नेशनल अवार्ड विनर शिक्षक के. रामचंद्रन ने कहा, पुरातन मूल्यों के साथ आधुनिक शिक्षा जरूरी

वाराणसी। समाज और देश के विकास के लिए सबसे जरूरी है कि हमारा समाज पूरी तरह से शिक्षित हो। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा का अलख जगाने के लिए पुरातन मूल्यों के साथ ही आधुनिक तकनीक का समावेश करना होगा। तमिलनाडु के राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षक के. रामचन्द्रन ने कहा कि हमारी पुरातन शिक्षा व्यवस्था में गुरूकल व्यवस्था रही है। शिक्षक और छात्र में परिवेश और रहन-सहन का कोई अंतर नहीं था। गुरुदक्षिणा एक अनिवार्य व्यवस्था थी। यदि आज भी उसी व्यवस्था को ग्रामीण क्षेत्र के साथ ही पूरे देश में लागू कर दिया जाए, तो पूरा समाज शिक्षित हो जाएगा।

वाराणसी में काशी तमिल संगमम के दौरान शिक्षक के रामचन्द्रन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहे। छात्र की तरह स्कूली परिधान पहने के. रामचंद्रन हर दूरी को पाट रहे थे। मंच से उन्होंने कहा कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार को हर ग्रामीण इलाके में स्कूलों को स्मार्ट क्लास बनाना चाहिए, जो पूरी तरह से आधुनिक तकनीक से लैस हो। उन्होंने अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि इसे बनाने में महज 20 हजार रूपये का खर्च आएगा। एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि बीते कुछ दिनों से सामासजिक उत्तरदायित्व, लोगों के कर्तव्य, अभिभावक की जिम्मेदारी में कमी देखी जा रही है। इसलिए बेहद जरूरी है कि शिक्षा के पारंपरिक व्यवस्था का अनुशीलन हो। आज हम काशी में बात कर रहे हैं और यह शिक्षा का प्रमुख केंद्र रही है। तमिलों के लिए भी काशी आना हमेशा से ही गर्व की बात रही है।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय के एम्फीथिएटर में काशी तमिल संगमम के दौरान तमिलनाडु से आई शिक्षिका सी. मुत्तुलक्ष्मी ने कहा कि हमें एक तरह से 1893 के शिकागो के धर्म संसद का आभास हो रहा है। हमने उस संसद के बारे में पुस्तकों में पढ़ा है। लेकिन, विख्यात शिक्षा केंद्र बीएचयू में जब हम इतने शिक्षकों और बुद्धिजीवियों के बीच बैठक शिक्षा पर बात कर रहे हैं, तो स्वामी विवेकानंद की कही कई बातें अनायास ही मानस पटल पर आ रही है।

तमिलनाडु से आए एक अन्य शिक्षक के. एस. नारायणन ने कहा कि कई रिपोर्ट में यह सिद्ध हो चुका है कि जो समाज अपनी मातृभाषा में सिद्धहस्त नहीं है, वह किसी अन्य भाषा को नहीं सीख सकता है। हमें गर्व है कि पूरा तमिलनाडु और यहां बैठे हमारे तमाम राज्यवासी अपनी मातृभाषा को जीते हैं। इसलिए हमें कोई अन्य भारतीय भाषा को समझने में दिक्कत नहीं आती है।

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