नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में नया मंत्रिमंडल मिल गया । हर राज्य को नेतृत्व देने की कोशिश घंटो माथापच्ची के बाद की गयी । फिर भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार नाराज हो गये और मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हुए । एक मंत्री से होता भी क्या ? बडी मुश्किल से तो नीतिश कुमार को साधा था । वही नाराज कर लिए । फिर पाया तो क्या पाया ? इधर ममता बनर्जी तो शामिल हुईं नहीं शपथ ग्रहण समारोह में । राहुल गांधी , सोनिया गांधी , मनमोहन सिंह व गुलाम नवी आजाद भी दिखे पर मजेदार बात कि कैमरे की फ्लैश कम ही चमकी इन पर । यह भेदभाव क्यों ? अब तो चुनाव खत्म हो गया । अब तो भेदभाव छोडिए ।
मजेदार बात है कि मंत्रिमंडल में राज्यवर्धन राठौर , मेनका गांधी को जगह नहीं मिली । सुषमा स्वराज को भी नहीं । वे दर्शक दीर्घा में बैठीं । मेनका को अस्थायी स्पीकर बनाने की चर्चा है । फिर शायद स्पीकर ही बना दी जाएं । मेनका ने भी कमाल कहा कि राजनीति बच्चों का खेल नहीं । राहुल और प्रियंका इनकी नजर में अभी बच्चे ही हैं । वरूण क्या है ? जिसने यह कहा कि अफसरों से मैं अपने जूतों के तस्मे खुलवाता हूं ? कुछ संस्कार उसे भी दे दीजिए न ।
नया मंत्रिमंडल काम शुरू कर देगा । अभी तो कुछ देशों के प्रमुखों से मिल रहे हैं मोदी जी पर नेतान्यूह तो चक्रव्यूह में फंस गये और आ नहीं सके । उनकी अपनी सरकार भंवर में फंस गयी । इसी तरह अशोक गहलोत की सरकार भंवर में है है । कब शनि की दृष्टि पड जाए , कह नहीं सकते । फिर भी हमारी नये मंत्रिमंडल को शुभकामनाएं । गहलोत को भी ।


