नई दिल्ली। बिहार की राजनीति मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर गरमाई हुई है। इसी बीच उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव वर्ष 2022 तथा लोकसभा चुनाव वर्ष 2024 में भी मतदाता सूची में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम में फेरबदल करने का आरोप लगाया गया है। मंगलवार को इस संदर्भ में एक विशेष प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया।
पूर्व न्यायाधीश और संविधान बचाओ ट्रस्ट के अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव में मतदाता सूची में गड़बड़ियां सामने आई हैं, सूचना के अधिकार के तहत इस बावत राज्य चुनाव आयोग ने जानकारी मांगी गई, आरटीआई में किए गए खुलासे के आधार पर मतदाता सूची में गड़बड़ी न होने के प्रशासनिक दावों की जांच और न्यायिक कार्यवाही की मांग की गई है। मनोज कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव वर्ष 2022 तथा लोकसभा चुनाव वर्ष 2024 की मतदाता सूचियों में गलत तरीके से मत जोड़े जाने का उल्लेख है। संबंधित जिला व मंडलीय अधिकारियों द्वारा निर्वाचन आयोग को दिए गए शपथपत्रों में यह कहा गया है कि मतदाता सूची में किसी प्रकार की हेरफेर/त्रुटि नहीं, किसी मतदाता को हटाया नहीं गया, और उनके प्रमाणपत्र सत्य एवं सटीक हैं। उक्त प्रकरण पर भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय, मेरठ में तत्कालीक/वर्तमान जिलाधिकारियों, संबंधित अधिकारियों तथा मुख्य निर्वाचन अधिकारी (लखनऊ/नई दिल्ली) के विरुद्ध वाद विचाराधीन है। माननीय न्यायालय द्वारा नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। संविधान बचाओ ट्रस्ट नागरिकों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है, मनोज कुमार ने कहा कि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से काटना या हटाना गंभीर अपराध है। यह कार्य न केवल व्यक्ति के मताधिकार का हनन है बल्कि संपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ भी है। किसी एक भी मतदाता का वोट काटना लोकतंत्र के लिए आघात है। मतदाता सूची में किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से काटना एक गंभीर अपराध है। यह कार्य लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन है और नागरिकों के मताधिकार को प्रभावित करता है। यूपी मे मतदाता सूची में गड़बड़ी का प्रमाण यह है कि मेरठ भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय द्वारा संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया गया है। उन्होंने ये भी बताया की कैसे सरकारी अधिकारी को आरोपी बनाया जाए जो की भरता के इतिहास में पहली बार हुआ है ।

