नई दिल्ली। रोग हर लेती हैं Sharad Purnima की चंद्र किरणें। वर्ष की सभी पूर्णिमा में आश्विन पूर्णिमा विशेष चमत्कारी मानी गई है। Sharad Purnima का चंद्रमा सोलह कलाओं से युक्त होता है। शास्त्रों के अनुसार इस तिथि पर चंद्रमा से निकलने वाली किरणों में सभी प्रकार के रोगों को हरने की क्षमता होती है। ज्योतिष प्रकोष्ठ के संभागीय प्रचार मंत्री पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है। अंतरिक्ष के समस्त ग्रहों से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा चंद्रकिरणों के माध्यम से पृथ्वी पर पड़ती हैं।
किरणों से खीर भी अमृत
पूर्णिमा की चांदनी में खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे रखने के पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि चंद्रमा के औषधीय गुणों से युक्त किरणें पड़ने से खीर भी अमृत के समान हो जाएगी। उसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होगा।
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शरद पूर्णिमा तिथि
योतिषाचार्य पं. नरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के अनुसार आश्विन पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 30 अक्तूबर को सायं 5: 45 बजे होगा। इसका समापन अगले दिन 31 अक्तूबर को रात्रि 8:17 बजे होगा। इस दृष्टि से शरद पूर्णिमा 30 अक्तूबर को होगी।
शरद पूर्णिमा पर भगवती लक्ष्मी के पूजन का विधान
शरद पूर्णिमा पर भगवती लक्ष्मी के पूजन का विधान है। जिन स्थानों पर देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित होती है, वहां लक्ष्मी पूजन का विशेष आयोजन होता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे कौमुदी उत्सव, कुमार उत्सव, शरदोत्सव, रास पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा और कमला पूर्णिमा भी कहते हैं।
क्या हैं पौराणिक मान्यताएं
शास्त्री जी के अनुसार Sharad Purnima से कार्तिक पूर्णिता तक नित्य आकाशदीप जलाने और दीपदान करने से दुख दारिद्र्य का नाश होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की निशा में ही भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना तट पर गोपियों के साथ महारास रचाया था। इसी दिन से कार्तिक मास के यम नियम, व्रत और दीपदान भी शुरू हो जाएंगे।

