श्रृंगेरी शंकराचार्य को हरियाणा में मिला राज्य अतिथि सम्मान, कहा – कृष्ण यजुर्वेद में भी है कुरुक्षेत्र का उल्लेख

कुरुक्षेत्र। धर्म विजय यात्रा के चौथे दिन दक्षिणाम्नाय श्री शारदापीठम्, श्रृंगेरी के उत्तराधिकारी जगद्गुरु शंकराचार्य श्री श्री विधुशेखर भारती महास्वामीजी हरियाणा की पवित्र भूमि कुरुक्षेत्र पहुंचे। हरियाणा सरकार ने श्रृंगेरी शंकराचार्य को राज्य अतिथि का विशेष दर्जा प्रदान कर उनका भव्य स्वागत किया।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्रृंगेरी आचार्य ने कहा कि “कुरुक्षेत्र केवल महाभारत की भूमि नहीं, इसका उल्लेख स्वयं कृष्ण यजुर्वेद में भी मिलता है। यह स्थान भारत की वैदिक और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है।”
जगद्गुरु का स्वागत तीरुमला तिरुपति देवस्थानम् के अधिकारियों, वैदिक पंडितों और हजारों श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक पूजन के साथ किया।
श्रृंगेरी शंकराचार्य ने भगवान वेंकटाचलपति स्वामी की समर सेवा की और माता लक्ष्मी व माता गोदा देवी के मंदिरों में विशेष पूजन-अर्चन किया। इसके बाद उन्होंने पवित्र ब्रह्मसरोवर में प्रोक्षणम् किया और पाँच हजार वर्ष प्राचीन माने जाने वाले द्रौपदी कूप का दर्शन किया।
आचार्य श्री ने गीता संग्रहालय का भी अवलोकन किया, जहाँ उन्होंने दुर्लभ पांडुलिपियों, होलोग्राफिक प्रदर्शनों और भारत की आध्यात्मिक यात्रा को दर्शाने वाले आधुनिक प्रस्तुतियों को देखा।
इसके उपरांत उन्होंने भद्रकाली मंदिर और स्थानेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन किए — दोनों ही तीर्थ महाभारत काल से जुड़े माने जाते हैं।
जयाराम विद्यापीठ में उन्होंने आगामी गीता जयंती महोत्सव के लिए भूमि पूजन किया। यात्रा का समापन ज्योतिसर तीर्थ में हुआ, जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था।
इस अवसर पर आचार्य श्री ने गीता के चयनित श्लोकों की गहन व्याख्या की। उपस्थित विद्वानों और श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्होंने ऐसा वैदांत दृष्टिकोण और आध्यात्मिक विश्लेषण पहले कभी नहीं सुना था।

Leave a Reply

Your email address will not be published.