नई दिल्ली। विश्व पुस्तक मेले में गृह मंत्रालय भारत सरकार के अधीन जनगणना विभाग की ओर से भी स्टॉल लगाया गया है। जहां भारतीय जनगणना के इतिहास, आगामी जनगणना के बारे में विस्तार से दर्शकों को जानकारी दी जा रही है।
जनगणना से जुड़ी कई ऐसी जानकारियां हैं जो कि आम लोग नहीं जानते हैं। इसी उद्देश्य से जनगणना विभाग ने यह स्टॉल लगाया है जो लोगों के लिए खासकर स्कूली बच्चो के लिए बेहद आकर्षक का केंद्र बना हुआ है। शुक्रवार को इस स्टॉल पर पहुंचे स्कूली बच्चे जनगणना से जुड़ी जिज्ञासाओं के बारे में जानने के लिए इस स्टॉल पर आ रहे थे। केंद्र सरकार ने भारत की जनगणना-2027 के पहले चरण के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इस साल 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 30 दिनों की अवधि में घरों की गिनती का काम किया जाएगा।
साल 2027 की जनगणना भारत की पहली डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें डेटा इकट्ठा करने के लिए मोबाइल ऐप और खुद से गिनती करने वाला पोर्टल इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें 1931 के बाद पहली ऐतिहासिक देशव्यापी जाति जनगणना शामिल है, जिसमें सिर्फ़ SC/ST ही नहीं, बल्कि सभी समुदायों को शामिल किया जाएगा। इसलिए इस बार जनगणना विभाग का यह स्टॉल लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
पहले यह जनगणना 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड-19 के प्रकोप के कारण जनगणना कार्य स्थगित कर दिया गया था। आज़ादी के बाद पहली बार, 2027 की जनगणना में सभी समुदायों की जाति गणना शामिल होगी। आज़ादी के बाद से अब तक की गई सभी जनगणनाओं से जाति को बाहर रखा गया है। कुछ राज्यों ने अलग-अलग पारदर्शिता और उद्देश्य के साथ जाति सर्वेक्षण किए हैं, जिससे राजनीतिकरण की चिंताएं बढ़ रही थी। लेकिन इस बार सामाजिक समरसता की रक्षा के लिए, जाति गणना को अलग सर्वेक्षण के बजाय मुख्य जनगणना में ही शामिल करने का निर्णय लिया गया है।

