पटना। राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि कोई स्थायी दोस्त या दुश्मन नहीं होता। इसका ताजा उदाहरण सोमवार को पूर्णिया एयरपोर्ट के उद्घाटन के दौरान देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्णिया के निर्दलीय सांसद और स्वयं को कांग्रेस से जोड़ने वाले पप्पू यादव मंच पर मुस्कुराते हुए बातचीत करते नजर आए।
सोशल मीडिया पर इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले पप्पू यादव एनडीए में शामिल हो सकते हैं। इस कयास के पीछे बिहार की राजनीति का इतिहास भी है। दरअसल, एक समय ऐसा भी आया जब पप्पू यादव बीजेपी के साथ गठबंधन करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात भी की थी। हालांकि, बीजेपी से गठबंधन नहीं होने के बाद पप्पू ने अपनी पार्टी जन अधिकार मोर्चा का अन्य दलों के साथ गठबंधन किया।
साल 2014 में, जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने पहली बार लोकसभा में पूर्ण बहुमत हासिल किया, पप्पू यादव आरजेडी की टिकट पर लोकसभा पहुंचे। उन्हें लगता था कि वे लालू यादव के बाद पार्टी में नंबर दो हैं और कमान उन्हें मिलेगी, लेकिन लालू यादव ने अपनी पार्टी की कमान अपने बेटों को सौंप दी। इससे नराज पप्पू यादव ने 2015 में दो बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उन्हें अपने क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया।
पहली मुलाकात के बाद, पप्पू यादव ने मोदी की तारीफ की, लेकिन आरजेडी ने उन्हें पार्टी विरोधी बताते हुए छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके बाद पप्पू नई राजनीतिक दिशा की तलाश में थे। दूसरी मुलाकात 13 अगस्त 2015 को हुई, जिसमें करीब आधा घंटे बातचीत हुई। पप्पू ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री को क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया और मोदी ने त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया। हालांकि, बीजेपी के भीतर कुछ धड़े चाहते थे कि पप्पू के साथ गठबंधन हो, लेकिन उनकी छवि के कारण यह संभव नहीं हो सका।
अब पूर्णिया एयरपोर्ट पर पीएम मोदी और पप्पू यादव की यह हंसी-खुशी वाली मुलाकात बिहार चुनाव से पहले नई राजनीतिक कयासों को जन्म दे रही है।

