झारखंड का राजभवन बना शुभ शक्ति का प्रतीक, राष्ट्रपति के बाद अब दिया उपराष्ट्रपति

अनंत अमित

झारखंड का राजभवन एक बार फिर सकारात्मक ऊर्जा और शुभ संकेतों का केंद्र साबित हुआ है। पहले यहाँ से देश को राष्ट्रपति मिला और अब उपराष्ट्रपति का गौरव भी झारखंड के नाम जुड़ गया है। उपराष्ट्रपति चुनाव में श्री  सीपी राधाकृष्णन ने शानदार जीत हासिल की है। उनकी जीत ने न केवल राज्य की राजनीति को नई ऊंचाई दी है, बल्कि झारखंड की धरती की शक्ति और सम्मान को भी देशभर में स्थापित किया है।

यह सफलता झारखंड के लिए ऐतिहासिक क्षण है। झारखंड का राजभवन अब एक तरह से राष्ट्रीय नेतृत्व तैयार करने का केंद्र बनता जा रहा है। लोगों में भी खुशी की लहर है। राजधानी रांची से लेकर गाँव-गाँव तक राधाकृष्णन जी की जीत का जश्न मनाया जा रहा है। झारखंड वासियों का मानना है कि यह उपलब्धि आने वाले समय में राज्य की भूमिका को और सशक्त करेगी।

मेरा यह सौभाग्य है कि हमें झारखंड राजभवन जाने का मौका बीते दो दशक से मिल रहा है। यह परम सौभाग्य है कि पहले तत्कालीन राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू और उसके बाद तत्कालीन राज्यपाल श्री  सीपी राधाकृष्णन से मिलने का सुअवसर मिला।

भारत के 15वें उपराष्ट्रपति चुने जाने के तुरंत बाद सी.पी. राधाकृष्णन ने अपनी जीत को एक मज़बूत वैचारिक संदेश के रूप में सामने रखा। मीडिया से पहली बातचीत में नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति ने साफ कहा कि यह चुनाव विचारधाराओं की टक्कर थी और मतों का रुझान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रवादी सोच अंततः विजयी हुई है। राधाकृष्णन की प्रचंड जीत—जहाँ उन्होंने विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को 300 के मुकाबले 452 मतों से हराया—उनके जनादेश के दावे को ठोस संख्यात्मक आधार देती है।

नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति ने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही महत्वपूर्ण होते हैं। ये एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। लोकतंत्र के हित को ध्यान में रखा जाएगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हर पद महत्वपूर्ण है और हर पद की अपनी सीमाएं होती हैं। हमको यह समझना होगा कि हमें इसी दायरे में काम करना है। यह जीत राधाकृष्णन के लंबे राजनीतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर भी है, जिसकी जड़ें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भाजपा में गहराई से जुड़ी हैं। कोयंबटूर से दो बार सांसद और तमिलनाडु में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, उन्होंने लगातार राष्ट्रवादी एजेंडे को आगे बढ़ाया है। अपने चुनाव से पहले, उन्होंने महाराष्ट्र और झारखंड के राज्यपाल के रूप में कार्य किया।

767 सांसदों के निर्वाचक मंडल में 152 मतों के अंतर से जीत, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की संसद में मजबूत स्थिति को और स्पष्ट करती है। विपक्षी भारत ब्लॉक ने इस मुकाबले को “वैचारिक लड़ाई” के रूप में पेश करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।
4 मई, 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में जन्मे श्री राधाकृष्णन ने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक के रूप में शुरुआत करने के बाद, वे 1974 में भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य बने। 1996 में, श्री राधाकृष्णन को तमिलनाडु भाजपा का सचिव नियुक्त किया गया। 1998 में वे पहली बार कोयंबटूर से लोकसभा के लिए चुने गए। 1999 में वे पुनः लोकसभा के लिए चुने गए।

सांसद के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने कपड़ा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) संबंधी संसदीय समिति और वित्त संबंधी परामर्शदात्री समिति के सदस्य भी रहे। वे स्टॉक एक्सचेंज घोटाले की जाँच करने वाली संसदीय विशेष समिति के सदस्य भी रहे।

2004 में, श्री राधाकृष्णन ने संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। वे ताइवान गए पहले संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य भी थे। 2004 से 2007 के बीच, श्री राधाकृष्णन तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे। इस पद पर रहते हुए, उन्होंने 19,000 किलोमीटर की ‘रथ यात्रा’ की, जो 93 दिनों तक चली। यह यात्रा सभी भारतीय नदियों को जोड़ने, आतंकवाद के उन्मूलन, समान नागरिक संहिता लागू करने, अस्पृश्यता निवारण और नशीले पदार्थों के खतरे से निपटने जैसी उनकी मांगों को उजागर करने के लिए आयोजित की गई थी। उन्होंने विभिन्न उद्देश्यों के लिए दो और पदयात्राओं का नेतृत्व भी किया।

2016 में, श्री राधाकृष्णन को कोच्चि स्थित कॉयर बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, और वे चार वर्षों तक इस पद पर रहे। उनके नेतृत्व में, भारत से कॉयर निर्यात 2532 करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया। 2020 से 2022 तक, वे केरल भाजपा के अखिल भारतीय प्रभारी रहे। 18 फरवरी, 2023 को श्री राधाकृष्णन को झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। अपने पहले चार महीनों के कार्यकाल में, उन्होंने झारखंड के सभी 24 जिलों का दौरा किया और नागरिकों तथा जिला अधिकारियों से बातचीत की।

श्री राधाकृष्णन एक उत्साही खिलाड़ी थे और कॉलेज स्तर पर टेबल टेनिस में चैंपियन और लंबी दूरी के धावक भी थे। उन्हें क्रिकेट और वॉलीबॉल का भी शौक था। श्री राधाकृष्णन ने अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन, पुर्तगाल, नॉर्वे, डेनमार्क, स्वीडन, फिनलैंड, बेल्जियम, हॉलैंड, तुर्की, चीन, मलेशिया, सिंगापुर, ताइवान, थाईलैंड, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और जापान की यात्रा की है।

नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने इस जीत को हर भारतीय की विजय बताया और सभी से एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “यदि हमें 2047 तक विकसित भारत का सपना साकार करना है तो विकास पर ध्यान केंद्रित करना होगा।” राधाकृष्णन ने यह भी स्पष्ट किया कि अपनी नई भूमिका में वे राष्ट्र के विकास के लिए पूरी क्षमता से योगदान देंगे। यह जीत केवल राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि राष्ट्र के भविष्य के लिए एक स्थिर और विकासोन्मुख दिशा की पुष्टि भी है।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं।)

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