
सुभाष चन्द्र
जब दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ मंदी की गिरफ्त में हैं, भारत 7.8% की विकास दर से सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है। यह केवल कर सुधार नहीं, बल्कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। भारत की आज़ादी के 75 वर्ष बाद, जब हम ‘विकसित भारत’ की राह पर बढ़ रहे हैं, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिए गए अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार एक ऐतिहासिक पड़ाव हैं। 3 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में हुई 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक ने जिस कर ढांचे की घोषणा की, उसने भारतीय अर्थव्यवस्था को सरल, पारदर्शी और जनोन्मुख बनाने का रास्ता खोला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुधारों से जीडीपी में 1–1.2% की अतिरिक्त वृद्धि और मुद्रास्फीति में 1% से अधिक की कमी होगी। इससे भारतीय सामान वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। बीजेपी सरकार ने जहाँ आम नागरिकों और उद्योग जगत को राहत दी है, वहीं विपक्ष पर यह निशाना भी साधा है कि यूपीए सरकार ने आटा, चावल और चाय पर कर लगाया था, जबकि अब एनडीए के तहत ये कर-मुक्त हैं।
2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक यह सबसे बड़ा और व्यापक कर सुधार है। आवश्यक वस्तुओं पर 5%, सामान्य वस्तुओं और सेवाओं पर 18% तथा केवल लक्जरी और हानिकारक वस्तुओं पर 40% कर लगाने का निर्णय न केवल कर ढांचे को सरल करता है, बल्कि इसे जनोन्मुख भी बनाता है। दैनिक जीवन की जरूरतों – दूध, चावल, आटा, चाय, दही, किताबें और भारतीय रोटी – को या तो शून्य कर या न्यूनतम कर दायरे में लाना गरीब और मध्यम वर्ग के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश साफ है कि कोई भी भारतीय परिवार अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए बोझिल न हो। यही “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” का वास्तविक रूप है।
स्वास्थ्य सेवाओं को कर-मुक्त करना और जीवन रक्षक दवाओं पर जीएसटी को शून्य करना, आम आदमी की पीड़ा के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह कदम न केवल आर्थिक राहत देता है, बल्कि नागरिकों को संकट की घड़ी में गरिमा भी प्रदान करता है। भारत की रीढ़ – किसान – को केंद्र में रखते हुए ट्रैक्टर, सिंचाई प्रणाली, उर्वरक और कीटनाशकों पर कर घटाकर 5% कर दिया गया है। इससे खेती की लागत घटेगी और ग्रामीण समृद्धि को नई दिशा मिलेगी। गृहिणियों और परिवारों को भी राहत मिली है। साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, साइकिल, रेफ्रिजरेटर, टीवी और वॉशिंग मशीन जैसे घरेलू सामान सस्ते होने से घर-घर में आराम और सुविधा बढ़ेगी। युवाओं की आकांक्षाओं का भी सम्मान किया गया है। छोटी कारों और मोटरसाइकिलों पर जीएसटी में कटौती उन्हें पहली बार खरीदारों के लिए किफायती बनाती है। इससे रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास की राह खुलती है।
बुनियादी ढांचा निर्माण, जो मोदी सरकार की प्राथमिकता है, को सीमेंट पर कर 28% से घटाकर 18% कर देने से नई गति मिलेगी। इससे घरों की लागत कम होगी और बड़े प्रोजेक्ट्स तेज़ी से पूरे होंगे। एमएसएमई, जो भारत में रोजगार की सबसे बड़ी रीढ़ है, को सरलीकृत अनुपालन और तेज़ रिफंड से बल मिला है। लंबे समय तक उपेक्षित इस वर्ग को अब नवाचार और विस्तार की नई संभावनाएं मिल रही हैं। स्पष्ट है कि यह सुधार केवल कर ढांचे का बदलाव नहीं है। यह उस “नए भारत” की नींव है, जहां हर वर्ग – गरीब, किसान, महिला, युवा और उद्यमी – राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में भागीदार है।
सरकार की इस पहल से मध्यम वर्ग को भी मज़बूती मिलेगी। कांग्रेस, जिसने उन्हें केवल टैक्स वसूली का साधन बना रखा था, उसके विपरीत भाजपा नीत एनडीए सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उन्हें ऐतिहासिक राहत दी है। अब जहाँ आवश्यक वस्तुएँ पूरी तरह कर-मुक्त हैं, वहीं आकांक्षी वस्तुएँ भी सस्ती हुई हैं। इसका सीधा असर कारोबार के विस्तार और खपत में बढ़ोतरी के रूप में दिखेगा। साथ ही, जीएसटी के सरलीकरण से भारत की लॉजिस्टिक लागत कम हुई है, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बने हैं। भाजपा के इन जीएसटी सुधारों ने एक बार फिर भारत को आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में उसकी प्रतिबद्धता को सिद्ध किया है।
एक अहम कदम यह है कि दिसंबर 2025 तक जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) की स्थापना की जाएगी। इससे लंबे समय से व्यवसाय जगत जिन जटिलताओं और देरी से जूझ रहा था, उसका समाधान मिलेगा। यह न्याय, पारदर्शिता और त्वरित निपटारे की दिशा में बड़ा कदम है।
महिला उद्यमियों के संदर्भ में भी ये सुधार दूरगामी महत्व रखते हैं। सरल जीएसटी ढांचा और आसान क्रेडिट पहुँच महिला-नेतृत्व वाले एमएसएमई को विस्तार, नवाचार और रोजगार सृजन के नए अवसर देगा। यह प्रधानमंत्री मोदी की सोच “नारी शक्ति भारत की प्रगति की चालक है” का ही मूर्त रूप है।
जहाँ तक इन सामूहिक सुधारों के व्यापक आर्थिक प्रभाव की बात है, विशेषज्ञों का अनुमान है कि नेक्स्ट-जेन जीएसटी सुधारों से भारत की जीडीपी में 1 से 1.2 प्रतिशत की अतिरिक्त वृद्धि और महंगाई में 1 प्रतिशत से अधिक की कमी आएगी। यह भाजपा सरकार के विकास और स्थिरता के संतुलित दृष्टिकोण का प्रमाण है। दुनिया जहाँ मंदी से जूझ रही है, वहीं भारत 7.8 प्रतिशत की दर से सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है—यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा की दूरदर्शी और निर्णायक शासनशैली का सशक्त उदाहरण है।
कुल मिलाकर, यह सुधार केवल कर ढांचे का बदलाव नहीं है, बल्कि नरेंद्र मोदी सरकार के राष्ट्र-निर्माण दृष्टिकोण का हिस्सा है। इन कदमों से भारत को 2047 तक “विकसित भारत” बनाने के संकल्प को नई गति मिली है। जीएसटी सुधार नरेंद्र मोदी सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं जिसमें ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ सिर्फ नारा नहीं, बल्कि ठोस कार्ययोजना है। यह सुधार भारत की आर्थिक संरचना को अधिक न्यायसंगत, प्रतिस्पर्धी और नागरिक-केंद्रित बनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसरों का द्वार खोलते हैं।
