तवांग के म्हेंटसांग रोंग में आपदा प्रबंधन पर संयुक्त सिविल-सैन्य मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक सम्पन्न

तवांग (अरुणाचल प्रदेश)। म्हेंटसांग रोंग (बोमदीर नाला), तवांग में आज एक वृहद स्तर की संयुक्त सिविल-सैन्य मॉक ड्रिल का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य भूस्खलन, भूकंप, बाढ़ और अग्निकांड जैसी प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को सुदृढ़ करना और आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को बेहतर बनाना था।

यह मॉक ड्रिल सुबह 11:30 बजे शुरू हुई, जिसकी निगरानी तवांग ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर भूपाल सिंह, एसएम ने स्वयं की। इस अभ्यास में भारतीय सेना, सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 38वीं बटालियन, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 55वीं बटालियन, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की 12वीं बटालियन, तवांग अग्निशमन विभाग, तवांग पुलिस, KDS जिला अस्पताल के चिकित्सा कर्मी और पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विभाग के डॉक्टरों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

अभ्यास से पहले, 10 जून 2025 को तैयारियों की शुरुआत हुई, जिसमें स्थैतिक उपकरणों का निरीक्षण और एक विस्तृत ब्रीफिंग सत्र आयोजित किया गया। यह सत्र ब्रिगेडियर भूपाल सिंह और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी गेंडन त्सोमु की संयुक्त अध्यक्षता में संपन्न हुआ।

ड्रिल को पांच अलग-अलग स्थानों पर एक साथ अंजाम दिया गया, जहां भूस्खलन, भूकंप, बाढ़ और आग जैसी आपदाओं के यथार्थपरक परिदृश्यों को प्रस्तुत किया गया। इन अभ्यासों का उद्देश्य यह जांचना था कि आपात स्थिति में राहत और बचाव टीमें किस हद तक त्वरित, समन्वित और कुशल हैं।

ड्रिल के बाद हुई डि-ब्रीफिंग में, ब्रिगेडियर भूपाल सिंह ने सभी प्रतिभागियों को बधाई दी, परंतु साथ ही चेताया कि वास्तविक आपदाएं कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होती हैं। उन्होंने कहा कि पल भर की देरी जानलेवा साबित हो सकती है। उन्होंने सभी टीम कमांडरों से आग्रह किया कि वे हर समय सजग और तैयार रहें।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रत्येक बस्ती में जिम्मेदार व्यक्तियों की नियुक्ति की जाए, जो आपात स्थिति में प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को सक्रिय कर सकें। उन्होंने कहा कि आपदा के पहले दो घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं और समय पर कार्रवाई से कई जीवन बचाए जा सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से ढलानों या घनी आबादी वाले क्षेत्रों के निवासियों को स्थानीय स्तर पर आपदा प्रबंधन योजना बनाने और निकासी मार्गों को चिह्नित करने की सलाह दी।

ब्रिगेडियर सिंह ने यह भी सुझाव दिया कि ऐसे अभ्यास नियमित रूप से, खासकर मानसून सीजन में, आयोजित किए जाने चाहिएं। साथ ही उन्होंने प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण और आपदा संभावित इलाकों में आवश्यक राशन के भंडारण की सिफारिश की।

यह संयुक्त अभ्यास दर्शाता है कि तवांग की जनता की सुरक्षा और कल्याण के लिए सिविल और सैन्य एजेंसियां मिलकर पूरी सतर्कता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही हैं।

इस बीच, तवांग की उपायुक्त नामग्याल आंगमो, पुलिस अधीक्षक डॉ. डी. डब्ल्यू. थोंगोन, और जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी गेंडन त्सोमु ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के साथ एक वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया, जिसमें क्षेत्र की मानसून तैयारी योजनाओं की समीक्षा की गई।

 

 

 

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