नई दिल्ली। भारत में बकरी पालन की उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण किसानों की आजीविका को सशक्त करने के उद्देश्य से, श्यून्य एग्रीटेक ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन गोट्स (ICAR–CIRG), मथुरा के साथ 5 साल का समझौता (MoU) किया है। यह साझेदारी हाइड्रोपोनिक चारे के अनुसंधान और विकास पर केंद्रित है, जिससे हरित चारे की कमी को दूर किया जा सके। इस समझौते पर ICAR–CIRG के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चटली और श्यून्य एग्रीटेक के प्रबंध निदेशक और सीईओ श्री विजय सिंह ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर मत्स्य, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री, प्रो. एस.पी. सिंह बघेल भी उपस्थित रहे। भारत में 16.2 करोड़ से अधिक बकरियां हैं, लेकिन देश को अभी भी 35.6% हरित चारे की कमी का सामना करना पड़ रहा है। यह कमी सीधे बकरी पालन की उत्पादकता और किसानों की आय को प्रभावित करती है।
श्यून्य का हाइड्रोपोनिक मॉडल पारंपरिक खेती की तुलना में 99% कम पानी का उपयोग करता है और सिर्फ 8 दिनों में ताजा चारा तैयार करता है। एक छोटा सा यूनिट (3,500 वर्ग फुट में) रोजाना 1,000 किलोग्राम हरा चारा उत्पन्न कर सकता है — जो कि पारंपरिक तरीकों की तुलना में 90% अधिक भूमि-कुशल है। यह साझेदारी CIRG के मखदूम कैंपस में एक ग्रोथ एंड लॉजिस्टिक्स सेंटर (GLC) की स्थापना भी करेगी, जिससे अनुसंधान, डेमोंस्ट्रेशन और किसान संपर्क को बल मिलेगा।
यह पहल राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA) और जलवायु सहनशील कृषि में नवाचार (NICRA) जैसे सरकारी कार्यक्रमों के अनुरूप है, और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में भी सहायक होगी। श्यून्य एग्रीटेक के CEO विजय सिंह ने कहा, “यह साझेदारी हमारे लिए एक मील का पत्थर है। हम वैज्ञानिक समाधान प्रदान करके किसानों की आमदनी और पशुओं की सेहत में सुधार लाना चाहते हैं।” CIRG के निदेशक डॉ. चटली ने कहा, “यह सहयोग हमें हाइड्रोपोनिक तकनीक को वैज्ञानिक रूप से मान्य करने और इसे देशभर के किसानों तक पहुंचाने में मदद करेगा।”
यह पांच साल की साझेदारी भारत के पशुपालन क्षेत्र के लिए एक नई दिशा तय करेगी, जिससे हरित चारे की कमी, जलवायु परिवर्तन, और किसानों की आय असुरक्षा जैसे मुद्दों का समाधान संभव हो सकेगा।

