किसी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि कर्नाटक का मतलब कर नाटक और आपके नेता जी नाटक करने में सबसे आगे हैं ! फिर वह चाय बेचने की बात हो या फिर गालियां देने की बात हो ! वे इन सबको कैसे इमोशनल ड्रामे में बदल सकते हैं , यह अपनेआप में एक कला है ! बड़े बड़े अभिनेता इनके आगे पानी भरते नजर आते हैं ! सदी के महानायक भी इनके आगे नतमस्तक यूं ही नहीं हुए ! खिलाड़ियों का खिलाड़ी भी इनके गुण गाता है !
वैसे अपने मन की कहूं तो कम से कम दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दे रहीं पदक विजेता पहलवानों की ओर भी देखते और कुछ कहते कि कैसे इन बेटियों को सम्मान दिया जाये ! ये बेटियों पदक विजेता स्टैंड से उतरकर फुटपाथ पर क्यों आ गयी हैं ? ये बेटियों जिनके पदक जीतने पर आपने इन्हें देश का गौरव कहा , अभिमान कहा उन्हीं बेटियों को नहीं पूछोगे या इनके मन की बात नहीं सुनने जाओगे ? जो जा रहे हैं, उन पर आप राजनीति करने के आरोप लगा रहे हैं ! विपक्ष पर इन्हे उकसाने का आरोप लगा रहे हैं । सेल्फी विद डाॅटर नहीं लोगे क्या जंतर-मंतर पर बैठीं बेटियों के साथ ? ये आपकी लाडली गोल्डन गर्ल हैं ! जो देश में चल रहा है , उसकी बात क्यों नहीं करते ? अपने ही अपने मन की ही क्यों करते हैं ? दूसरों के मन की व्यथा भी तो सुनिये और कुछ हल कीजिए । हरियाणा में महिला कोच के मामले को अनदेखा क्यों किया जा रहा है ? वह किसी की बेटी नहीं ? इसी देश की बेटी है । जिन बेटियों पर दंगल फिल्म बनी और देश में महिला पहलवानों की चर्चा चली , आज वह फिल्मकार भी खामोश क्यों ? सानिया मिर्जा ने दिल की सुनो और दिल की कही ! पी टी उषा ने न दिल की सुनी और न दिल की कही ! लडकियों ने जरूर अपने आंचल को परचम बना लिया है ! शायद उन्हे समझ आ गया कि उनकी लड़ाई कोई नहीं लड़ेगा , उन्हें खुद ही यह परचम लहराना पड़ेगा ! अभी समय है । सुन लीजिये इनके मन की बात !
-कमलेश भारतीय

