नई दिल्ली। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (NSD) द्वारा आयोजित विश्व के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव भारत रंग महोत्सव (BRM) 2026 का 10वां दिन विविध रंगों, कथाओं और संस्कृतियों से सराबोर रहा। पाठकों तक यह समाचार पहुँचते-पहुँचते BRM 2026 देश के 19 स्थानों पर 130 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियाँ—माइक्रो ड्रामा और एकांकी सहित—प्रस्तुत कर चुका है।
इन प्रस्तुतियों में दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र समूहों द्वारा प्रस्तुत 31 माइक्रो ड्रामा, 5 एकांकी और 9 नुक्कड़ नाटक शामिल रहे, जिन्होंने महोत्सव को युवा ऊर्जा, सृजनात्मकता और समकालीन संवेदनाओं से समृद्ध किया। इसके साथ-साथ बैंड प्रस्तुति, टॉक शो, साहित्यिक चर्चा, फिल्म स्क्रीनिंग और बाल रंगमंच कार्यशाला जैसे इन्फोटेनमेंट कार्यक्रम भी BRM 2026 का अभिन्न हिस्सा बने।
10वें दिन मंच पर उर्दू और हिंदी की सशक्त कथाओं से लेकर कश्मीरी लोक परंपरा तक, और पोलैंड व रूस की अंतरराष्ट्रीय प्रस्तुतियों तक, विविध कथाविश्व एक ही मंच पर साकार हुआ। इसी दिन गौतम किशनचंदानी-टीस जोसेफ टॉक शो और सशक्त नुक्कड़ नाटक श्रृंखला ने दर्शकों की सक्रिय भागीदारी से माहौल को जीवंत बना दिया।
दिन की पहली पूर्णांक प्रस्तुति “बदज़ात” रही, जिसे बिलक़ीस ज़फ़रुल हसन ने लिखा और जावेद समीर ने निर्देशित किया। इसे दिल्ली के क्रिएटिव अड्डा समूह ने मंचित किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश के दर्पण लखनऊ समूह द्वारा सूर्य मोहन कुलश्रेष्ठ लिखित-निर्देशित नाटक “डैडी” प्रस्तुत किया गया।
दर्शकों ने कश्मीर की समृद्ध लोक परंपरा का अनुभव भी किया। श्रीनगर के पीथर बराए कश्मीर समूह द्वारा अरशद मुश्ताक निर्देशित भांड पाथर शैली का नाटक “अका नुंदुन (Apple of the Eye)” प्रस्तुत किया गया, जिसने लोक रंगमंच की विरासत को केंद्र मंच पर स्थापित किया।
अंतरराष्ट्रीय खंड में पोलिश-अंग्रेज़ी प्रस्तुति “Umadevi Observes Wanda Dynowska” (लेखन-निर्देशन: लुकाश चॉटकोव्स्की, थिएटर मलाबार होटल) और रूस के GITIS से एलेक्सी ब्लोखिन निर्देशित “A Very Simple Story” ने वैश्विक कलात्मक संवाद को साकार किया।
एनएसडी स्टूडेंट्स यूनियन की पहल ‘आदिवित्य’ के अंतर्गत नुक्कड़ नाटक श्रृंखला में प्रमुख कॉलेज समूहों ने सामाजिक सरोकारों को मुखर किया। विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज़ के विवरण समूह ने “कुछ अनसुने” के माध्यम से बाल शोषण जैसे संवेदनशील विषय को उठाया। आईजीडीटीयूडब्ल्यू की रहनुमा टीम ने “Baby Shark Do Do Do Do” के जरिए पारिवारिक परिवेश और पालन-पोषण के प्रभाव को प्रस्तुत किया। वहीं फेयरफील्ड इंस्टीट्यूट के जेहानाल समूह ने कैदियों के जीवन की पीड़ा और व्यवस्था संबंधी चुनौतियों को मंच पर उकेरा।
फिल्म स्क्रीनिंग खंड में ‘आदिवित्य’ के अंतर्गत एफटीआईआई डिप्लोमा फिल्मों का प्रदर्शन किया गया, जिनमें जस्मीत सिंह की “In the Shadow of Strands”, अदिति सिन्हा की “Whose Stories Are These” और “विजय दत्त को प्यास क्यों लगती है” शामिल रहीं। दिन का समापन एनएसडी टीआईई के संडे क्लब (ग्रुप-J) द्वारा डॉ. एस. बूमिनाथन और दीपा के नेतृत्व में प्रस्तुत “अतरंगी सतारंगी” से हुआ।
महोत्सव के व्यापक विस्तार के तहत 10वें दिन की प्रस्तुतियाँ दिल्ली के अलावा बेंगलुरु, पटना, साखली (गोवा), कोलकाता, पारादीप (ओडिशा), रांची, रायपुर, सूरत और पुणे में भी आयोजित की गईं।
27 जनवरी से 20 फरवरी 2026 तक चलने वाला BRM 2026 अपने 25 दिनों में 277 से अधिक प्रस्तुतियाँ 228 भारतीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में प्रस्तुत कर रहा है। 9 देशों की भागीदारी और देश के हर राज्य-केंद्र शासित प्रदेश के रंगकर्मियों की सहभागिता इस महोत्सव को वैश्विक और राष्ट्रीय रंगमंच का संगम बनाती है।
बच्चों के समूहों, जनजातीय समुदायों और वंचित वर्गों के कलाकारों की भागीदारी के साथ BRM 2026 रंगमंच की समावेशी भावना को सशक्त करता है। एनएसडी रंगमंच के प्रसार और लोकतंत्रीकरण की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में ‘रंग आकाश’ इंटरनेट रेडियो और ‘नाट्यम’ ओटीटी प्लेटफॉर्म की शुरुआत कर देशभर के रंगप्रेमियों तक अपनी श्रेष्ठ प्रस्तुतियाँ पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त किया गया है।

