रामेश्वरम। दो दिसंबर को काशी से आरंभ हुआ काशी–तमिल संगमम् 4.0 का भव्य समापन मंगलवार को तमिलनाडु के पवित्र तीर्थ रामेश्वरम में हुआ। समापन समारोह में उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन, केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन, तमिलनाडु के राज्यपाल श्री आर. एन. रवि और पुडुचेरी के उपराज्यपाल श्री कैलाशनाथन सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यदि भारत को एक आंख माना जाए, तो दूसरी आंख तमिल भाषा है। उन्होंने महाकवि सुब्रमण्यम भारती के सपनों का उल्लेख करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन, दूरदृष्टि और रणनीति के तहत वे आज साकार हो रहे हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि काशी में शुरू हुआ केटीएस 4.0 संस्कृति के संगम का प्रतीक बनकर रामेश्वरम की पवित्र भूमि पर संपन्न हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत वैश्विक विकास के शिखर पर पहुंचेगा, तब तमिलनाडु भी देश के विकास में अग्रणी भूमिका निभाएगा।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि काशी–तमिल संगमम् की परिकल्पना माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक सभ्यतागत पहल के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य केवल सांस्कृतिक आयोजन करना नहीं, बल्कि भारत की जीवंत परंपराओं के माध्यम से राष्ट्रीय भावनात्मक और सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करना है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष संगमम् का विषय “लेट्स लर्न तमिल – तमिल करकलाम” है। तमिल सीखना केवल एक भाषा सीखना नहीं, बल्कि भारत के प्राचीन ज्ञान, दर्शन और वैज्ञानिक परंपराओं के द्वार खोलना है। तमिल साहित्य नैतिकता, शासन, गणित, खगोल विज्ञान, चिकित्सा, पारिस्थितिकी, वास्तुकला और सामाजिक संरचनाओं की गहरी समझ प्रदान करता है।
श्री प्रधान ने कहा कि विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ते हुए विकास को केवल आर्थिक सूचकांकों से नहीं मापा जा सकता। ज्ञान, नवाचार और सभ्यतागत मूल्यों का सम्मान ही भारत की एकता और शक्ति को सुदृढ़ करता है। उन्होंने विविधता के सम्मान और ज्ञान-साझेदारी को भारत की आत्मा बताया।
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कहा कि काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराना ऐतिहासिक संबंध है, जिसका उल्लेख रामायण और महाभारत में भी मिलता है। उन्होंने तमिल भाषा और संस्कृति के वैश्विक प्रचार-प्रसार में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को रेखांकित किया।
तमिलनाडु के राज्यपाल श्री आर. एन. रवि ने कहा कि काशी–रामेश्वरम का संबंध श्रीराम के काल से चला आ रहा है। उन्होंने बताया कि ‘तमिल करकलाम’ पहल के तहत काशी के लगभग 300 छात्रों को तमिलनाडु में तमिल भाषा सीखने का अवसर मिला, जबकि तमिलनाडु से 50 शिक्षकों ने काशी जाकर विद्यालयों में तमिल पढ़ाई।
भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित काशी–तमिल संगमम् का यह चौथा संस्करण था। इससे पहले इसके तीन सफल संस्करण आयोजित हो चुके हैं। इस बार का संगमम् खास इसलिए रहा क्योंकि पहली बार उत्तर प्रदेश के छात्रों को संगठित रूप से तमिल भाषा सिखाने पर विशेष जोर दिया गया।
यह आयोजन काशी और तमिलनाडु के बीच प्राचीन, बहुआयामी संबंधों को और सशक्त करते हुए ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को नई ऊंचाइयों तक ले गया।

