सुधीर कुमार
पूरा विश्व वैश्विक महामारी से त्रस्त है। ये शायद विश्व का पहला महामारी है जिससे जन – जीवन चौतरफा प्रभावित है। इसके प्रभाव से न सिर्फ शारिरिक और आर्थिक बल्कि बड़े स्तर पर सामाजिक परिवर्तन भी हो रहे हैं। लोगों के उठना-बैठना से लेकर बोल चाल सब कुछ बदले-बदले से लग रहे हैं। इसकी बानगी पिछले दिनों जारी एनसीईआरटी के गाइडलाइंस में दिखी। दरअसल एनसीईआर टी ने स्कूल फिर से खोलने के लिए एक गाइडलाइंस तैयार कर सरकार को सौंपी है। जिसमें बहुत सारे एहतियात के साथ बहुमूल्य सुझाव भी दिये गए हैं। स्कूल खोलना जरूरी है। लेकिन क्या यह उपयुक्त समय है?
अभी भी देश की राजधानी जहां कोरोना के नियंत्रण में होने की बात की जा रही है, प्रतिदिन हजार से ज्यादा मरीज निकल रहे हैं। कई राज्यों में तो स्थिति और भी भयावह बनी हुई है। ऐसे में स्कूल खोलना कितना उचित है। इस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के पूर्व डीन, डॉ. एस एन सिंह का कहना है कि जब सारी अदालतें बन्द हैं तो नौनिहालों की जिंदगी से खिलवाड़ क्यों? जब तक कोरोना का कहर समाप्त नहीं होता, स्कूल, कॉलेज नहीं खुलने चाहिए। उन्होंने सिर्फ़ समय का इन्तजार करने को कहा है। उन्होंने सरकार से सवाल भी किया है कि स्कूल खुलने पर यदि कोई अनहोनी होती तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
सवाल वाजिब है। कल कोविद – 19 से बचाव के संदर्भ में राज्यों के मुख्यमंत्री से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने भी राज्यों में बढ़ती महामारी को लेकर दुःख व्यक्त किया साथ ही बिहार राजस्थान, पश्चिम बंगाल और तेलंगाना सहित कई राज्यों में जांच को बढ़ाने की बात की। अब आप ही तय कीजिए क्या ऐसे में स्कूल का खुलना कितना हितकर है।
एनसीईआरटी के गाइडलाइंस के मुताबिक-
इन छह चरणों में शुरू होगी पढ़ाई
1. पहले चरण में 11वीं और 12वीं की कक्षाएं शुरू की जाएंगी।
2. इसके एक हफ्ते बाद नौवीं और दसवीं की पढ़ाई शुरू होगी।
3. तीसरे चरण में दो हफ्ते बाद छठी से लेकर आठवीं तक की कक्षाएं शुरू होंगी।
4. इसके तीन हफ्ते बाद तीसरी से लेकर पांचवीं तक की पढ़ाई होने लगेंगी।
5. पांचवां चरण पहली और दूसरी कक्षाओं की शुरुआत का होगा।
6. छठे चरण में पांच हफ्ते बाद अभिभावकों की मंजूरी के साथ नर्सरी व केजी की कक्षाएं शुरू होंगी। हालांकि कंटेनमेंट जोन के स्कूल ग्रीन जोन बनने तक बंद ही रहेंगे।
इसके अलावा ये शर्तें हैं-
क्लास में स्टूडेंट्स के बीच 6 फीट की दूरी जरूरी होगी। एक कमरे में 30 या 35 बच्चे होंगे।
क्लासरूम के दरवाजे-खिड़कियां खुली रहेंगी और एसी नहीं चलाए जा सकेंगे।
बच्चे ऑड-ईवन के आधार पर बुलाए जाएंगे, लेकिन होम असाइनमेंट प्रतिदिन देना होगा।
बच्चे सीट न बदलें, इसके लिए डेस्क पर नाम लिखा होगा। रोज वहीं बैठना होगा।
कक्षाएं शुरू होने के बाद हर 15 दिन में बच्चे की प्रोग्रेस को लेकर पेरेंट्स से बात करनी होगी।
कमरे रोजाना सैनिटाइज हों, ये सुनिश्चित करना प्रबंधन का काम होगा. मॉर्निंग असेंबली और एनुअल फंक्शन जैसा कोई आयोजन नहीं होगा।
स्कूल में प्रवेश से पहले छात्रों और स्टाफ की स्क्रीनिंग होगी। स्कूल के बाहर खाने-पीने के स्टॉल नहीं लगाए जाएंगे।
बच्चों के लिए कॉपी, पेन, पेंसिल या खाना शेयर करने की मनाही होगी. बच्चों को अपना पानी साथ लाना होगा।
हर बच्चे के लिए मास्क पहनना जरूरी होगी. स्कूल में सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल न रखने पर बच्चे के पेरेंट्स को सूचित किया जाएगा।
इन पर भी देना होगा ध्यान
चिकित्सा, सुरक्षा या सफाई संबंधी कामों से जुड़े पेरेंट्स को इसकी सूचना पहले ही स्कूल को देनी होगी।
उन्हीं अभिभावकों को शिक्षकों से मिलने की अनुमति होगी जो फोन पर संपर्क करने की स्थिति में नहीं होंगे।
पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग नहीं होगी। ट्रांसपोर्ट को लेकर जल्द ही गाइडलाइन जारी कर दी जाएगी।
जहां तक हॉस्टल की बात है तो वहां भी छह-छह फीट की दूरी पर बेड लगाने होंगे।

