वेव सिटी के निवासी अवैध तरीके से किए जा रहे प्रदर्शन से हो रहे हैं परेशान

गाजियाबाद। देश की सबसे बड़ी हाईटेक सिटी बनने जा रही वेव सिटी के पास अवैध तरीके से हो रहे धरना—प्रदर्शन के कारण स्थानीय निवासियों में आक्रोश है। वेव सिटी में रहने वाले निवासियों का कहना है कि प्रदर्शन के कारण उन्हें घर से बाहर निकलने में डर लगता है। सबसे बड़ा डर उन लोगों को रहता है जो नियमित कार्यालय जाते हैं। प्रदर्शन का असर कामकाजी महिलाओं पर ज्यादा पड़ रहा है।

वेव सिटी निवासी इस बात को लेकर खफा हैं कि प्रशासन भी प्रदर्शन कर रहे लोगों को रोक नहीं पा रहा है। यहां के निवासियों का कहना है कि जब भी सुबह कार्यालय के लिए निकलते हैं यह डर लगा रहता है कि कहीं कोई उनके साथ अप्रिय घटना न हो जाए। क्योंकि जिस अवैध तरीके से प्रदर्शन हो रहा है उसमें कुछ अराजक तत्व भी दिखाई देते हैं जिनसे डर बना हुआ है।

बताते हैं कि हम लोगों ने यहां सोचकर इसलिए घर खरीदा था कि यह देश की सबसे बड़ी हाईटेक सिटी होगी। लेकिन कुछ अराजक तत्व जहां ​यहां के विकास कार्य में बाधा पहुंचा रहे हैं। वहीं उनके लिए आना—जाना भी आसान नहीं रह गया है। सड़क किनारे धरना दे रहे इन लोगों को अगर कुछ कह दिया जाए तो ये उग्र हो जाते हैं। ऐसे में हमें हमेशा डर बना रहता है।

एक निजी कंपनी में कार्य करने वाली महिला ने बताया कि प्रदर्शन के कारण शाम को आफिस से आते समय डर बना रहता है। क्योंकि इनके प्रदर्शन करने का जो तरीका है वह उग्र दिखाई पड़ता है। इनका कहना है कि जब वेव सिटी के प्रबंधन और किसानों के बीच समझौता हो चुका है तो यह कौन लोग हैं जो प्रदर्शन कर रहे हैं।
इसी तरह से एक निवासी का कहना है कि सुनने में यह आता है कि किसान संगठनों की बात मान ली गई है। उनकी जो शिकायत है उसे भी दूर कर लिया गया है। फिर यह प्रदर्शन क्यों हो रहा है, समझ से परे हैं। वे सवाल उठाती है कि इस तरह के प्रदर्शन से हम लोगों को डर बना हुआ है और प्रशासन भी कुछ नहीं कर पा रहा है।

गौरतलब है कि थाना वेव सिटी स्थित वेवसिटी हाईटेक टाउनशिप में स्थित कंपनी के सेल्स आफिस की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर 17 मार्च 2025 से किसान संघर्ष समिति द्वारा अपनी मांगों को लेकर धरना—प्रदर्शन जारी है। धरने पर बैठे प्रर्दशनकारियों की ओर से बल्ली तथा पाल लगाकर धरना देते हुए मार्ग को अवरुद्ध कर दिया गया है। जिससे स्थानीय निवासियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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