025 में व्यापार को बढ़ावा दिया।

कोविड-19 की अस्थिर काल के अतिरिक्त, तो २०२५ में वैश्विक व्यापार की वृद्धि-दर २०१७ के बाद सबसे अधिक रही।”

शुल्क वृद्धि से पूर्व, अमेरिकी आयातकों ने वर्ष की शुरुआत में ही अपने आयात की गति बढ़ा दी | बाद में अमरीकी आयत में गिरावट आई लेकिन गैर-अमेरिकी बाज़ारों में चीन के बढ़ते निर्यात ने, वैश्विक व्यापार स्तर को बनाए रखने में मदद की। देशों और कंपनियों द्वारा एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण की होड़ में शामिल होने के कारण एआई से संबंधित वस्तुओं के व्यापार में तेजी आई। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के आंकड़ों के अनुसार, २०२५ की पहली तीन तिमाहियों में वस्तुओं के व्यापार में हुई वृद्धि में एआई से संबंधित उत्पादों का योगदान ४२ % रहा।

व्यापार का दृष्टिकोण: उच्च शुल्कों के बावजूद विकास जारी रहेगा|

 

माना जा रहा है कि अमेरिका में हाल ही में बढ़े टैरिफ से २०२६ में व्यापार की रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है—लेकिन यह पूरी तरह रुकेगी नहीं | वैश्विक वस्तु व्यापार में २०२९ तक औसतन २. ६ % प्रति वर्ष की दर से विस्तार होने का अनुमान है, जो पिछले दशक के अनुरूप है।

अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी के बावजूद व्यापार में वृद्धि जारी रहने का एक कारण यह भी है कि अधिकांश व्यापार में अमेरिका शामिल नहीं है। वर्ष २०२५ में, आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी १३ % और निर्यात में उसकी हिस्सेदारी ९% रही। इसके अलावा, कई देश नए व्यापार समझौते कर रहे हैं ताकि उन्हें दूसरे बाज़ारों तक भी आसानी से पहुँच मिल सके।

 

सूचना प्रवाह में बाधाएं आ रही हैं, जबकि मानव आवागमन नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

व्यापार के अलावा, रिपोर्ट में अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रवाहों में भिन्न-भिन्न रुझान पाए गए हैं:

पूंजी : विदेशी बाजारों से घरेलू बाजारों में निवेश का कोई व्यापक स्थानांतरण नहीं हुआ है। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अब भी अपनी बिक्री का अधिकतम हिस्सा अन्य देशों से प्राप्त करती हैं। यद्यपि २०२५ में घोषित ग्रीनफील्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में गिरावट आई, लेकिन कुल एफडीआई प्रवाह में वृद्धि हुई और सीमा पार विलय और अधिग्रहण की गतिविधि लचीली बनी रही।
जानकारी : पिछले दो दशकों में, सूचना प्रवाह ने वैश्वीकरण में सबसे बड़ी सफलता दिलाई है। २०२१ से विकास की गति धीमी हो गई है और यह अधिक अस्थिर हो गया है। भू-राजनीतिक तनाव और डेटा प्रवाह पर प्रतिबंध अब सूचना के वैश्वीकरण को भौतिक रूप से सीमित कर सकते हैं।
लोग : कोविड-19 महामारी के दौरान बुरी तरह प्रभावित होने के बाद, लोगों की आवाजाही पूरी तरह से सामान्य हो गई है। नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा, छात्रों की आवाजाही और प्रवासन सभी रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं।

सिंगापुर वैश्वीकरण रैंकिंग में शीर्ष पर है, यूरोप क्षेत्रीय रैंकिंग में सबसे ऊपर है।

रिपोर्ट की देश-वार रैंकिंग में, सिंगापुर एक बार फिर दुनिया का सबसे अधिक वैश्वीकृत देश रहा है, जिसके बाद लक्ज़मबर्ग और नीदरलैंड का स्थान है। यूरोप सबसे अधिक वैश्वीकृत क्षेत्र है, उसके बाद उत्तरी अमेरिका और मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका का स्थान आता है। विश्व स्तर पर सबसे व्यापक रूप से वितरित प्रवाह यूनाइटेड किंगडम में है। जब की संयुक्त अरब अमीरात में २००१ के बाद से वैश्वीकरण में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है।

 

अमेरिका-चीन तनाव वैश्विक प्रवाह के केवल एक छोटे हिस्से को प्रभावित करता है।

रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं – अमेरिका और चीन – के बीच संबंध लगातार कमजोर हो रहे हैं। परन्तु, वैश्विक परिप्रेक्ष्य में ये संबंध आश्चर्यजनक रूप से कम हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका-चीन व्यापार का हिस्सा, २०१५ में अपने चरम पर होने के बावजूद, विश्व व्यापार के केवल ३. ६% था, जो २०२४ में घटकर २. ७% और २०२५ की पहली तीन तिमाही के दौरान केवल २.0% रह गया। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार निवेश में अमेरिका-चीन की हिस्सेदारी और भी कम है – २०२५ में यह १ % से भी कम रही |

 

प्रतिद्वंद्वी गुटों में कोई वैश्विक विभाजन नहीं

अमेरिका और चीन के बीच संबंध टूटने के बावजूद, अधिकांश देश अपने दीर्घकालिक साझेदारों के साथ संबंध बनाए हुए हैं। पिछले एक दशक में, वैश्विक वस्तु व्यापार, ग्रीनफील्ड एफडीआई और सीमा पार विलय और अधिग्रहण का केवल ४-६ % हिस्सा ही भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से दूर स्थानांतरित हुआ है। इन प्रवाहों में से अधिकांश करीबी सहयोगियों की ओर नहीं, बल्कि भारत और वियतनाम जैसे लचीली भू-राजनीतिक स्थिति वाले देशों की ओर गए हैं। कुल मिलाकर, विश्व अर्थव्यवस्था प्रतिद्वंद्वी गुटों में व्यापक रूप से विभाजित होने से बहुत दूर है।

 

एनवाईयू स्टर्न के सेंटर फॉर द फ्यूचर ऑफ मैनेजमेंट में डीएचएल इनिशिएटिव ऑन ग्लोबलाइजेशन के निदेशक प्रोफेसर स्टीवन ए. ऑल्टमैन ने कहा, “वैश्वीकरण से जुड़ी राजनीति और नीतियाँ देशों के बीच होने वाले वास्तविक आदान-प्रदान की तुलना में कहीं अधिक अस्थिर हैं। वैश्विक व्यापार के पैटर्न में २०२५ में सामान्य वर्षों की तुलना में अधिक बदलाव आया, लेकिन यूक्रेन में युद्ध के शुरुआती चरणों जैसी अन्य हालिया बाधाओं के दौरान हुए बदलावों की तुलना में कम बदलाव आया।” सही निर्णय लेने के लिए यह समझना आवश्यक है कि वैश्विक व्यावसायिक संबंध वास्तव में किस हद तक बदल रहे हैं। वैश्वीकरण के लिए जोखिम वास्तविक हैं, लेकिन वैश्विक प्रवाह की लचीलापन भी उतना ही वास्तविक है।”

 

व्यापारिक वस्तुओं और नए क्षेत्रों में किए गए प्रत्यक्ष निवेश ने रिकॉर्ड दूरी तय की।

भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताओं के कारण कई लोगों को यह उम्मीद थी कि वैश्वीकरण से हटकर क्षेत्रीयकरण की ओर रुझान बढ़ेगा। लेकिन २०२५ में, कारोबार किए जाने वाले सामान अब तक के सबसे लंबी औसत दूरी (५०१० किलोमीटर) तय करते देखे गए। ग्रीनफील्ड एफडीआई परियोजनाओं की औसत दूरी भी बढ़कर एक नए रिकॉर्ड (६२५० किलोमीटर) तक पहुँच गई।

 

बाकी अंतरराष्ट्रीय प्रवाह भी पहले से अधिक लंबी दूरी तय कर रहे हैं, और लंबी दूरी का मतलब है कि क्षेत्रीयकरण उतना नहीं बढ़ रहा।

 

यानी, दुनिया का व्यापार वैश्विक से क्षेत्रीय होने की जो भविष्यवाणियाँ की जा रही थीं, वे अब तक सच होती नहीं दिख रही हैं—कम से कम अभी तो नहीं।

 

डीएचएल ग्लोबल कनेक्टिविटी रिपोर्ट

२०११ से नियमित रूप से प्रकाशित होने वाली डीएचएल ग्लोबल कनेक्टेडनेस रिपोर्ट, १४ प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, पूंजी, सूचना और मानव प्रवाह का विश्लेषण करके वैश्वीकरण पर विश्वसनीय जानकारी प्रदान करती है। २०२६ संस्करण ९० लाख से अधिक डेटा बिंदुओं पर आधारित है। यह १८० देशों की जुड़े होने की क्षमता का आकलन करता है, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का ९९.६ % और दुनिया की जनसंख्या का ९९ % हिस्सा हैं।

 

इस रिपोर्ट में इन 180 देशों में से हर एक देश की प्रोफ़ाइल है, जो बताती है कि हर देश में वैश्वीकरण का पैटर्न कैसा है। यह रिपोर्ट डीएचएल द्वारा तैयार करवाई गई है और इसके लेखक न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस के स्टीवन ए. ऑल्टमैन और कैरोलिन आर. बैस्टियन हैं।

 

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