नई दिल्ली। मैथिली साहित्य महासभा द्वारा 21 फरवरी 2026 को अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम दिन के 2 बजे से शाम 7 बजे तक दीनदयाल उपाध्याय मार्ग (आईटीओ), नई दिल्ली स्थित मालवीय स्मृति सभागार में, मैसाम के गौरवपूर्ण एक दशक के उपलक्ष्य में कुलदेवी की आराधना करते हुए दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। भव्य और बेहद सुन्दर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जो तीन चरण में संपन्न हुआ।
पहले सत्र का शुभारम्भ मैसाम के महासचिव श्री अरुण कुमार मिश्र जी के अभिभाषण से शुरू हुआ और उसके बाद मैथिली कवि गोष्ठी का आयोजन शुरू हुआ, जिसमें स्थापित कवियों के साथ नवांकुर कवियों की सहभागिता रही। कवि गोष्ठी में कुल 14 कवियों ने अपने रचना का पाठ किया। इस गोष्ठी की अध्यक्षता डॉ. आभा झा जी ने किया, मुख्य अतिथि के रूप में श्री प्रभाष अकिंचन मंच पर उपस्थित रहे।
कवि गोष्ठी का कुशल संचालन श्रीमती सुधा ठाकुर जी, संयोजन श्री अखिलेश मिश्र “दाऊ जी” एवं धन्यवाद ज्ञापन श्री संजय झा जी ने किया।
इस कविगोष्ठी में विभिन्न कविगण द्वारा पाठ किया गया – डॉ प्रमोद कुमार, परासर नारायण, बिनय ठाकुर, आभा झा, जयंती कुमारी, मुन्नी कामत, शुभम वत्स, प्रभा झा, अनीता मिश्र, शुभ्रा झा, कविता पाठक झा, मंजूषा झा, सुप्रिया वात्स्यायन एवं अखिलेश मिश्र।
दूसरे सत्र में ‘मैसाम सम्मान-2026’ प्रदान किया गया।
इस वार्षिक आयोजन में मैथिली में सुदीर्घ साहित्य साधना हेतु वरिष्ठ साहित्यकार डॉ गंगेश गुंजन जी को दूसरा ‘मैसाम सम्मान-2026’ प्रदान कर, मील का पत्थर स्थापित किया गया। इस सम्मान के अंतर्गत उनको मैसाम के तरफ से नगद राशि 31000/- रुपया के साथ मिथिला चित्रकला से सुसज्जित पाग-दोपटा और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। प्राप्त सम्मान राशि को आदरणीय श्री गंगेश गुंजन जी ने साहित्यकार कल्याण कोष हेतु मैसाम को वापस देने की घोषणा की। उनके सम्मान के क्षण हमेशा स्मृति को गौरवान्वित करता रहेगा।
तीसरे सत्र में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया था, विचार गोष्ठी का विषय था ‘भोलालाल दास : व्यक्तित्व और कृतित्व’।
इस सत्र की शुरुआत मैसाम अध्यक्ष श्री हेमंत झा जी के वक्तव्य से हुआ, जिसमें उन्होंने पूर्व अध्यक्षों का आभार, नव कार्यकारिणी और नव सदस्य का स्वागत करते हुए किया। साथ ही इस बात पर जोर दिया कि, मैसाम नित नव कीर्तिमान गढ़ेगा। जिसमें नियमित कार्यक्रम के अलावा, मैसाम भविष्य में अपना प्रकाशन भी शुरू करेगा और आने वाले वर्ष में जो विश्व पुस्तक मेला का आयोजन होगा उसमें निश्चित तौर पर एक स्टॉल मैसाम के नाम का रहेगा। साथ ही मैसाम के विस्तार से सम्बंधित अपने विचार साझा किये।
मुख्य रूप से मैथिली के ख्यातिलब्ध साहित्यकार आदरणीय चंद्रशेखर पासवान जी की अध्यक्षता में आयोजित संगोष्ठी के विषय का चयन के लिए मंचासीन साहित्यकार अभिभावक लोगों का मंतव्य अत्यंत ही उत्साहित किया। श्री अरुण कुमार मिश्र जी के संचालन में आयोजित इस वार्षिक संगोष्ठी में स्मृति शेष भोलालाल दास जी के व्यक्तित्व और कृतित्व से संबंधित मुख्य वक्ता श्री शंभुनाथ मिश्र, विशिष्ट वक्ता श्री जीवेंदु प्रसाद कर्ण एवं संस्थागत वक्ता श्रीमती प्रेम चौधरी द्वारा प्रस्तुत गूढ़ विचार खूब आह्लादित किया।
इस अवसर पर श्री संजीव सिन्हा और श्री उज्जवल कुमार झा के संयुक्त संपादन में प्रकाशित मैसाम की अर्द्ध वार्षिक पत्रिका ‘अपूर्वा’, श्री राज किशोर मिश्र जी, श्रीमती निवेदिता झा जी और श्री प्रभाष अकिंचन जी की पुस्तकों का लोकार्पण हुआ जो मैसाम के साहित्यिक उद्देश्य को बल प्रदान करता है।
इस वार्षिक आयोजन के सफलता में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से अपना अमूल्य सहभागिता, मार्गदर्शन और अहर्निश सहयोग देने के लिए ख्यातिलब्ध साहित्यकार आदरणीय श्री गंगेश गुंजन जी, दूर्वाक्षत संस्था के संस्थापक पं. कौशल झा जी, श्री संजीव सक्सेना जी (मैथिली भोजपुरी अकादमी, दिल्ली), श्री मणिकांत झा जी, श्री अवनींद्र ठाकुर, श्री मनोज कर्ण मुन्ना, श्री कुंदन कर्ण, श्री रामबाबू सिंह, श्री मनीष झा बौआ भाई, श्री आनंद जी झा, श्री आदित्य झा, श्री मुकेश आनंद, श्री मुकेश दत्त जी एवं सभागार में खचाखच भरे सभी गणमान्य साहित्यकार, कथाकार, कलाकार, पत्रकार, मंच पर उपस्थित आदरणीय अतिथि, समस्त कार्यकारिणी और सभागार में उपस्थित सभी वरिष्ठ साहित्यकार, विद्वतजन, मैसाम परिवार, समस्त मातृभाषा प्रेमी एवं प्रबुद्ध श्रोता लोगों की सहभागिता के लिए सीए सरोज झा जी के द्वारा हृदय से धन्यवाद एवं आभार ज्ञापन किया गया।

