इंदौर। सराफा चौपाटी को लेकर खींचतान और तेज हो गई है। महापौर द्वारा चौपाटी हटाने से इनकार करने के बाद अब सराफा व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। उनका कहना है कि वे हर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं, लेकिन अब किसी भी कीमत पर चौपाटी नहीं लगने देंगे।
सोमवार को महापौर से मुलाकात के बाद मंगलवार को व्यापारियों की बैठक हुई। इसमें सर्वसम्मति से तय किया गया कि 1 सितम्बर से सराफा चौपाटी नहीं लगने दी जाएगी और व्यापारी खुद देर रात तक अपनी सोना-चांदी की दुकानें चालू रखेंगे।
जानकारी के अनुसार, अब तक सराफा व्यापारी ही चौपाटी पर दुकान लगाने वाले दुकानदारों से फुटपाथ किराए के रूप में 10 से 20 हजार रुपये प्रतिमाह तक वसूलते थे। लेकिन अब निर्णय लिया गया है कि सितम्बर से कोई भी व्यापारी किराया नहीं लेगा और दुकान के सामने चौपाटी लगाने की अनुमति नहीं देगा। इसके लिए व्यापारियों के बीच शपथ-पत्र भी बांटे जा चुके हैं।
व्यापारियों का साफ कहना है कि जब निगम विजय नगर की चौपाटी हटवा सकता है, तो सराफा चौपाटी क्यों नहीं हट सकती। यहां लगातार भीड़ बढ़ रही है और जान का खतरा बना रहता है। अगर आगजनी जैसी कोई घटना हुई तो करोड़ों का नुकसान और बड़ी जनहानि हो सकती है। उनका सुझाव है कि निगम चाहे तो चौपाटी को गांधी हॉल या किसी अन्य उचित स्थान पर शिफ्ट कर सकता है।
अब देखना होगा कि व्यापारियों का विरोध क्या रंग लाता है और क्या सितम्बर से सराफा चौपाटी वास्तव में यहां से हट पाती है या नहीं।

