नई दिल्ली। पौराणिक कथा के अनुसार, देवता अपनी दीपावली Kartik Purnima की रात को ही मनाते हैं. सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है कार्तिक पूर्णिमा. इस दिन वाराणसी में धूम रहेगी व माँ गंगा दीपों से सजी रहेगी. Kartik Purnima में स्नान और दान को अधिक महत्व दिया जाता है। इस दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर दीप दान को भी विशेष महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि इस दिन दीप दान करने से सभी देवताओं का आशीर्वाद मिलता हैं.
कार्तिक पूर्णिमा 2020 तिथि
इस वर्ष, कार्तिक पूर्णिमा 30 नवंबर 2020 को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि 29 नवंबर को दोपहर 12:47 बजे से शुरू होकर 30 नवंबर को दोपहर 2:59 बजे समाप्त हो रही है। कहते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन दान करने का हजारों गुणा फल मिलता है। इसलिए इस दिन गरीबों को गर्म कपड़ों, गर्म चीजों का दान किया जाता है।
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व
पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने त्रिपुरारी का अवतार लिया था और इस दिन को त्रिपुरासुर के नाम से जाना जाने वाले असुर भाइयों की एक तिकड़ी को मार दिया था। यही कारण है कि इस पूर्णिमा का एक नाम त्रिपुरी पूर्णिमा भी है। इस प्रकार अत्याचार को समाप्त कर भगवान शिव ने शांति बहाल की थी। इसलिए, देवताओं ने राक्षसों पर भगवान शिव की विजय के लिए श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए इस दिन दीपावली मनाई थी। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव की विजय के उपलक्ष्य में, काशी (वाराणसी) के पवित्र शहर में भक्त गंगा के घाटों पर तेल ओर घी के दीपक जलाकर और अपने घरों को सजाकर देव दीपावली मनाते हैं।
देव दीपावली मनाने की भी परंपरा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी विवाह के दिन ही भगवान विष्णु जागृत होते हैं। इससे पहले वह 4 माह के शयन निद्रा में रहते है। कार्तिक पूर्णिमा की तिथि पर ही उन्होंने मत्स्य अवतार लेकर राक्षस त्रिपुरासूर के आतंक को समाप्त किया था। जिसके बाद देवों ने देव दीपावली मनायी थी। यही कारण है कि इस दिन देव दीपावली मनाने की भी परंपरा है।


