नई दिल्ली। क्लास 8 की नई सोशल साइंस किताब को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। किताब में न्यायपालिका से जुड़े एक चैप्टर में भ्रष्टाचार और लंबित मामलों का जिक्र किया गया था, जिस पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने नाराज़गी जताई। इस मामले की सुनवाई 26 फरवरी को यानी आज सुप्रीम कोर्ट में हो रही है।
विवाद बढ़ने के बाद NCERT ने खेद जताते हुए कहा कि किताब में कुछ सामग्री “अनुचित” थी और यह गलती जानबूझकर नहीं की गई थी। NCERT ने न्यायपालिका के प्रति सम्मान जताते हुए माफी भी मांगी है।
बताया गया कि 23 फरवरी को जारी की गई इस नई किताब में “The role of the judiciary in our society” नाम का चैप्टर है, जिसमें “corruption in the judiciary” सेक्शन जोड़ा गया था। इसमें अदालतों में आने वाली चुनौतियों, न्यायपालिका के अलग-अलग स्तरों पर भ्रष्टाचार की शिकायतों और बड़ी संख्या में लंबित मामलों का जिक्र किया गया था।
मामला सामने आने के बाद NCERT ने तुरंत कार्रवाई करते हुए किताब को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है। साथ ही उसकी छपाई और स्कूलों में वितरण की प्रक्रिया भी फिलहाल रोक दी गई है। अब इस किताब को दोबारा लिखा जाएगा और इसके लिए संबंधित विशेषज्ञों व अधिकारियों से सलाह ली जाएगी, ताकि आगे ऐसी गलती न हो।
CJI ने कहा कि उन्हें इस चैप्टर को लेकर कई जजों और लोगों के कॉल व मैसेज मिल रहे हैं और न्यायपालिका की ईमानदारी पर सवाल उठाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसे न्यायिक संस्थाओं पर गंभीर हमला बताया और कहा कि कानून अपना काम करेगा।
8वीं कक्षा की सोशल साइंस की किताब में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ नाम के चैप्टर को लेकर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस मामले पर कड़ा रुख दिखाया। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ माफी से काम नहीं चलेगा और पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि यह पता लगाना जरूरी है कि यह चैप्टर किन लोगों ने तैयार किया और इसे इस रूप में किताब में कैसे शामिल किया गया। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचौली की बेंच ने कहा कि जिम्मेदार लोगों की पहचान करना जरूरी है।
सरकार की तरफ से बताया गया कि इस चैप्टर को तैयार करने वाले दो लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और उन्हें आगे किसी भी मंत्रालय या यूजीसी से जुड़े काम में शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन कोर्ट ने कहा कि इतनी कार्रवाई काफी नहीं है और मामले की पूरी जांच होनी चाहिए।
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि बाजार में गई करीब 32 किताबों को वापस ले लिया गया है और किताब की दोबारा समीक्षा की जाएगी। इस पर वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस चैप्टर का कुछ हिस्सा ऑनलाइन भी मौजूद है, इसलिए सरकार को उसे हटाने के आदेश भी देने चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह मामला गंभीर है, क्योंकि इस तरह की सामग्री बच्चे, शिक्षक और अभिभावक पढ़ते हैं। इसलिए कोर्ट ने साफ किया कि जब तक पूरी जांच नहीं हो जाती और जिम्मेदार लोगों का पता नहीं चल जाता, तब तक यह सुनवाई जारी रहेगी।

