स्पाइन ट्यूमर: इलाज में न बरतें लापरवाही

शरीर में रीढ़ की हड्डी में सुरक्षित स्पाइनल कॉर्ड की भूमिका बिजली की तार की तरह है जैसे स्विच दबाने पर बल्ब जल जाता है। लेकिन बल्ब तक बिजली तार द्वारा ही पहुंचती है। ठीक इसी प्रकार शरीर के प्रत्येक कार्य को पूरा कराने में स्पाइनल कॉर्ड की भूमिका प्रमुख है। नई दिल्ली स्थित सर गंगाराम अस्पताल के न्यूरो एंड स्पाइन डिपाटमेंट के डायरेक्टर डा.सतनाम सिंह छाबड़ा का कहना है कि अभी तक रीढ़ यानी स्पाइन में ट्यूमर का इलाज काफी कठिन माना जाता रहा है, लेकिन आज कई तकनीकों के चलते यह आसान हो गया है लेकिन इसके विषय विशेषज्ञ का होना आवश्यक है। स्पाइन ट्यूमर में सबसे सामान्य वे ट्यूमर हैं जिसमें कैंसर शरीर के किसी और हिस्से में है और ट्यूमर हड्डी में आकर बैठ गया है। इसमें प्रोस्टेट का कैंसर भी शामिल है। इसे मैटास्टेसिस कहा जाता है। अपने देश में सबसे ज्यादा स्पाइन ट्यूमर के रोगी इसी श्रेणी के हैं। स्पाइन ट्यूमर में कमर-दर्द के अलावा नर्व पर दबाव से पैर में लकवा मार जाने का खतरा भी बना रहा है।
स्पाइन के ट्यूमर के अलावा स्पाइनल कॉर्ड में ट्यूमर हो सकता है। इसका सही-सही कारण बताना अभी संभव नहीं हो पाया है लेकिन शोध जारी है। इसकी खास बात यह है कि यह किसी भी उम्र में हो सकता है। इसके इलाज में हड्डी को हटाने के अलावा किमोथैरेपी और रेडियो थैरेपी से जितनी जल्दी इलाज हो पाए, ठीक रहता है, बाद की स्थिति में रोगी को इससे कोई फायदा नहीं होता है। स्पाइन कॉर्ड के ट्यूमर का श्ुारूआती अवस्था में इलाज सर्जरी ही है, लेकिन स्पाइन कॉर्ड की सर्जरी का विशेषज्ञ होना जरूरी है। हां, सर्जरी जितनी जल्दी करा ली जाए परिणाम उतना ही अच्छा आता है।
डा.सतनाम सिंह छाबड़ा
आज की भाग-दौड़ वाली इस जीवन शैली में रीढ़ की सबसे सामान्य बीमारी पीठ दर्द के बारे में डॉक्टरों का कहना है कि रीढ़ की हड्डी और पीठ दर्द का सीधा संबंध है। पीठ दर्द ही न हो, ऐसे प्रयास करने चाहिए। इसके लिए एक मुद्रा में बहुत देर तक खड़े न रहें। प्रेस करने, बर्तन धोने व खाना बनाने जैसे काम के समय भी ‘जिसमें पीठ झुकानी पड़ती है’ बदन की मुद्रा अथवा पोस्चर का ध्यान रखें। सीधे झुक कर भारी बोझ उठाने की बजाए घुटनों के बल बैठ कर उठाना ठीक होता है। तेजी से मुडऩे और झटके के साथ झुकने से पीठ दर्द हो सकता है। स्प्रिंग वाले बिस्तरों का कम ही इस्तेमाल करें तो अच्छा है। डा.सतनाम सिंह छाबड़ा का कहना है कि आज कल स्लिप्ड डिस्क के इलाज के लिए स्पाइनल इंडोस्कोपी जैसी सर्जरी संभव हो गई है। यदि कमर की डिस्क बाहर निकल आए तो टांगों में कमजोरी हो सकती है या दर्द भी हो सकता है। कई बार बाहर निकली डिस्क इतना दबाव डाल सकती है कि पेशाब में भी रूकावट आती है। यदि इस प्रकार का दर्द पहली बार हो तो 90 प्रतिशत लोगों में केवल आराम करने से ही ठीक हो जाता है केवल 10 प्रतिशत लोगों को आपरेशन की आवश्यकता पड़ती है।
इससे बचने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं जैसे कि सबसे पहले जानना जरूरी है कि पीठ दर्द का कारण क्या है, पूरी जांच करवाना जरूरी है। आराम करने और दर्द निवारक मरहम लगाने से आम दर्द ठीक हो जाता है। यदि ज्यादा काम करने से पीठ या कमर दर्द हो रहा है तो आराम करने से ठीक हो जाएगा। शरीर को तनाव में न रखें। ज्यादा बोझ न उठाएं। कब्ज से बचें। शुरू से व्यायाम की आदत डालें। सीढिय़ां चढऩा और तेज चाल में टहलना अच्छा व्यायाम है। सर्फ काम ही नहीं, आराम भी करें। बैठने का पॉस्चर सही रखें। संतुलित आहार लें। भोजन में कैल्शियम वाली सब्जियां शामिल करें। हरी सब्जियां लें। विटामिन डी लें आदि।

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