समावेशी विकास और सामाजिक न्याय की ओर प्रधानमंत्री मोदी की पहल

अनंत अमित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75 वर्ष का सफर केवल एक राजनेता का नहीं, बल्कि एक ऐसे राज्यपुरुष का है जो राजनीति की सीमाओं से परे जाकर राष्ट्रीय एकता, वैश्विक सम्मान और समावेशी विकास का प्रतीक बन चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर उनके व्यक्तिगत गुण और कर्तव्यनिष्ठा पर नजर डालना बेहद महत्वपूर्ण है। उनके नेतृत्व की सफलता केवल नीतियों या योजनाओं में नहीं, बल्कि उनके अटूट समर्पण और नेतृत्व के दृष्टिकोण में भी निहित है।

75 वर्ष की उम्र में भी प्रधानमंत्री मोदी में उन नेताओं की ऊर्जा है जो आधी उम्र के होते हैं। प्रतिदिन 18 घंटे काम करना, सुबह 4 बजे कार्य आरंभ करना और शासन संचालन की निगरानी रीयल-टाइम डैशबोर्ड के माध्यम से करना उनके समर्पण का परिचायक है। उम्र संबंधी सभी धारणाओं को चुनौती देते हुए, उन्होंने यह साबित कर दिया कि सच्चा नेतृत्व केवल पद या शक्ति में नहीं, बल्कि कर्म और मेहनत में निहित होता है।

प्रधानमंत्री मोदी स्वयं को प्रधानमंत्री की बजाय “प्रधान सेवक” के रूप में पहचानते हैं। यह दृष्टिकोण उनकी सेवा-प्रधान नेतृत्व शैली को दर्शाता है, जिसमें व्यक्तिगत या राजनीतिक लाभ की बजाय राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखा जाता है। उनका यह नेतृत्व मॉडल प्रशासनिक दक्षता और सरकारी मशीनरी में उत्कृष्टता को प्रेरित करता है।
लगातार तीसरी बार जनता का भारी जनादेश। यह न केवल उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है, बल्कि देश के विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों में उनके पैन-इंडियन आकर्षण को भी दर्शाता है। दक्षिण भारत, जहां परंपरागत रूप से भाजपा के लिए चुनौतियां रही हैं, वहां भी मोदी ने गहरी पैठ बनाई। कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में उनके दर्जनों दौरे इस बात का प्रमाण हैं कि उन्होंने हिंदी पट्टी से परे भी सेतु बनाए।
मोदी विपक्षी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ भी कामकाजी तालमेल रखते हैं। उनकी योजनाएं और परियोजनाएं राजनीति की सीमाओं को पार करती हैं। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” और “एक भारत श्रेष्ठ भारत” जैसी पहल राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव हैं।

मोदी ने अब तक 27 देशों से सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्राप्त किए हैं—यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री के लिए अभूतपूर्व उपलब्धि है। 68 देशों की यात्राओं और 7 लाख किलोमीटर की दूरी तय कर, उन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर एक अहम शक्ति के रूप में स्थापित किया। 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता में “दिल्ली घोषणा पत्र” का सर्वसम्मति से पारित होना उनकी कूटनीतिक सफलता का सबसे बड़ा उदाहरण है। अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के पुनर्निर्वाचित अध्यक्ष के रूप में मोदी ने 120 देशों में 2.5 अरब डॉलर के सौर निवेश सुनिश्चित किए।

मोदी शासन में भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना। स्टार्टअप इकोसिस्टम 2014 के 350 से बढ़कर 2025 तक 1.6 लाख तक पहुंच गया। हाईवे निर्माण की रफ्तार 12 किमी प्रतिदिन से बढ़कर 28 किमी प्रतिदिन हो गई। डिजिटल इंडिया के तहत यूपीआई और ई-गवर्नेंस ने भारत को दुनिया का अग्रणी डिजिटल भुगतान वाला देश बना दिया।

मोदी के नेतृत्व में 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए। जनधन योजना से 55 करोड़ नए खाते खोले गए, जिनमें से आधे से ज्यादा महिलाओं के नाम पर हैं। आयुष्मान भारत योजना ने 50 करोड़ नागरिकों को स्वास्थ्य सुरक्षा दी। महिलाओं के लिए ट्रिपल तलाक पर प्रतिबंध और नारी शक्ति वंदन अधिनियम के जरिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाना ऐतिहासिक कदम साबित हुए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले दशक में भारतीय राजनीति ने सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के नए आयाम देखे हैं। विशेषकर जनजातीय समुदायों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के सशक्तिकरण के क्षेत्र में उठाए गए कदम न केवल ऐतिहासिक हैं, बल्कि भविष्य की सामाजिक संरचना को भी नई दिशा दे रहे हैं।

मोदी सरकार ने 15 नवंबर को “जनजातीय गौरव दिवस” घोषित कर बिरसा मुंडा जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मानित किया। इसके साथ ही 10 नए जनजातीय संग्रहालयों की स्थापना और पीएम-जनमन योजना के तहत 24,000 करोड़ रुपये की राशि 75 विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूहों के लिए आवंटित की गई। यह पहल जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में मील का पत्थर है।

प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में 18.5 लाख से अधिक वन अधिकार पट्टे जनजातीय परिवारों को दिए गए। इससे न केवल उनके पैतृक भूमि अधिकारों को मान्यता मिली, बल्कि आदिवासी समुदाय को गरिमा और आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी हासिल हुई।

महिलाओं के सशक्तिकरण में मोदी सरकार का ट्रिपल तलाक कानून ऐतिहासिक रहा है। इसने 2.7 करोड़ मुस्लिम महिलाओं को त्वरित तलाक जैसी कुप्रथा से मुक्त कर उन्हें सुरक्षा और सम्मान दिया। इसके अलावा अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति में 300% की वृद्धि कर सरकार ने 50 लाख से अधिक छात्रों को शिक्षा के अवसर प्रदान किए।

प्रधानमंत्री मोदी ने करतारपुर कॉरिडोर की स्थापना कर सिख श्रद्धालुओं की दशकों पुरानी आकांक्षा को पूरा किया। इसी प्रकार बौद्ध सर्किट के विकास में 1,000 करोड़ रुपये का निवेश कर बौद्ध तीर्थ स्थलों को वैश्विक पहचान दिलाने का प्रयास किया गया। साथ ही, यह सुनिश्चित किया गया कि मुद्रा योजना के अंतर्गत 25% ऋण अल्पसंख्यक उद्यमियों तक पहुँचे, जिससे आर्थिक समानता और उद्यमिता को बढ़ावा मिला।

मोदी ने आतंकी घटनाओं के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे निर्णायक कदम उठाकर आतंकवाद पर “जीरो टॉलरेंस” की नीति स्थापित की। कोविड महामारी के दौरान भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन अभियान चलाया, जिसमें 220 करोड़ से अधिक खुराक दी गईं। 2019 में अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ पूर्ण रूप से जोड़ा गया, जिसके बाद आतंकवादी घटनाओं में 70% कमी और पर्यटन में 120% की वृद्धि दर्ज की गई।

प्रधानमंत्री मोदी की यह कर्तव्यनिष्ठा और समर्पित नेतृत्व न केवल उनके अनुयायियों के लिए प्रेरणा है, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए भी एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। यह बताता है कि सच्चा नेतृत्व केवल पद और शक्ति का नाम नहीं, बल्कि निष्ठा, कर्म और देशभक्ति में छिपा होता है।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक व भाजपा से जुड़े हैं।)

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