मातृशक्ति को नमन

आचार्य चंद्रशेखर शास्‍त्री “वारिद”

नई दिल्ली। मेरे लिए वर्ष का हर दिन महिला दिवस है। माँ ने पैदा किया, लालन किया, पालन किया, पढ़ाया, साधना के मार्ग पर भेजा, साधना में भी शक्ति मार्ग दिया, लक्ष्मी स्वरूपा सहधर्मिणी का स्नेह मिला। जीवन का प्रत्येक क्षण शक्ति के आशीष से प्रकाशित होता है….वह नारायणी प्रत्येक रूप में प्रत्येक क्षण में पूजनीया है….उनका अनंत अशेष आशीष जिस दिन हट जाएगा, जीवन नष्ट हो जाएगा….नर वही है, जो नारायणी के प्रति नतमस्तक रहे…
नारी किसी भी रूप में हो, पूज्या है।
आगम शास्त्र कहते हैं कि वैश्या भी पूजनीया है। इसीलिए बंगाल में दुर्गा पूजा के समय पूजी जाने वाली मूर्ति में वहां के वैश्यालयों से मिट्टी मुंहमांगे दाम पर खरीदी जाती है….नारी तू नारायणी
मंथरा भी पूजनीय है…मंथरा न होती तो राम बस एक राजा के पुत्र होने के कारण राजा हो जाते। उनका मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप सामने न आ पाता।
तड़का, पूतना ने भगवान श्री कृष्ण के विराट स्वरूप को लोकदर्शन दिया।
सूर्पनखा ने लक्ष्मण के चरित्र का आदर्श और दुर्धर्ष योद्धा रावण का पतन कराकर सनातन की विजय पताका लंका तक फहराई….
सभी दिन महिलाओं के ही हैं। एक स्त्री माँ है, बहन है, बेटी है। उससे ही सब सम्बन्ध संसार में कहे गए हैं। जिन घरों में बेटियां नहीं होती हैं, उनके यहाँ से बुआ, ननद जैसे सम्बन्ध समाप्त हो जाते हैं, फिर इसी प्रकार अन्य संबंधों में भी बाधा होती है। सभी बेटियों के प्रति स्नेह रखें। बेटियां हैं तो यह दुनिया है। मातृशक्ति से ही सबको अपने योग्य स्नेह और वरदान मिलता है। मातृशक्ति को चरण वंदन करते हैं…..
भारतीय संस्कृति में नारी सदैव पूज्या हैं। वे देवीय शक्ति हैं। उनके लिए कोई दिवस विशेष न मनाकर हम जीवन भर उनका सम्मान करना सीख लें तो जीवन के सभी अवसाद समाप्त हो जाएंगे।
नारी मां है, उसके बिना सृष्टि की कोई सम्‍भावना ही नहीं है। कृत्रिम रूप से संतानोत्पत्ति की वैज्ञानिक अवधारणा अनैतिकता पर आधरित और अप्राकृतिक है। पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण करके हम अपने संस्कारों को भूल रहे हैं। जिससे अपसंस्कृति यहां पैर पसार रही है और जिसका सर्वाधिक दुष्प्रभाव हमारी युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है।
हमें याद रखना चाहिए कि सर्वशक्तिमान् सूर्य भी जब पश्चिम की ओर जाता है तो उसे अस्त होना पड़ता है। उसकी प्रभाहीनता की स्थिति से हमें सबक लेना चाहिए और सदैव नारियों का सम्मान हर रूप में करना चाहिए। नारियां ही विश्वकल्याण का मार्ग प्रशस्त करती हैं। अतः मातृशक्ति को सदैव सम्मान दें और अपनी नई पीढ़ियों की संस्कार दें, जिससे वे पाश्चात्यानुकरण की भूल न करें।
जय मां कामाख्या।
सभी को नमन।
मातृशक्ति के चरणों में पुनः पुनः मेरा वंदन। अभिनंदन!

।।जयतु मां भारती।।

मातृचरण सेवक
आचार्य चंद्रशेखर शास्‍त्री “वारिद”
अधिष्ठाता
श्री पीताम्बरा विद्यापीठ सीकरीतीर्थ
राष्ट्रीय अध्यक्ष
राष्ट्रीय ज्योतिष परिषद भारत
7351200046

 

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