नई दिल्ली। जेएनयू के शैक्षणिक वातावरण को बीती रात वामपंथी संगठनों के नकाबपोश गुंडों ने हिंसा कर गंभीर रूप से प्रभावित किया। लगभग 400 की संख्या में आए वामपंथी नकाबपोश हमलावरों की भीड़ ने सुनियोजित ढंग से स्कूल परिसर को घेर लिया और आम छात्रों को निशाना बनाया। यह हमला पूर्व-नियोजित था, जिसमें अभाविप कार्यकर्ताओं को चिन्हित कर उन पर विशेष रूप से प्राणघातक हमला किया गया।
गौरतलब हो कि अभाविप, छात्रविरोधी CPO मैन्युअल जोकि लेफ्ट नीत जेएनयूएसयू तथा लेफ्ट नीत JNUTA के कार्यकाल के दौरान लागू हुआ, के ख़िलाफ़ लगातार आंदोलन कर रही है। हाल ही में इसके ख़िलाफ़ अभाविप द्वारा प्रदर्शन, मेस कैंपेन, क्लास कैंपेन और सिग्नेचर कैंपेन चलाया गया था, जिससे छात्रविरोधी CPO मैन्युअल को हटाया जा सके। अभाविप के इसी छात्रहितैषी आंदोलन से बौखलाए लेफ्ट नीत जेएनयूएसयू के गुंडे, जोकि
जेएनयू सेंट्रल लाइब्रेरी में लगे उपकरणों (सार्वजनिक सम्पत्ति) के तोड़-फोड़ के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा निष्कासित हैं, और विश्वविद्यालय से आउट ऑफ़ बाउंड हैं, साबरमती टी-प्वाइंट से जेएनयू के वीसी गेट तक एक यात्रा निकालते हैं। इसी यात्रा में सुनियोजित तरीके से सभी नकाबपोश गुंडे स्कूल एरिया के पास पहुंचें, उसके बाद जबरन वहाँ के रीडिंग रूम में पढ़ रहे छात्रों को रीडिंग रूम खाली करने को कहा इसके बाद जिस भी छात्र ने अवरोध किया, वामपंथी उपद्रवियों ने उन्हें पीटा। अभाविप कार्यकर्ता जब आम छात्रों को बचाने गए तो वामपंथियों की नक़ाबपोश भीड़ ने उन्हें चिन्हित कर जान से मारने की नीयत से हमला किया। वामपंथियो की नीयत का पता इस बात से लगाया जा सकता है कि दो शोधार्थियों विजय और मनीष को 150 से भी अधिक गुंडों ने दौड़ा दौड़ा कर पीटा। जब यह विद्यार्थी जैसे-तैसे स्कूल परिसर के शौचालयों एवं बिजलीघरों में छिपे, वहाँ पर भी पीछा करते हुए ये गुण्डे पहुँच गए और शौचालयों और बिजलीघरों के दरवाजों को तोड़ने लगे और एक शौचालय में वामपंथी गुण्डों ने अग्निशामक यंत्र चला दिया, जिससे भीतर बंद छात्र प्रतीक का दम घुटने लगा और कार्बन डाई ऑक्साइड की वजह से उसकी हालत अत्यंत गंभीर हो गई। भयभीत होकर छात्रों ने पुलिस को कॉल किया, परंतु इतनी बड़ी उपद्रवियों की फौज को संभालने के लिए केवल 3-4 पुलिसकर्मी ही आयें, जो छात्रों को रेस्क्यू करने के बजाय मूकदर्शक बने रहे। इसके पश्चात कुछ घंटों के बाद अभाविप के कार्यकर्ताओं के सहयोग से सभी छात्रों को वामपंथी उपद्रवियों से बचाया गया। घायल छात्रों में स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के छात्र प्रतीक भारद्वाज, स्कूल ऑफ लैंग्वेज के छात्र अनिमेष कुमार, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के छात्र विजय तथा स्कूल ऑफ़ सोशल साइंसेज के शोधार्थी मनीष चौधरी सहित कई छात्र शामिल हैं। छात्रों ने यह भी बताया कि पूरे घटनाक्रम के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन और दिल्ली पुलिस निष्क्रिय बने रहे, जो अत्यंत चिंताजनक है।
यह वामपंथी हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे, पहचान छिपाने के लिए उनके चेहरों पर नकाब थे तथा उनके हाथों में धारदार हथियार, लोहे की रॉड और भारी पत्थर थे। प्रारंभ में पत्थरबाजी की गई, जिससे परिसर में भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। जब छात्र स्वयं को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, तब उन्हें घेरकर मारपीट की गई। अभाविप कार्यकर्ताओं को अलग से चिन्हित कर दौड़ाकर पीटा गया तथा उन पर रॉड और धारदार हथियारों से वार किए गए। कई छात्र गंभीर रूप से घायल होकर अचेत हो गए।
यह घटनाक्रम वामपंथी राजनीति के उस दोहरे चरित्र को उजागर करता है, जिसमें सार्वजनिक रूप से लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात की जाती है, किंतु परिसर के भीतर हिंसा का सहारा लिया जाता है। जिस स्थान पर शैक्षणिक विमर्श और अध्ययन होना चाहिए, वहाँ हथियारों और पत्थरबाजी का वातावरण बनाया गया। स्कूल एरिया जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले स्थान पर इस प्रकार की संगठित हिंसा ने विश्वविद्यालय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। यह भी अचंभित करने वाला है कि जेएनयू प्रशासन ने जेएनयूएसयू के पदाधिकारियों को निष्कासित किया, परंतु इस निष्कासन के बाद भी उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में इतनी बड़ी हिंसा को अंजाम दिया। इस हिंसा के पीछे जेएनयू प्रशासन भी उतना ही जिम्मेदार है, जितना कि जेएनयू छात्रसंघ के निष्कासित पदाधिकारी।
अभाविप जेएनयू इकाई मंत्री प्रवीण पीयूष ने कहा कि अभाविप इस घटना की निंदा करती है और हम विश्वविद्यालय प्रशासन एवं दिल्ली पुलिस से मांग करते है कि परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान कर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जाए तथा उनकी शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। अभाविप विश्वविद्यालय परिसर को राजनीतिक हिंसा का अड्डा नहीं बनने देगी। रात में वामपंथी उत्पातियों ने जो हिंसा की, उनका उद्देश्य वामपंथ विरोधी छात्रों की हत्या कर जेएनयू को नक्सलबाड़ी बनाना था।
जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व सहसचिव वैभव मीणा ने कहा कि यह संपूर्ण घटना एक सुनियोजित साजिश का परिणाम है। छात्रों को स्कूल सेंटर के पुस्तकालय से बाहर निकालकर वहाँ ताला लगाया गया तथा प्रश्न उठाने वाले छात्रों के साथ मारपीट की गई। घटना में घायल कई कार्यकर्ता वर्तमान में सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। घायलों में स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के छात्र प्रतीक भारद्वाज, स्कूल ऑफ लैंग्वेज के छात्र अनिमेष कुमार, स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज के छात्र विजय तथा स्कूल ऑफ़ सोशल साइंसेज के शोधार्थी मनीष चौधरी सहित कई छात्र शामिल हैं। जेएनयू प्रशासन की लापरवाही व नक्सलियों से इनका साँठ-गाँठ इस पूरी हिंसा का सूत्रपात था।

