मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव परिणामों के बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला है। राउत ने शिंदे पर पार्टी से विश्वासघात का आरोप लगाते हुए उन्हें ऐतिहासिक पात्र ‘जयचंद’ से तुलना की, जिससे राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
संजय राउत ने कहा कि यदि एकनाथ शिंदे ने शिवसेना से गद्दारी नहीं की होती, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मुंबई जैसे बड़े नगर निगम में कभी पैर जमाने का मौका नहीं मिलता। उन्होंने दावा किया कि मराठी समाज शिंदे को एक “जयचंद” के रूप में याद रखेगा। राउत ने सोशल मीडिया पोस्ट में राजपूत शासक जयचंद का उदाहरण देते हुए लिखा कि जिस तरह लोककथाओं में जयचंद को पृथ्वीराज चौहान के खिलाफ मोहम्मद गोरी का साथ देने के लिए जाना जाता है, उसी तरह शिंदे ने भी शिवसेना के साथ विश्वासघात किया।
राउत ने भाजपा पर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि पार्टी सत्ता हासिल करने के लिए विपक्षी दलों को तोड़ने की राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा, “भाजपा ‘जयचंद’ बनाकर चुनाव जीतती है। हर राज्य और हर शहर में वे पार्टियों को तोड़ते हैं और फिर सत्ता हासिल करते हैं।” राउत ने शिंदे की राजनीतिक हैसियत पर सवाल उठाते हुए कहा कि सत्ता में रहने तक ही उन्हें सम्मान मिलता है।
बीएमसी चुनाव परिणामों पर टिप्पणी करते हुए संजय राउत ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास असीमित शक्तियां होती हैं—पुलिस, प्रशासन और धन—और ऐसे में किसी भी मुख्यमंत्री के रहते परिणाम लगभग ऐसे ही होते। उन्होंने कहा कि मुंबई में मुकाबला बेहद करीबी रहा और इसे भाजपा की एकतरफा जीत नहीं माना जाना चाहिए।
राउत ने कहा कि बीएमसी में शिवसेना (यूबीटी) और उसके सहयोगियों के पास मजबूत संख्या है और विपक्ष नगर निकाय में सत्ताधारी दल पर कड़ी नजर रखेगा। उन्होंने दावा किया कि बीएमसी में विपक्ष के पास 105 सदस्य हैं और वे मुंबई को “बेचने” नहीं देंगे। राउत ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ी तो वे ठेकेदारों के कथित शासन के खिलाफ आखिरी दम तक लड़ाई लड़ेंगे।
संजय राउत के इस तीखे बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी और सियासी टकराव और तेज हो गया है।

