शिवाजी कॉलेज में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ पर भव्य समारोह का आयोजन

नई दिल्ली : शिवाजी कॉलेज में राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को समर्पित एक भव्य एवं गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भारतीय राष्ट्रवाद की भावना और देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाया गया। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् के गायन का नेतृत्व किया और स्वदेशी संकल्प शपथ भी दिलाई।

कार्यक्रम की शुरुआत छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई, जिसके बाद गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। समारोह का एक प्रमुख आकर्षण वंदे मातरम् शिलापट्ट का अनावरण रहा। यह स्थायी स्मारक स्वतंत्रता संग्राम और देश के लिए किए गए सामूहिक बलिदानों की स्मृति के रूप में स्थापित किया गया है।

बाहरी कार्यक्रमों के पश्चात मंचीय समारोह का आयोजन हुआ। कुलपति प्रो. योगेश सिंह, शासी निकाय के अध्यक्ष प्रो. बी.डब्ल्यू. पांडेय और शिवाजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. वीरेंद्र भारद्वाज ने दीप प्रज्वलित किया तथा वंदे मातरम् के रचयिता, महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को पुष्पांजलि अर्पित की।

परंपरा और सामाजिक उत्तरदायित्व के सुंदर समन्वय के रूप में कुलपति को अंगवस्त्रम और फल-टोकरा भेंट किया गया। यह फल सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों, अनाथालयों और जरूरतमंद बच्चों में वितरित किए जाएंगे। यह पहल इस संदेश को दर्शाती है कि सच्चा राष्ट्रवाद करुणा और दैनिक आचरण में निहित होता है।

अपने मुख्य संबोधन में प्रो. योगेश सिंह ने राष्ट्रीय गीत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जहां राष्ट्रगान संवैधानिक और राजनीतिक एकता का प्रतीक है, वहीं वंदे मातरम् भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत चेतना को अभिव्यक्त करता है। उन्होंने कहा कि यह गीत गर्व और अपनत्व की साझा भावना को स्वर देता है, जो विविध भाषाई और सांस्कृतिक समुदायों को एक सूत्र में पिरोता है। वंदे मातरम् के 150 वर्षों के इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विश्वनाथ मुखर्जी और श्यामजी कृष्ण वर्मा के विचारों को उद्धृत किया तथा कहा कि यह गीत मातृभूमि के प्रति भारतीयों के कर्तव्यों की पुनः पुष्टि करता है। उन्होंने जागृति और आनंदमठ जैसी फिल्मों का उल्लेख कर छात्रों को देशभक्ति और राष्ट्रवादी मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कुलपति ने छात्रों से “भावनात्मक राष्ट्रवाद” और “व्यावहारिक राष्ट्रवाद” के बीच की दूरी को पाटने का आह्वान किया और कहा कि राष्ट्र के प्रति सच्ची निष्ठा केवल प्रतीकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि न्याय, समानता और नागरिक कर्तव्यों के पालन में भी परिलक्षित होनी चाहिए।

स्वागत भाषण में शिवाजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. वीरेंद्र भारद्वाज ने राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में कॉलेज की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वंदे मातरम् की भूमिका और समकालीन भारत में इसकी प्रासंगिकता पर भी चर्चा की।

सामूहिक वंदे मातरम् गायन के दौरान पूरा वातावरण देशभक्ति से ओत-प्रोत हो उठा। यह क्षण भावनात्मक ऊर्जा से भरपूर रहा, जिसमें राष्ट्र को एक भौगोलिक भूमि के साथ-साथ पवित्र आध्यात्मिक सत्ता के रूप में अनुभव किया गया।

कार्यक्रम का समापन कुलपति द्वारा स्वदेशी संकल्प शपथ दिलाने के साथ हुआ, जिसने स्वदेशी आंदोलन के दौरान वंदे मातरम् की ऐतिहासिक भूमिका को पुनः स्मरण कराया। अंत में प्रो. दीपिका यादव ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अतिथियों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया और भारत की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत पर चिंतन के लिए इस सार्थक मंच के आयोजन की सराहना की।

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