‘शिक्षा ज्योति’ प्रोग्राम के जरिए बालिका शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है केईआई इंडस्ट्रीज

नई दिल्ली। केबल निर्माता केईआई इंडस्ट्रीज बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित कर रही है। इस दिशा में एक कदम आगे बढ़ाते हुए केईआई इंडस्ट्रीज ने इस दीवाली ‘शिक्षा ज्योति अभियान’ की शुरुआत की है। इस अभियान के जरिए महामारी के दौरान बालिकाओं तक शिक्षा पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। जिसके लिए 5वीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से ‘स्टडी मोर किट’ और ‘शिक्षा ज्योति वेबसाइट’ की शुरुआत की गई है। 1 सितंबर से शुरू हुए इस अभियान में अभी तक 1 लाख से अधिक अभिभावक शामिल हो चुके हैं।

केईआई इंडस्ट्रीज की निदेशक श्रीमती अर्चना गुप्ता ने कहा, “एक ब्रांड के रूप में हमारा जुड़ाव रौशनी से है। ऐसे में हमारी सामाजिक प्रतिबद्धता उन बालिकाओं के जीवन को भी रौशन करना है जो मुश्किल समय में सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। कोरोना महामारी भी इसका अपवाद नहीं है। मेरा मानना है कि देश में लड़कियों की स्थिति को बदलने और बालिका शिक्षा के लक्ष्य तक पहुंचने का सबसे बेहतर माध्यम शिक्षा ही है। लड़कियों को शिक्षित करने का मतलब परिवार को शिक्षित करना है।’

इस अभियान से देश भर की लड़कियों को जोड़ा गया है और उन्हें ‘स्टडी मोर किट्स’ पर रजिस्ट्रेशन करने का अवसर दिया गया है, ताकि उन्हें अध्ययन में डेटा या एसेसरीज और मार्गदर्शन की कमी महसूस न हो। इन लाभार्थियों को अपने समूह और आस-पड़ोस में शिक्षा ज्योति वेबसाइट के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है ताकि अधिक से अधिक लड़कियां अध्ययन सामग्री तक पहुंच सकें और शिक्षा ज्योति पहल से लाभान्वित हो सकें।

शिक्षा ज्योति अभियान वंचित वर्ग की बालिकाओं तक पहुंच रहा है और उनकी शिक्षा की निरंतरता को सुविधाजनक बनाने की दिशा में प्रयासरत है। ‘स्टडी मोर किट’ द्वारा ऑनलाइन क्लास लेने वाले शिक्षार्थियों के नए वर्ग को ऑनलाइन शिक्षा, सहायक उपकरण, डेटा और वेबसाइट संबंधी मार्गदर्शन देकर ऑनलाइन शिक्षा तक उनकी पहुंच को आसान बनाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की शिक्षा एजेंसी यूनेस्को के अनुसार, कोरोना वायरस महामारी के चलते बंद हुए स्कूलों के कारण वैश्विक स्तर पर 154 करोड़ से अधिक छात्रों की शिक्षा बाधित हुई है। इसका सबके ज्यादा प्रभाव लड़कियों पर पड़ेगा जिसके कारण ड्रॉप-आउट दरों में वृद्धि होगी और यह आगे चलकर शिक्षा में लैंगिक अंतर को बढ़ाएगा।

 

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