उदयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने लोकतंत्र और संविधान को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उदयपुर में एक कार्यक्रम के दौरान गहलोत ने कहा कि “जब सभी धर्म और जातियां एक साथ चलती हैं, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है।” उन्होंने यह भी कहा कि केवल चुनाव जीतना ही लोकतंत्र नहीं होता, बल्कि लोकतंत्र को जिंदा और सुरक्षित रखना उससे कहीं बड़ी जिम्मेदारी है।गहलोत ने आरोप लगाया कि देश में धीरे-धीरे लोकतंत्र की हत्या हो रही है और संविधान खतरे में है। उन्होंने कहा,
“राहुल गांधी बार-बार कह रहे हैं ‘संविधान बचाओ’, तो उसके पीछे एक गहरी मंशा है। लोकतंत्र में विपक्ष का एक महत्व होता है। अगर विपक्ष नहीं होगा तो पक्ष का भी कोई अस्तित्व नहीं रहेगा।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष का काम सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और जनता की आवाज को बुलंद करना है। “विपक्ष जनता के लिए आवाज उठाता है। अगर उसे दबा दिया गया तो लोकतंत्र की आत्मा ही मर जाएगी,” उन्होंने कहा। गहलोत के इस बयान को मौजूदा राजनीतिक माहौल और केंद्र सरकार की नीतियों पर कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस लगातार यह आरोप लगाती रही है कि मौजूदा शासन में लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है और विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास हो रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत का यह बयान आने वाले चुनावों में विपक्ष की भूमिका और लोकतांत्रिक विमर्श को केंद्र में लाने की कोशिश है।

