सबसे अधिक खुशी किसी को कुछ देने में मिलती है : पुरोहित

भोपाल। आरोग्य भारती भोपाल संस्था द्वारा मंगलवार को हैप्पीनेस इंडेक्स कार्यक्रम का आयोजन एमपीनगर के होटल नंद में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आईएनडी 24 चैनल के निदेशक नवीन पुरोहित, मुख्य वक्ता के रूप में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में आयुर्वेदाचार्य डॉ मधुसूदन देेशपाण्डे व भोपाल आरोग्य भारती के  अभिजीत देशमुख उपस्थित थे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईएनडी 24 चैनल के निदेशक नवीन पुरोहित ने कहा कि मैं आप सभी डॉक्टरों के बीच मे मरीज के रूप में हूं। उन्होंने कहा कि हमारा आयुर्वेद सार्वभौम है। विदेश तक मे इसे मान्यता मिली, लेकिन हम देखते है कि आयुर्वेद के भगवान महर्षि चरक को ही किसी मेडिकल कालेज में स्थान न दिला पाए। पुरोहित ने खुशी की भावना का जिक्र करते हुए कहा कि दुसरो की समस्या में हम अपनी समस्या देखते है, दूसरों की खुशी में अपनी खुशी को देखना ही सच्ची खुशी है। उन्होंने कहा कि व्यक्तियों की शिक्षा ,पद ,साधन भले ही एक जैसे हो लेकिन, सामाजिक सरोकार के लिए काम करने वाले व्यक्तियों की खुशी का अपना

कार्यक्रम में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय ने कहा कि समाज मे हर व्यक्ति सुखी रहना चाहता, इसके लिए वह कुछ न कुछ उपक्रम करता रहता , उसे पाने के लिए काम करता रहता है, लेकिन मानव जीवन मे सुख का पैरामीटर अलग अलग है। किसी को भोजन में तो किसी को दौलत में तो किसी को अन्य कार्यों में सुख का अनुभव होता है। वार्ष्णेय ने कहा कि किसी सभी व्यक्तियों के जीवन के  अलग-अलग कालखण्ड में सुख का पैरामीटर अलग अलग होता है। व्यक्ति को बचपन मे खेलने, वयस्क में अच्छे साधन व बुढ़ापे में अच्छे स्वास्थ्य की खुशी चाहता है। यह सारी मनोदशा मन की होती है इसलिए कहा जाता है कि की सुख मन की ही भावना है।

उन्होंने भूटान का उदाहरण देते हुए कहा कि यहां हेप्पीनेश इंडेक्स को सबसे ऊपर रखा जाता है। उसके बाद में जीडीपी व अन्य को रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्व मे हेपिनेश के मामले में भारत की स्थिति साल दर साल गिरती जा रही है। हालांकि विभव के देशों में हेप्पीनेश इंडेक्स का पैरामीटर अलग अलग अलग होता है। इसलिए इसे अलग अलग पैरामीटर पर नापा जाना चाहिए। भारत व अमेरिका के हेप्पीनेश पैरामीटर्स में अंतर है। अमेरिका में धन की सहायता को हेप्पीनेश माना जाता है, लेकिन भारत में सामाजिक सरोकार को हेप्पीनेश की कसौटी पर नापा जाता है।

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