डॉ धनंजय गिरि
साल 2025 भारतीय रेलवे के लिए केवल उपलब्धियों का वर्ष नहीं, बल्कि भविष्य की रेल यात्रा की ठोस नींव रखने का दौर रहा है। नवाचार, स्वदेशीकरण, आधुनिक अवसंरचना और यात्री-केंद्रित दृष्टिकोण ने रेलवे को पारंपरिक परिवहन प्रणाली से आगे बढ़ाकर एक विश्व स्तरीय, स्मार्ट और सुरक्षित नेटवर्क की ओर अग्रसर किया है। वर्ष के अंत तक यह स्पष्ट हो गया है कि भारतीय रेलवे 2026 में एक नए युग में प्रवेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
आज भारत में रेल यात्रा केवल एक गंतव्य तक पहुँचने का साधन नहीं रही, बल्कि एक अनुभव बनती जा रही है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकसित 155 आधुनिक स्टेशन हवाई अड्डों जैसी सुविधाओं से लैस होकर यात्रियों को नया एहसास दे रहे हैं। चौड़े प्रवेश द्वार, एस्केलेटर-लिफ्ट, आधुनिक प्रतीक्षा कक्ष, स्वच्छ शौचालय, फूड कोर्ट और डिजिटल साइनिज—ये सभी सुविधाएं रेलवे को शहरी जीवन से गहराई से जोड़ रही हैं। शेष 1182 स्टेशनों का कार्य प्रगति पर है, जो इस बदलाव को देशव्यापी बनाएगा।
रेलवे ने खानपान में भी बड़ा परिवर्तन किया है। ट्रेनों में स्थानीय व्यंजनों की उपलब्धता न केवल स्वाद को विविध बनाती है, बल्कि स्वच्छता और गुणवत्ता में भी सुधार लाती है। इससे “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना प्लेट में भी उतरती दिख रही है।
ट्रैक नवीनीकरण और खंडीय गति में वृद्धि ने रेल संचालन की रीढ़ को मजबूत किया है। 2025 में हजारों किलोमीटर पटरियों का नवीनीकरण, आधुनिक ट्रैक मशीनों का उपयोग और पुलों का सुदृढ़ीकरण—इन सबका सीधा असर यात्रा की गति, सुरक्षा और आराम पर पड़ा है। 130 किमी प्रति घंटे तक की गति वाले खंडों का विस्तार यह संकेत देता है कि भारत अब तेज़ रेल परिचालन के युग में प्रवेश कर चुका है।
विद्युतीकरण में लगभग 99.2% ब्रॉड गेज नेटवर्क का लक्ष्य हासिल करना ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का मजबूत उदाहरण है। यह उपलब्धि भारत को दुनिया के अग्रणी रेल नेटवर्कों की पंक्ति में खड़ा करती है।
भारतीय रेलवे की 2025 की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में रेल सुरक्षा में ऐतिहासिक सुधार शामिल है। कवच जैसी स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली, एआई आधारित निगरानी, सीसीटीवी नेटवर्क और डिजिटल संचार ने दुर्घटनाओं की संख्या को अभूतपूर्व रूप से कम किया है। यह दिखाता है कि तकनीक और सतर्क मानव संसाधन मिलकर सुरक्षा को नई ऊँचाई पर ले जा सकते हैं।
वंदे भारत एक्सप्रेस ने भारतीय रेल यात्रा की छवि बदल दी है और अब पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के आगमन से लंबी दूरी की यात्रा भी आधुनिक, तेज़ और आरामदायक होने जा रही है। वहीं, अमृत भारत ट्रेनें गैर-एसी यात्रियों के लिए सम्मानजनक और सुविधाजनक सफर सुनिश्चित कर रही हैं। 2025 में शुरू की गई 13 नई अमृत भारत ट्रेनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि विकास का केंद्र आम यात्री ही है।
भीड़ प्रबंधन के लिए 43,000 से अधिक विशेष ट्रेनों का संचालन—विशेषकर महाकुंभ जैसी विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान—रेलवे की संचालन क्षमता और योजना कौशल का प्रमाण है।
यात्री सेवाओं के साथ-साथ भारतीय रेलवे माल ढुलाई में भी वैश्विक शक्ति बनकर उभरा है। समर्पित माल ढुलाई गलियारों, गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों और रिकॉर्ड वैगन उत्पादन ने भारत को विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मालवाहक बना दिया है। 2029–30 तक 3,000 मीट्रिक टन वार्षिक लोडिंग का लक्ष्य यह दर्शाता है कि रेलवे भारत की औद्योगिक और लॉजिस्टिक जरूरतों का केंद्रीय स्तंभ बन रहा है।
कश्मीर, मिजोरम और पूर्वोत्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में सभी मौसमों में चलने वाली रेल परियोजनाओं ने क्षेत्रीय एकता को नई मजबूती दी है। नया पंबन पुल न केवल तीर्थयात्रा और पर्यटन को बढ़ावा देता है, बल्कि भविष्य में भारत–श्रीलंका संपर्क की संभावनाओं को भी खोलता है। ये परियोजनाएँ दिखाती हैं कि रेलवे केवल पटरियाँ नहीं बिछा रहा, बल्कि अवसरों के रास्ते बना रहा है।
केंद्रित प्रयासों, नवाचार और स्वदेशीकरण के सहारे भारतीय रेलवे ने 2025 में यह सिद्ध कर दिया है कि वह भविष्य की जरूरतों को समझता है। सुरक्षित, तेज़, आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल रेल नेटवर्क का सपना अब काग़ज़ से उतरकर ज़मीन पर दिखने लगा है। 2026 भारतीय रेल के लिए केवल अगला वर्ष नहीं, बल्कि उस नए भारत की झलक होगा जहाँ यात्रा, व्यापार और विकास एक ही पटरी पर तेज़ी से आगे बढ़ेंगे।

